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संपूर्ण समाधान दिवस में प्रधानों ने धरना प्रदर्शन कर डीएम का रास्ता रोका
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पूरनपुर तहसील गेट पर धरना देकर डीएम के काफिले को रोके प्रधानों को समझाने की कोशिश करते एसडीएम, को?
- फोटो : PILIBHIT
पूरनपुर। शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई न कराने आदि के आरोप पर प्रधानों ने संपूर्ण समाधान दिवस में प्रदर्शन कर डीएम का रास्ता रोककर तहसील गेट पर धरना शुरू कर दिया। इससे डीएम का काफिला कुछ देर रुका रहा। एसडीएम, कोतवाल के समझाने पर बमुश्किल आक्रोशित प्रधान माने। डीडीओ, एसडीएम ने प्रधानों से वार्ता कर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। तब आक्रोशित प्रधान माने।
मनरेगा से चकरोडों पर काम कराने पर हो रही समस्या को लेकर विधायक बाबूराम पासवान के साथ प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष नरेशपाल सिंह डीएम से मिले। विधायक ने प्रधानों को समय देने का आग्रह डीएम से किया। प्रधानों को समस्या रखने को दो बजे का समय दिया गया। अपराह्न करीब दो बजे पहुंचे प्रधानों ने संपूर्ण समाधान दिवस के बाहर पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर प्रधानों केे प्रतिनिधि मंडल को संपूर्ण समाधान दिवस में भेजा गया। प्रधानों ने डीएम को शिकायती पत्र सौंपा। डीएम ने समस्या पुलिस से होने की जानकारी प्रधानों से कर उसका निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। मगर प्रधान इससे संतुष्ट नहीं हुए। प्रधानों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर मुख्य गेट पर धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे संपूर्ण समाधान दिवस समाप्त होने पर निकला डीएम का काफिला रुक गया। इससे तहसील स्तरीय अफसरों के हाथ, पांव फूलने लगे। आक्रोशित प्रधानों का कहना था कि पराली जलने पर उन लोगों को जिम्मेदार माना जाता है। शासन की मंशा के अनुरूप काम न होने पर उन पर कार्रवाई होती है। मनरेगा से चकरोडों पर काम कराने पर अक्सर झगड़े होते हैं। पिछले दिनों रंपुराकपूरपुर में हुए झगड़े पर प्रधान से अभद्रता की गई। शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचे प्रधान और कुछ मनरेगा मजदूरों से ही शांतिभंग की आशंका व्यक्त कर हवालात में बंद कर दिया गया। आरोप है कि फरियाद लेकर डीएम के पास पहुंचने पर उनकी समस्या पर ध्यान न देकर टरका दिया गया। मतदाता जागरूकता समारोह में सैकड़ों लोगों के होने के बाद कोरोना के तहत शासन की गाइड लाइन का प्रयोग तो नहीं हुआ। मगर समस्या लेकर पहुंचे अधिकांश प्रधानों को सभागार के बाहर ही रोककर मात्र तीन लोगों को ही अंदर प्रवेश दिया गया। एसडीएम रामस्वरूप, कोतवाल रामसेवक ने प्रदर्शनकारी प्रधानों को बमुश्किल डीएम के काफिले के रास्ते से हटाया। तब कहीं डीएम की गाड़ी सहित अन्य गाड़ियां तहसील परिसर से बाहर निकल सकी। बाद में तहसील सभागार में डीडीओ हवलदार सिंह, एसडीएम रामस्वरूप के साथ प्रधानों की वार्ता हुई। डीडीओ ने विवाद पर समय से इसकी सूचना अफसरों को देने निर्देश दिए। ताकि मौके पर पुलिस को भेजा जा सके। रंपुरा कपूरनपुर प्रधान के साथ हुई घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने का आश्वासन दिया। तब प्रधान शांत हुए ।
43 फरियादी पहुंचे, 26 का हुआ निस्तारण
पूरनपुर डीएम पुलकित खरे की अध्यक्षता में हुए संपूर्ण समाधान दिवस में 43 फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। इसमें 26 फरियादियों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करा दिया गया। डीडीओ, एसडीएम, तहसीलदार सहित जिला स्तरीय और तहसील स्तरीय अफसर मौजूद रहे। संपूर्ण समाधान दिवस के बाद सभागार में डीएम ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों, चिकित्सकों की बैठक ली।
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बीसलपुर : दो शिकायतों का हुआ निपटारा
एसडीएम राकेश गुप्ता की अध्यक्षता में तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में आई 22 में से केवल दो शिकायतों का मौके पर निस्तारण हो पाया। एसडीएम ने शेष 20 शिकायतें अतिशीघ्र निस्तारित करने का निर्देश देते हुए संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों के हवाले कर दी। समाधान दिवस का संचालन तहसीलदार देवेंद्र सिंह ने किया। समाधान दिवस में अधिकांश विभागों के तहसील और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।
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मनरेगा से चकरोडों पर काम कराने पर हो रही समस्या को लेकर विधायक बाबूराम पासवान के साथ प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष नरेशपाल सिंह डीएम से मिले। विधायक ने प्रधानों को समय देने का आग्रह डीएम से किया। प्रधानों को समस्या रखने को दो बजे का समय दिया गया। अपराह्न करीब दो बजे पहुंचे प्रधानों ने संपूर्ण समाधान दिवस के बाहर पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर प्रधानों केे प्रतिनिधि मंडल को संपूर्ण समाधान दिवस में भेजा गया। प्रधानों ने डीएम को शिकायती पत्र सौंपा। डीएम ने समस्या पुलिस से होने की जानकारी प्रधानों से कर उसका निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। मगर प्रधान इससे संतुष्ट नहीं हुए। प्रधानों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन कर मुख्य गेट पर धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे संपूर्ण समाधान दिवस समाप्त होने पर निकला डीएम का काफिला रुक गया। इससे तहसील स्तरीय अफसरों के हाथ, पांव फूलने लगे। आक्रोशित प्रधानों का कहना था कि पराली जलने पर उन लोगों को जिम्मेदार माना जाता है। शासन की मंशा के अनुरूप काम न होने पर उन पर कार्रवाई होती है। मनरेगा से चकरोडों पर काम कराने पर अक्सर झगड़े होते हैं। पिछले दिनों रंपुराकपूरपुर में हुए झगड़े पर प्रधान से अभद्रता की गई। शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचे प्रधान और कुछ मनरेगा मजदूरों से ही शांतिभंग की आशंका व्यक्त कर हवालात में बंद कर दिया गया। आरोप है कि फरियाद लेकर डीएम के पास पहुंचने पर उनकी समस्या पर ध्यान न देकर टरका दिया गया। मतदाता जागरूकता समारोह में सैकड़ों लोगों के होने के बाद कोरोना के तहत शासन की गाइड लाइन का प्रयोग तो नहीं हुआ। मगर समस्या लेकर पहुंचे अधिकांश प्रधानों को सभागार के बाहर ही रोककर मात्र तीन लोगों को ही अंदर प्रवेश दिया गया। एसडीएम रामस्वरूप, कोतवाल रामसेवक ने प्रदर्शनकारी प्रधानों को बमुश्किल डीएम के काफिले के रास्ते से हटाया। तब कहीं डीएम की गाड़ी सहित अन्य गाड़ियां तहसील परिसर से बाहर निकल सकी। बाद में तहसील सभागार में डीडीओ हवलदार सिंह, एसडीएम रामस्वरूप के साथ प्रधानों की वार्ता हुई। डीडीओ ने विवाद पर समय से इसकी सूचना अफसरों को देने निर्देश दिए। ताकि मौके पर पुलिस को भेजा जा सके। रंपुरा कपूरनपुर प्रधान के साथ हुई घटना की रिपोर्ट दर्ज कराने का आश्वासन दिया। तब प्रधान शांत हुए ।
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43 फरियादी पहुंचे, 26 का हुआ निस्तारण
पूरनपुर डीएम पुलकित खरे की अध्यक्षता में हुए संपूर्ण समाधान दिवस में 43 फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। इसमें 26 फरियादियों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करा दिया गया। डीडीओ, एसडीएम, तहसीलदार सहित जिला स्तरीय और तहसील स्तरीय अफसर मौजूद रहे। संपूर्ण समाधान दिवस के बाद सभागार में डीएम ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों, चिकित्सकों की बैठक ली।
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बीसलपुर : दो शिकायतों का हुआ निपटारा
एसडीएम राकेश गुप्ता की अध्यक्षता में तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में आई 22 में से केवल दो शिकायतों का मौके पर निस्तारण हो पाया। एसडीएम ने शेष 20 शिकायतें अतिशीघ्र निस्तारित करने का निर्देश देते हुए संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों के हवाले कर दी। समाधान दिवस का संचालन तहसीलदार देवेंद्र सिंह ने किया। समाधान दिवस में अधिकांश विभागों के तहसील और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।