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जल संरक्षण का ढिंढोरा, शारदा डैम का पुरसाहाल नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 09 May 2016 11:49 PM IST
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देश भर में जल संरक्षण को लेकर तमाम राजनीतिक और स्वयंसेवी संगठन ढिंढोरा पीट रहे हैं, लेकिन नौ जिलों की लाखों एकड़ जमीन की प्यास बुझाने वाला शारदा सागर डैम की जर्जर काया पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। सिंचाई मंत्री ने जिले के दौरे के दौरान डैम को सिल्ट से पटा देखकर इसका सर्वे कर प्रोजेक्ट भेजने के निर्देश दिए थे। करीब दो सौ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा भी गया, लेकिन यह आज भी ठंडे बस्ते में है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना में वर्ष 1954 में शारदा सागर डैम का निर्माण शुरू हुआ था। उस समय डैम से प्रदेश की 74930 हेक्टेयर असिंचित भूमि को सिंचाई उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। जो शुरूआती दौर में तो पूरा होता रहा, लेकिन अभियंताओं की लापरवाही के चलते डैम में पानी के साथ सिल्ट आनी लगी। जिम्मेदारों ने न तो इसे रोकने के प्रयास किए और न ही एनुअल रिपेयर के लिए मिलने वाली धनराशि से सिल्ट निकाली जा सकी।
शुरूआती दौर में ही ध्यान देते तो नहीं होती ऐसी स्थिति
शारदा डैम को पानी से भरने के लिए दो नहरें शारदा मुख्य नहर से डैम में डाली गई थीं। पहले इन नहरों के टेल पर जाली लगी हुई थी, लेकिन बाद में वह क्षतिग्रस्त हो गईं। यदि हर साल कम बजट में ही सफाई होती रहती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। वर्तमान में डैम के जीरो किमी से ही एक मीटर से ढाई मीटर तक सिल्ट के ढेर जमा हो चुके हैं। पहले इसका डेड लेबल 603 फिट था, अब यह 610 तक हो गया है।
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सिंचाई मंत्री के निर्देश पर बना था प्रोजेक्ट
सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने जब दो साल पहले डैम का दौरा किया, तो डैम में सिल्ट देख उन्होंने अधिशासी अभियंता को तत्काल इसका प्रोजेक्ट बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे। अभियंताओं ने एक निजी कंपनी से करीब 200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनवाकर शासन को भेजा था।
अब सिर्फ नाम का रह गया शारदा डैम
डैम में रेत जमा होने से उसकी स्थिति दयनीय होती जा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक रेत का भार पानी के भार से अधिक होता है और यह अतिरिक्त भार डैम को झेलना पड़ रहा है। वहीं उखड़ी पिचिंग और ड्रेनों के चलते अभियंता पूरी क्षमता से डैम को नहीं भर पा रहे हैं।
सूखे पर पानी का संकट गहराने की आशंका
सूखा पड़ने की स्थिति में सिंचाई विभाग को पानी के संकट से जूझना पड़ सकता है। पुराने रोस्टर को नजरदांज कर न तो डैम में समय से पानी भरा जाता है और न ही नहरों को समय से पानी दिया जाता है। यह स्थिति सिर्फ इसलिए बनी है कि चार वर्षों से डैम की एनुअल रिपेयरिंग के लिए कोई धनराशि नहीं मिली। पानी भंडारण के नाम पर महज औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।
वर्जन
अधिशासी अभियंता द्वारा डैम की जांच पड़ताल की गई थी। इसको लेकर पूर्व में ही शासन को प्रोजेक्ट भेजे जा चुके हैं। बजट मिलने का इंतजार है।
- वीरेंद्र यादव, इंचार्ज अवर अभियंता, शारदा सागर
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प्रथम पंचवर्षीय योजना में वर्ष 1954 में शारदा सागर डैम का निर्माण शुरू हुआ था। उस समय डैम से प्रदेश की 74930 हेक्टेयर असिंचित भूमि को सिंचाई उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। जो शुरूआती दौर में तो पूरा होता रहा, लेकिन अभियंताओं की लापरवाही के चलते डैम में पानी के साथ सिल्ट आनी लगी। जिम्मेदारों ने न तो इसे रोकने के प्रयास किए और न ही एनुअल रिपेयर के लिए मिलने वाली धनराशि से सिल्ट निकाली जा सकी।
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शुरूआती दौर में ही ध्यान देते तो नहीं होती ऐसी स्थिति
शारदा डैम को पानी से भरने के लिए दो नहरें शारदा मुख्य नहर से डैम में डाली गई थीं। पहले इन नहरों के टेल पर जाली लगी हुई थी, लेकिन बाद में वह क्षतिग्रस्त हो गईं। यदि हर साल कम बजट में ही सफाई होती रहती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। वर्तमान में डैम के जीरो किमी से ही एक मीटर से ढाई मीटर तक सिल्ट के ढेर जमा हो चुके हैं। पहले इसका डेड लेबल 603 फिट था, अब यह 610 तक हो गया है।
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सिंचाई मंत्री के निर्देश पर बना था प्रोजेक्ट
सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने जब दो साल पहले डैम का दौरा किया, तो डैम में सिल्ट देख उन्होंने अधिशासी अभियंता को तत्काल इसका प्रोजेक्ट बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे। अभियंताओं ने एक निजी कंपनी से करीब 200 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनवाकर शासन को भेजा था।
अब सिर्फ नाम का रह गया शारदा डैम
डैम में रेत जमा होने से उसकी स्थिति दयनीय होती जा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक रेत का भार पानी के भार से अधिक होता है और यह अतिरिक्त भार डैम को झेलना पड़ रहा है। वहीं उखड़ी पिचिंग और ड्रेनों के चलते अभियंता पूरी क्षमता से डैम को नहीं भर पा रहे हैं।
सूखे पर पानी का संकट गहराने की आशंका
सूखा पड़ने की स्थिति में सिंचाई विभाग को पानी के संकट से जूझना पड़ सकता है। पुराने रोस्टर को नजरदांज कर न तो डैम में समय से पानी भरा जाता है और न ही नहरों को समय से पानी दिया जाता है। यह स्थिति सिर्फ इसलिए बनी है कि चार वर्षों से डैम की एनुअल रिपेयरिंग के लिए कोई धनराशि नहीं मिली। पानी भंडारण के नाम पर महज औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।
वर्जन
अधिशासी अभियंता द्वारा डैम की जांच पड़ताल की गई थी। इसको लेकर पूर्व में ही शासन को प्रोजेक्ट भेजे जा चुके हैं। बजट मिलने का इंतजार है।
- वीरेंद्र यादव, इंचार्ज अवर अभियंता, शारदा सागर