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दो साल से पैक हैं जनरेटर
पीलीभीत।
Updated Tue, 16 Jun 2015 11:24 PM IST
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जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में करीब दो साल पूर्व भेजे गए
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साउंडप्रूफ जनरेटर ईंधन के अभाव में पैक रखे गए हैं। वहीं बिजली सप्लाई न
मिलने से सरकारी अस्पतालों में जांच समेत अन्य कार्य ठप हो रहे हैं।
शासन द्वारा सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या कराने को करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन इन योजनाओं का खाका खींचने के दौरान हुई छोटी सी चूक बड़ा खामियाजा बन सकती है। बानगी के तौर पर जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तिरपाल से ढके सात साउंडप्रूफ जनरेटरों को देखा जा सकता है। शासन ने बिजली सप्लाई न होने से चिकित्सीय सेवाएं बाधित होने के चलते जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को करीब 25 लाख की लागत के 25-25 किलोवाट के सात साउंडप्रूफ जनरेटर दिए थे। यह सभी जनरेटर साल पूर्व सीएचसी में भेजे गए थे। सीएचसी में इन सभी जनरेटर की फाउंडेशन बनाकर उन्हें स्थापित कर दिया। बताते हैं कि जब जनरेटरों को चालू करने की बारी आई तो शासन द्वारा बजट रिलीज न करने का खुलासा हुआ। इधर दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी यह लाखों के जनरेटर तिरपाल में कैद खड़े हैं। इनके संचालन को अभी तक धनराशि नहीं दी गई है। जिसके चलते आज भी स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली गुल होते ही स्वास्थ्य सेवाएं भी गुल होती नजर आती है। इस संबंध में नेशनल हेल्थ मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सर्वेश वर्मा ने बताया कि शासन द्वारा कम बजट मिलने पर इन जनरेटरों का संचालन नहीं हो सका है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। फिलहाल अभी कोई आदेश नहीं आया है।
शासन द्वारा सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या कराने को करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन इन योजनाओं का खाका खींचने के दौरान हुई छोटी सी चूक बड़ा खामियाजा बन सकती है। बानगी के तौर पर जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तिरपाल से ढके सात साउंडप्रूफ जनरेटरों को देखा जा सकता है। शासन ने बिजली सप्लाई न होने से चिकित्सीय सेवाएं बाधित होने के चलते जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को करीब 25 लाख की लागत के 25-25 किलोवाट के सात साउंडप्रूफ जनरेटर दिए थे। यह सभी जनरेटर साल पूर्व सीएचसी में भेजे गए थे। सीएचसी में इन सभी जनरेटर की फाउंडेशन बनाकर उन्हें स्थापित कर दिया। बताते हैं कि जब जनरेटरों को चालू करने की बारी आई तो शासन द्वारा बजट रिलीज न करने का खुलासा हुआ। इधर दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी यह लाखों के जनरेटर तिरपाल में कैद खड़े हैं। इनके संचालन को अभी तक धनराशि नहीं दी गई है। जिसके चलते आज भी स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली गुल होते ही स्वास्थ्य सेवाएं भी गुल होती नजर आती है। इस संबंध में नेशनल हेल्थ मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सर्वेश वर्मा ने बताया कि शासन द्वारा कम बजट मिलने पर इन जनरेटरों का संचालन नहीं हो सका है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। फिलहाल अभी कोई आदेश नहीं आया है।