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यह देखिए...लापरवाही दो वर्ष से नहीं लगाई गई पशुओं को वैक्सीन

Tue, 07 Dec 2021 01:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 07 Dec 2021 01:45 AM IST
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Vaccine to animals not given for two years
पूरनपुर के गांव अजीतपुर बिल्हा में खाली पड़ा पशु पालक का घर। संवाद - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। जिले में दिसंबर 2020 को 3.40 लाख वैक्सीन आई थी। सिर्फ पूरनपुर के लिए ही एक लाख से ज्यादा वैक्सीन आई थी, लेकिन वैक्सीन का सैंपल फेल होने के बाद पूरे प्रदेश में दी गई वैक्सीन शासन ने वापस ले ली। उसके बाद से वैक्सीन अभी तक नहीं आई। दो वर्ष से वैक्सीन नहीं लगाई गई अगर जानवरों को वैक्सीन लग गई होती तो शायद वायरस न इतना ताकतवर हो पाता और न ही सैकड़ों जानवरों की जान जाती।
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30वें चरण की वैक्सीन लगनी थी
2019 में वैक्सीनेशन का 30वां चरण चलना था। लेकिन सैंपल फेल होने के कारण वैक्सीन वापस चली गई। सिर्फ पीलीभीत में ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों का भी यही हाल था।
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दो साल तक सिर्फ पत्राचार होता रहा
पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों का कहना है कि वैक्सीन शासन से मिलती है। इस दौरान कई बार लखनऊ पत्र भेजे गए। फोन भी किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब एकाएक इतने जानवरों की मौत से हड़कंप मचा तो लखनऊ तक मामला गूंज उठा।
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लखनऊ के अफसरों ने ली जानकारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार सोमवार को लखनऊ तक के अफसरों को मामले की जानकारी मिली। पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों ने जिले के अधिकारियों से बात की और मामला जाना। मामले में पूरी रिपोर्ट मांगी है। हालांकि जिले के अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।

चिकित्सा की वैकल्पिक व्यवस्था की गई
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार बीमार पशुओं के इलाज के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं। कुछ घरेलू उपाय भी पशुपालकों को बता रहे हैं। इसके परिणाम सकारात्मक मिल रहे हैं लेकिन ठोस इलाज वैक्सीन ही है।
कैसे बचा सकते हैं अपने पशुओं को
- जहां पशु की लार गिरती है वहां कपड़े धोने का सोडा व बूझे चूने का छिड़काव करें
-बीमार जानवरों के लिए लाल दवा का प्रयोग करें।
- संक्रमित जानवर की जीभ में छाले हैं तो हल्दी लगाएं।
- बीमार पशुओं को स्वास्थ्य पशुओं से तत्काल दूर करें। उनका दाना-पानी अलग करें।
- पशुओं को बाहर खुला न छोड़े।
- पशुओं को सूखे में बांधे, कीचड़ और गंदगी से दूर रखें।
- बीमार पशु न बेचें न खरीदें।
-फिनाइल का भी उपयोग कर सकते हैं।
- मृत पशु को तत्काल जला दें, संभव न हो तो गहरे गड्ढे में गाड़ दें।
- पशु के पैर को नीम और पीपल के छाले का काढ़ा बनाकर दिन में दो से तीन बार धोना चाहिए।
-प्रभावित पैरों को फिनाइल-युक्त पानी से दिन में दो-तीन बार धोकर मक्खी को दूर रखने वाली मलहम का प्रयोग करें।
- मुुंह के छाले को एक ग्राम फिटकरी 100 मिलीलीटर पानी में घोलकर दिन में तीन बार धोना चाहिए। इस दौरान पशुओं को मुलायम एवं सुपाच्य भोजन दिया जाना चाहिए।
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