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Pilibhit News: ग्रामीणों बोले- वन विभाग के बुलाने पर जंगल में पहुंचे थे 40 मजदूर
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मौके पर पडा जूता । संवाद
कलीनगर। मजदूर गंगाराम पर जंगल में बाघ के हमले की घटना ने बाघ संरक्षण के दावों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरों का कहना है कि वन विभाग के कर्मचारी के बुलाने पर सोमवार को क्षेत्र के करीब 40 मजदूर सफाई कार्य करने के लिए जंगल में पहुंचे थे। तीन दिन से जंगल में काम चल रहा था। काम के बदले जंगल से इन मजदूरों को थोड़ी बहुत लकड़ी लाने की छूट दे दी जाती थी।
जमुनिया गांव निवासी अर्जुन, वीरेंद्र और छोटेलाल ने बताया कि माला रेंज के एक वनकर्मी के बुलाने पर ही जमुनिया व आसपास गांव के करीब 40 लोग मजदूरी के लिए जंगल में गए थे। अंदर पहुंचने के बाद सभी लोग चार-चार के गुट में अलग-अलग क्षेत्र में सफाई करने में जुट गए। गंगाराम के साथ वह लोग काम कर रहे थे। सभी 50 मीटर के दायरे में थे। इसी दौरान अचानक चीखने की आवाज आई। मौके पर जाकर देखा तो गंगाराम लापता थे। अंगोछा और जूते पड़े थे।
मजदूरों ने बताया कि अक्सर वनकर्मियों के बुलाने पर मजदूर काम करने के लिए जंगल में जाते हैं। मजदूरी में रुपये के अलावा जंगल में गिरी कुछ लकड़ी ले जाने की भी छूट दे दी जाती है। माला रेंज के जिस क्षेत्र में घटना हुई, वहां तीन दिन से सफाई का काम चल रहा था। किसान नेता रंजीत सिंह का कहना है क्षेत्र में लगातार बाघ हमले की घटनाएं हो रही हैं। विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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एक किलोमीटर के दायरे में की गई खोजबीन, नहीं मिला कोई सुराग
घटना की जानकारी के बाद जमुनिया गांव के सैकड़ों लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली व अन्य संसाधनों से जंगल की ओर पहुंच गए। हाथ में लाठी-डंडे लेकर गंगाराम की तलाश करने के लिए जंगल के भीतर घुस गए। घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दायरे में ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की, लेकिन गंगाराम का कोई सुराग नहीं लग सका। कुछ देर बाद वन अवसर भी मौके पर पहुंच गए और वाहनों की मदद से खोजबीन शुरू की है। फिलहाल देर रात तक गंगाराम का कुछ पता नहीं चल सका।
पत्नी सरस्वती और तीन छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
गंगाराम पर बाघ के हमले की घटना की खबर सुनते ही पत्नी सरस्वती बदहवास हो गईं। गंगाराम की दो पुत्री आठ वर्षीय किंजल और छह वर्षीय संजल के अलावा पांच वर्षीय पुत्र लव का भी रो-रोकर बुरा हाल है। गंगाराम चार भाइयों में तीसरे नंबर का था।
आठ दिन बाद अस्पताल से घर पहुंचे पिता की हालत फिर बिगड़ी
गंगाराम के पिता शियाराम लंबे समय से बीमारी चल रहे थे। पिछले आठ दिनों से वह शहर के एक अस्पताल में भर्ती थे। सेहत में कुछ सुधार होने के बाद सियाराम सोमवार को ही घर पहुंचे थे। कुछ देर बाद पुत्र के साथ बाघ हमले की घटना की जानकारी मिलते ही वह बदहवास हो गए। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी हालत फिर बिगड़ने लगी।
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जमुनिया गांव निवासी अर्जुन, वीरेंद्र और छोटेलाल ने बताया कि माला रेंज के एक वनकर्मी के बुलाने पर ही जमुनिया व आसपास गांव के करीब 40 लोग मजदूरी के लिए जंगल में गए थे। अंदर पहुंचने के बाद सभी लोग चार-चार के गुट में अलग-अलग क्षेत्र में सफाई करने में जुट गए। गंगाराम के साथ वह लोग काम कर रहे थे। सभी 50 मीटर के दायरे में थे। इसी दौरान अचानक चीखने की आवाज आई। मौके पर जाकर देखा तो गंगाराम लापता थे। अंगोछा और जूते पड़े थे।
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मजदूरों ने बताया कि अक्सर वनकर्मियों के बुलाने पर मजदूर काम करने के लिए जंगल में जाते हैं। मजदूरी में रुपये के अलावा जंगल में गिरी कुछ लकड़ी ले जाने की भी छूट दे दी जाती है। माला रेंज के जिस क्षेत्र में घटना हुई, वहां तीन दिन से सफाई का काम चल रहा था। किसान नेता रंजीत सिंह का कहना है क्षेत्र में लगातार बाघ हमले की घटनाएं हो रही हैं। विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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एक किलोमीटर के दायरे में की गई खोजबीन, नहीं मिला कोई सुराग
घटना की जानकारी के बाद जमुनिया गांव के सैकड़ों लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली व अन्य संसाधनों से जंगल की ओर पहुंच गए। हाथ में लाठी-डंडे लेकर गंगाराम की तलाश करने के लिए जंगल के भीतर घुस गए। घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दायरे में ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की, लेकिन गंगाराम का कोई सुराग नहीं लग सका। कुछ देर बाद वन अवसर भी मौके पर पहुंच गए और वाहनों की मदद से खोजबीन शुरू की है। फिलहाल देर रात तक गंगाराम का कुछ पता नहीं चल सका।
पत्नी सरस्वती और तीन छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
गंगाराम पर बाघ के हमले की घटना की खबर सुनते ही पत्नी सरस्वती बदहवास हो गईं। गंगाराम की दो पुत्री आठ वर्षीय किंजल और छह वर्षीय संजल के अलावा पांच वर्षीय पुत्र लव का भी रो-रोकर बुरा हाल है। गंगाराम चार भाइयों में तीसरे नंबर का था।
आठ दिन बाद अस्पताल से घर पहुंचे पिता की हालत फिर बिगड़ी
गंगाराम के पिता शियाराम लंबे समय से बीमारी चल रहे थे। पिछले आठ दिनों से वह शहर के एक अस्पताल में भर्ती थे। सेहत में कुछ सुधार होने के बाद सियाराम सोमवार को ही घर पहुंचे थे। कुछ देर बाद पुत्र के साथ बाघ हमले की घटना की जानकारी मिलते ही वह बदहवास हो गए। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी हालत फिर बिगड़ने लगी।

मौके पर पडा जूता । संवाद

मौके पर पडा जूता । संवाद

मौके पर पडा जूता । संवाद