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युद्ध की मार : कोलतार 50% महंगा, जिले में कई सड़क परियोजनाओं पर ब्रेक
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मझोला ड्यूनीडैम मार्ग पर काम बंद होने से खड़ी मशीनें। संवाद
कोलतार 30 हजार बढ़कर 80 हजार रुपये प्रति मीट्रिक टन पहुंचा, रोड रोलर, मिक्सर व हॉट मिक्स मशीनों के पहिये थमे
पीलीभीत। पश्चिम एशिया में युद्ध की तपिश से कोलतार की कीमतों में आग लगने से जिले के कई सड़कों के निर्माण पर ब्रेक लग गया है। प्रति मीट्रिक टन करीब 50 फीसदी यानी 30 हजार रुपये तक बढ़ जाने के बाद कोलतार का दाम अब 80 हजार रुपये पहुंच गया है। इससे आपूर्ति भी बाधित हुई है। हालांकि अभी किसी सड़क निर्माण की लागत रिवाइज करने की बात सामने नहीं आई। लोक निर्माण विभाग के अफसर काम रुकने का कारण भी अलग-अलग बता रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस वित्तीय वर्ष में स्वीकृत कार्यों पर कोलतार की कीमतों का असर अधिक पड़ेगा। इस कारण निर्माण स्थलों पर रोड रोलर, मिक्सर व हॉट मिक्स मशीनों के पहिये थम गए हैं। करीब 200 करोड़ के परियोजनाएं प्रभावित बताए जा रहे हैं।
जिले में इस समय करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण व विशेष मरम्मत के कार्य चल रहे हैं। इनमें औद्योगिक एरिया भरा पचपेड़ा काॅरिडोर का काम करीब 113 कराेड़ रुपये से कराया जा रहा है। साथ ही मझोला से ड्यूनी डैम जाने वाली आठ किलोमीटर सड़क का निर्माण करीब नौ करोड़ रुपये से कराया जा रहा है। माधोटांडा कलीनगर मार्ग पर पुलियों के निर्माण के साथ ही करीब 50 करोड़ रुपये के मरम्मत व विशेष मरम्मत के कार्य भी हो रहे हैं। ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध का असर जिले में बन रही सड़कों के निर्माण पर भी पड़ा है। कोलतार के दामों में बढ़ोतरी और आपूर्ति प्रभावित होने से कई काम रुक गए हैं। इनमें भरा पचपेड़ा कॉरिडोर व मझोला-ड्यूनीडैम मार्ग भी शामिल हैं।
मार्च में दो बार और अप्रैल में प्रति मीट्रिक टन बढ़े 11 हजार रुपये
लोक निर्माण विभाग के एक ठेकेदार ने बताया कि मार्च में कोलतार के दाम दो बार बढ़े थे। यह बढ़ोतरी करीब 25 से 30 प्रतिशत थी। अब अप्रैल में प्रति मीट्रिक टन करीब 11 हजार रुपये और बढ़ गए। 50 हजार रुपये मीट्रिक टन आने वाला कोलतार 80 हजार रुपये तक पहुंच गया है। अधिकांश जगहों पर कार्य ठप हो गए हैं। जिले में बड़े प्रोजेक्ट पर भी इसका असर पड़ा है। संवाद
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जिले में इन कार्यों पर पड़ा असर
- मझोला से ड्यूनीडैम जाने वाली आठ किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य ठप है।
- भरा पचपेड़ा औद्योगिक कॉरिडोर का काम भी ठप है। हालांकि विभाग इसका कारण पुलिया निर्माण बता रहा है।
- बरखेड़ा क्षेत्र में खमरियापुल से कनाकोर जाने वाली सड़क का निर्माण भी प्रभावित हुआ है।
- सदर, पूरनपुर, कलीनगर आदि इलाकों में चल रही सड़कों की मरम्मत कार्य पर भी असर पड़ा है।
मथुरा रिफाइनरी से आता है कोलतार
जिले में कोलतार की आपूर्ति मथुरा रिफाइनरी से होती है। लोनिवि के एक ठेकेदार ने बताया कि दो तरह का कोलतार आता है। प्रति ड्रम या टन के हिसाब से आपूर्ति होती है। मार्च व अप्रैल में तीन बार दाम बढ़े हैं। आपूर्ति के लिए भी पांच से सात दिन इंतजार करना पड़ता है।
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12 किमी की सड़क में प्रति किमी पर आठ लाख रुपये हो रहे अतिरिक्त खर्च
जिले में बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में सड़क का निर्माण करा रहे ठेकेदार ने बताया कि वह 12 किलोमीटर लंबी सड़क बनवा रहे हैं। कोलतार का दाम बढ़ जाने से प्रति किलोमीटर करीब आठ लाख रुपये अतिरिक्त लग रहे हैं। पत्थर का काम करा चुके हैं। इस वजह से मजबूरी में सड़क निर्माण कराया जा रहा है। अभी दो किलोमीटर का काम बाकी है। दाम बढ़ने से काम पर काफी असर पड़ा है। निर्माण की रफ्तार भी धीमी हुई है।
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कोलतार के दाम बढ़ गए हैं। इसका असर तो पड़ा है, लेकिन भरा पचपेड़ा व मझोला-ड्यूनीडैम मार्ग काम रुकने की वजह यह नहीं है। जिले में सड़कों की मरम्मत व विशेष मरम्मत के कार्य भी चल रहे हैं।
- राजेश चौधरी, एक्सईएन, लोनिवि
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पुराने सारे काम मार्च में कर लिए गए। खमरिया पुल से कनाकोर का काम चल रहा है। ठेकेदार ने कोलतार तीन गुना महंगा हो जाने की सूचना दी है। नए कार्य शुरू होने पर दिक्कत आएगी। टेंडर पुरानी दर से किए गए और कोलतार महंगा हो गया है।
- एसके जैन, अधिशाषी अभियंता, लोनिवि
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पीलीभीत। पश्चिम एशिया में युद्ध की तपिश से कोलतार की कीमतों में आग लगने से जिले के कई सड़कों के निर्माण पर ब्रेक लग गया है। प्रति मीट्रिक टन करीब 50 फीसदी यानी 30 हजार रुपये तक बढ़ जाने के बाद कोलतार का दाम अब 80 हजार रुपये पहुंच गया है। इससे आपूर्ति भी बाधित हुई है। हालांकि अभी किसी सड़क निर्माण की लागत रिवाइज करने की बात सामने नहीं आई। लोक निर्माण विभाग के अफसर काम रुकने का कारण भी अलग-अलग बता रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस वित्तीय वर्ष में स्वीकृत कार्यों पर कोलतार की कीमतों का असर अधिक पड़ेगा। इस कारण निर्माण स्थलों पर रोड रोलर, मिक्सर व हॉट मिक्स मशीनों के पहिये थम गए हैं। करीब 200 करोड़ के परियोजनाएं प्रभावित बताए जा रहे हैं।
जिले में इस समय करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण व विशेष मरम्मत के कार्य चल रहे हैं। इनमें औद्योगिक एरिया भरा पचपेड़ा काॅरिडोर का काम करीब 113 कराेड़ रुपये से कराया जा रहा है। साथ ही मझोला से ड्यूनी डैम जाने वाली आठ किलोमीटर सड़क का निर्माण करीब नौ करोड़ रुपये से कराया जा रहा है। माधोटांडा कलीनगर मार्ग पर पुलियों के निर्माण के साथ ही करीब 50 करोड़ रुपये के मरम्मत व विशेष मरम्मत के कार्य भी हो रहे हैं। ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध का असर जिले में बन रही सड़कों के निर्माण पर भी पड़ा है। कोलतार के दामों में बढ़ोतरी और आपूर्ति प्रभावित होने से कई काम रुक गए हैं। इनमें भरा पचपेड़ा कॉरिडोर व मझोला-ड्यूनीडैम मार्ग भी शामिल हैं।
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मार्च में दो बार और अप्रैल में प्रति मीट्रिक टन बढ़े 11 हजार रुपये
लोक निर्माण विभाग के एक ठेकेदार ने बताया कि मार्च में कोलतार के दाम दो बार बढ़े थे। यह बढ़ोतरी करीब 25 से 30 प्रतिशत थी। अब अप्रैल में प्रति मीट्रिक टन करीब 11 हजार रुपये और बढ़ गए। 50 हजार रुपये मीट्रिक टन आने वाला कोलतार 80 हजार रुपये तक पहुंच गया है। अधिकांश जगहों पर कार्य ठप हो गए हैं। जिले में बड़े प्रोजेक्ट पर भी इसका असर पड़ा है। संवाद
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जिले में इन कार्यों पर पड़ा असर
- मझोला से ड्यूनीडैम जाने वाली आठ किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य ठप है।
- भरा पचपेड़ा औद्योगिक कॉरिडोर का काम भी ठप है। हालांकि विभाग इसका कारण पुलिया निर्माण बता रहा है।
- बरखेड़ा क्षेत्र में खमरियापुल से कनाकोर जाने वाली सड़क का निर्माण भी प्रभावित हुआ है।
- सदर, पूरनपुर, कलीनगर आदि इलाकों में चल रही सड़कों की मरम्मत कार्य पर भी असर पड़ा है।
मथुरा रिफाइनरी से आता है कोलतार
जिले में कोलतार की आपूर्ति मथुरा रिफाइनरी से होती है। लोनिवि के एक ठेकेदार ने बताया कि दो तरह का कोलतार आता है। प्रति ड्रम या टन के हिसाब से आपूर्ति होती है। मार्च व अप्रैल में तीन बार दाम बढ़े हैं। आपूर्ति के लिए भी पांच से सात दिन इंतजार करना पड़ता है।
12 किमी की सड़क में प्रति किमी पर आठ लाख रुपये हो रहे अतिरिक्त खर्च
जिले में बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में सड़क का निर्माण करा रहे ठेकेदार ने बताया कि वह 12 किलोमीटर लंबी सड़क बनवा रहे हैं। कोलतार का दाम बढ़ जाने से प्रति किलोमीटर करीब आठ लाख रुपये अतिरिक्त लग रहे हैं। पत्थर का काम करा चुके हैं। इस वजह से मजबूरी में सड़क निर्माण कराया जा रहा है। अभी दो किलोमीटर का काम बाकी है। दाम बढ़ने से काम पर काफी असर पड़ा है। निर्माण की रफ्तार भी धीमी हुई है।
कोलतार के दाम बढ़ गए हैं। इसका असर तो पड़ा है, लेकिन भरा पचपेड़ा व मझोला-ड्यूनीडैम मार्ग काम रुकने की वजह यह नहीं है। जिले में सड़कों की मरम्मत व विशेष मरम्मत के कार्य भी चल रहे हैं।
- राजेश चौधरी, एक्सईएन, लोनिवि
पुराने सारे काम मार्च में कर लिए गए। खमरिया पुल से कनाकोर का काम चल रहा है। ठेकेदार ने कोलतार तीन गुना महंगा हो जाने की सूचना दी है। नए कार्य शुरू होने पर दिक्कत आएगी। टेंडर पुरानी दर से किए गए और कोलतार महंगा हो गया है।
- एसके जैन, अधिशाषी अभियंता, लोनिवि