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वॉच टावर खाली, चौकीदार के हवाले बंदी बैरक
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Wed, 05 Apr 2017 11:00 PM IST
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वॉच टावर खाली, चौकीदार के हवाले बंदी बैरक
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प्रतापगढ़, बलिया, फतेहगढ़ आदि जनपदों की जेलों में बंदियों के हंगामे और उपद्रव की घटनाएं सामने आने के बाद जेल की सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर अफसरों की ओर से गाइड लाइन जारी की गईं। इसे गंभीरता से लेकर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के दावे किए गए, लेकिन क्षमता से अधिक बंदियों का बोझ उठा रहे जिला कारागार में सुरक्षा एवं निगरानी कार्य राम भरोसे है। वॉच टावरों पर लंबे समय से किसी की ड्यूटी नहीं लग सकी है। बंदी रक्षक के अभाव में बैरकों की देखरेख भी पूरी नहीं हो पा रही। चौकीदारों से काम लेकर व्यवस्था बनाने के प्रयास जारी हैं। कभी चौकीदार तो कभी होमगार्ड की मदद से सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बताने के खोखले दावे किए जाते हैं।
पुलिस लाइन परिसर के पीछे करीब 13 एकड़ में 1944 में बनाई गई 603 बंदियों की क्षमता वाली जिला जेल में कुल 17 बैरक हैं। वर्तमान में यहां 884 बंदी/कैदी हैं जो कि जेल की क्षमता से बहुत अधिक है। कई ऐसे बंदी भी हैं, जिनको अन्य जेलों में विवाद की स्थिति के बाद यहां भेजा गया। निगरानी के लिए बनें पांच वॉच टावरों पर कर्मचारियों की 24 घंटे तैनाती रहनी चाहिए लेकिन ये पांचों वॉच टावर सिर्फ नाम के रह गए हैं। स्टाफ की कमी के चलते इन पर लंबे समय से ड्यूटी नहीं लगाई जा सकी है। बैरक में बंदियों की निगरानी के लिए भी स्टाफ पूरा नहीं हो पा रहा है। जेल अधिकारियों के अनुसार एक समय में दस से बारह कर्मचारी बैरक ड्यूटी में लगाए जा रहे हैं। कुल बैरक की संख्या ही इससे अधिक है। यह स्थिति आज से नहीं बल्कि काफी समय से है, लेकिन समाधान नहीं हो सका है। कभी चौकीदार तो कभी होमगार्ड ड्यूटी लगाकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
स्टाफ की कमी को लेकर वॉच टावर ड्यूटी नहीं लग पा रही है। महिला वार्डन भी नहीं है। बंदी रक्षकों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। मुहैया स्टाफ में पुख्ता तरीके से निगरानी और बंदियों की देखरेख का कार्य बखूबी निभाया जा रहा है। स्टाफ मिलने पर अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया जाएगा।
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- एसपी मिश्रा, जेलर
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पुलिस लाइन परिसर के पीछे करीब 13 एकड़ में 1944 में बनाई गई 603 बंदियों की क्षमता वाली जिला जेल में कुल 17 बैरक हैं। वर्तमान में यहां 884 बंदी/कैदी हैं जो कि जेल की क्षमता से बहुत अधिक है। कई ऐसे बंदी भी हैं, जिनको अन्य जेलों में विवाद की स्थिति के बाद यहां भेजा गया। निगरानी के लिए बनें पांच वॉच टावरों पर कर्मचारियों की 24 घंटे तैनाती रहनी चाहिए लेकिन ये पांचों वॉच टावर सिर्फ नाम के रह गए हैं। स्टाफ की कमी के चलते इन पर लंबे समय से ड्यूटी नहीं लगाई जा सकी है। बैरक में बंदियों की निगरानी के लिए भी स्टाफ पूरा नहीं हो पा रहा है। जेल अधिकारियों के अनुसार एक समय में दस से बारह कर्मचारी बैरक ड्यूटी में लगाए जा रहे हैं। कुल बैरक की संख्या ही इससे अधिक है। यह स्थिति आज से नहीं बल्कि काफी समय से है, लेकिन समाधान नहीं हो सका है। कभी चौकीदार तो कभी होमगार्ड ड्यूटी लगाकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
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स्टाफ की कमी को लेकर वॉच टावर ड्यूटी नहीं लग पा रही है। महिला वार्डन भी नहीं है। बंदी रक्षकों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। मुहैया स्टाफ में पुख्ता तरीके से निगरानी और बंदियों की देखरेख का कार्य बखूबी निभाया जा रहा है। स्टाफ मिलने पर अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया जाएगा।
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- एसपी मिश्रा, जेलर