{"_id":"5edfccd28ebc3e42b4102b4a","slug":"turbulence-pilibhit-news-bly408715538","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाघिन के हमले के बाद आक्रोशित ग्रामीणों का देर रात तक चला बवाल..लाठी भांजकर पुलिस ने खदेड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाघिन के हमले के बाद आक्रोशित ग्रामीणों का देर रात तक चला बवाल..लाठी भांजकर पुलिस ने खदेड़ा
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पीलीभीत/गजरौला। बाघिन के हमले में किसान शुवेंदु विश्वास की मौत के बाद शुरू हुआ बवाल सोमवार देर रात तक चला। आक्रोशित भीड़ ने वन विभाग के रेंज कार्यालय में तोड़फोड़ की। आठ वाहनों को फूंक दिया गया। सरकारी अभिलेख भी तहस-नहस कर दिए। रोकने पर पुलिस पर भी भीड़ हमलावर हो गई। हालात बेकाबू होते देख डीएम-एसपी मौके पर पहुंच गए। समझाने पर भी जब भीड़ नहीं मानी तो दस थानों की फोर्स बुलाकर लाठी भांजकर खदेड़ दिया। बवाल करने वालों पर पुलिस और वनविभाग की ओर से संगीन धाराओं में दो एफआईआर गजरौला थाने में दर्ज की गईं। 23 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।
घटना की शुरुआत सोमवार रात करीब साढ़े नौ बजे हुई। गजरौला थाना क्षेत्र की गोयल कॉलेनी के रहने वाले 35 वर्षीय शुवेंदु विश्वास मकान से करीब सौ मीटर दूर स्थित अपने खेत की रखवाली कर रहे थे। इसी बीच टाइगर रिजर्व की माला रेंज के जंगल से निकलकर बाघिन ने हमला कर शुवेंदु को मार दिया। इसके बाद ग्रामीण जमा हुए। कई दिनों से बाघिन की चहलकदमी जारी थी और वन विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए, इसलिए ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिवार के कुछ सदस्य शव के पास रुक रहे और ग्रामीणों की भीड़ रिछोला पुलिस चौकी के सामने माला रेंज की अस्थायी वन चौकी पर पहुंच गई। ग्रामीणों ने वन चौकी को आग के हवाले कर दिया। गुस्सा यही नहीं थमा, कुछ ही देर में भीड़ बढ़ती चली गई और रेंज कार्यालय पर धावा बोल दिया। परिसर में एक झोपड़ी, कार, चार बाइक समेत आठ वाहन आग के हवाले कर दिए। कार्यालय में घुसकर कंप्यूटर, सीसीटीवी का डीवीआर सिस्टम तोड़ दिया। अभिलेख भी फाड़ दिए गए। हंगामा का पता लगने पर रिछोला चौकी के पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया तो उन पर भी भीड़ हमलावर हो गई और उन्हें पीट दिया।
गजरौला थाने से पहुंची फोर्स भी भीड़ के गुस्से के आगे बेबस नजर आई। नतीजतन बवाल बढ़ता चला गया और हालात बेकाबू हो गए। आरोप है कि हवाई फायरिंग करने के साथ ही पथराव किया गया। आनन-फानन में डीएम वैभव श्रीवास्तव, एसपी अभिषेक दीक्षित, एएसपी रोहित मिश्र, सीओ सिटी प्रवीण मलिक, सीओ पूरनपुर योगेंद्र कुमार, सीओ सदर प्रमोद कुमार समेत कई अफसर आ गए। भीड़ को बातचीत कर शांत कराने का प्रयास किया तो कोई नहीं माना। पुलिस ने शव कब्जे में लेने की कोशिश की तो अफसरों को भी घेर लिया गया। बस इसी के बाद प्रशासन सख्त हुआ। बरखेड़ा, जहानाबाद, पूरनपुर, माधोटांडा, न्यूरिया समेत 10 थानों और पुलिस लाइन का फोर्स मौके पर बुला लिया गया। फिर पुलिस और भीड़ में संघर्ष हो गया। पुलिस ने भी जमकर लाठियां भांजीं। इसके बाद तो भगदड़ सी मच गया और भीड़ को खदेड़ने में अफसर कामयाब रहे। फिर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस पर भेज दिया गया। इस मामले में वन विभाग के रेंजर रामजी और गजरौला थाने के दरोगा सुभाष चंद की ओर से ग्रामीणों पर संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। रात भर चली दबिशों के बाद पुलिस की एफआईआर में नामजद सभी 23 लोगों की गिरफ्तारी कर ली गई। मंगलवार सुबह सभी का चालान कर कोर्ट में पेश किया गया। वहां से जेल भेज दिया गया।
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इंस्पेक्टर और तीन सिपाही भी हुए घायल
पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए संघर्ष में ग्रामीणों के साथ ही तीन सिपाहियों के भी चोटें आईं। इनमें गजरौला थाने में तैैनात राहुल कुमार, अरुण और माधोटांडा में तैनात अभिषेक कुमार शामिल हैं, उनके सिर व शरीर के अन्य हिस्सों में चोट आईं। गजरौला थाने के इंस्पेक्टर जयप्रकाश सिंह भी घायल हुए। रात में ही घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। सिपाही अभिषेक कुमार को अस्पताल में भर्ती किया गया है।
30 किए नामजद, 120 अज्ञात आरोपी बनाए
माला रेंजर रामजी की ओर से जानलेवा हमले, आगजनी, बलवा, महामारी अधिनियम की धाराओं धारा 188,269,270,147,149,436,307 के साथ ही सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, सेवन क्रिमिनल लॉ एक्ट में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसमें गोयल कॉलोनी निवासी हरीश, गनेश, विश्वजीत, अभिषेक, सहदेव, रतनचंद्र, अभिजीत, सागर, विपुल, अरविंद, माधव, मनीष, महादेव, देवाशीष, रविंद्र, समुल, शेखर, गोविंद, गोलक, हरिशंकर, नरेशदेव, सपन, गौरंग, करमदत्त, गोपी, शिवा, देवा, शिवा, मधु मंडल और घेरा रिछौला गांव निवासी सतवीर 30 नामजद और 120 अज्ञात आरोपी बनाए हैं। इसके अलावा पुलिस की ओर से लिखी गई रिपोर्ट में भी इन्हीं 30 नामजद में से 23 को नामजद और 120 अज्ञात आरोपी बनाए हैं।
ये 23 किए गए गिरफ्तार
हरीश, गनेश, विश्वजीत, सपन, गौरंग, मनीष, अरविंद, विपुल, महादेव, रविंद्र, माधव, सागर, शेखर, हरिशंकर, श्यामल, नरेशदेव, गोलक, गोविंद, देवाशीष, सहदेव, अभिषेक, अभिजीत, रतनचंद निवासी गोयल कॉलोनी।
डीएफओ और वनकर्मियों ने भागकर खुद की जान बचाई
सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार पर भी ग्रामीणों ने हमला किया। उन्होंने भागकर खुद को बचाया। इसके अलावा वन विभाग के कर्मचारियों के आवासों पर भी धावा बोला गया। वहां से वनकर्मियों के परिवार भी दहशत में भागकर खुद को बचाते नजर आए। घरों में घुसकर तोड़फोड़ की गई। बाद में तो आलम यह हो गया कि घटनास्थल से दूर जाकर खुद को कमरों में बंद करके वनकर्मी और उनके परिजन खुद को सुरक्षित करते दिखाई दिए।
दूसरे दिन गांव में सन्नाटा, पुरुष धरपकड़ के डर से भागे
पीलीभीत। बाघिन के हमले में किसान की मौत के बाद हुए बवाल के दूसरे दिन मंगलवार को गजरौला की माला रेंज के जंगल से सटी गोयल कॉलोनी में दहशत के बीच सन्नाटा पसरा रहा। पुलिस और वन विभाग की ओर से संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के बाद ताबड़तोड़ दबिशें दीं। पकड़े जाने के डर से अधिकांश पुरुष इससे पहले ही भाग चुके थे। घरों पर महिलाएं-बच्चे ही थे। पुलिस अधिकारी दोबारा विवाद न हो जाए इस आशंका के चलते घटनास्थल के पास पुख्ता इंतजाम किए रहे। वहीं गांव वाले पुलिस पर बर्बरता बरतने का आरोप लगाते रहे।
बाघिन के हमले में मारे गए किसान शुवेंदु विश्वास की पत्नी कोनिका, भाई सुबीर ने बताया कि एक तरफ परिवार के मुखिया की जान चली गई। इसके बाद शव को जबरन उठाकर पुलिस वाले ले गए। रोकने पर बेरहमी से पिटाई की गई। घरों में घुसकर सामान में तोड़फोड़ की गई। घटना के बाद घर आए बहनोई शिवांकर मंडल को भी पुलिस बेवजह पकड़कर ले गई। परिवार की अन्य महिलाओं पर भी लाठियां बरसाई गईं। इसके अलावा गांव के अन्य परिवारों की महिलाएं को भी पीटा गया। शरीर पर आए जख्मों को दिखाते हुए सभी अघिकारियों से लेकर पुलिस तक सभी पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते रहे। बच्चों के चेहरों पर भी बीती रात हुई घटना की दहशत दिखाई दे रही थी।
घटना के बाद हुए बवाल को लेकर दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। नामजद किए गए 23 हमलावरों की गिरफ्तारी कर जेल भेजा गया है। मामले में निष्पक्ष जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाघ के हमलों को लेकर स्थाई समाधान के लिए शासन स्तर पर भी बात की गई है। - अभिषेक दीक्षित, एसपी
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घटना की शुरुआत सोमवार रात करीब साढ़े नौ बजे हुई। गजरौला थाना क्षेत्र की गोयल कॉलेनी के रहने वाले 35 वर्षीय शुवेंदु विश्वास मकान से करीब सौ मीटर दूर स्थित अपने खेत की रखवाली कर रहे थे। इसी बीच टाइगर रिजर्व की माला रेंज के जंगल से निकलकर बाघिन ने हमला कर शुवेंदु को मार दिया। इसके बाद ग्रामीण जमा हुए। कई दिनों से बाघिन की चहलकदमी जारी थी और वन विभाग की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए, इसलिए ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। परिवार के कुछ सदस्य शव के पास रुक रहे और ग्रामीणों की भीड़ रिछोला पुलिस चौकी के सामने माला रेंज की अस्थायी वन चौकी पर पहुंच गई। ग्रामीणों ने वन चौकी को आग के हवाले कर दिया। गुस्सा यही नहीं थमा, कुछ ही देर में भीड़ बढ़ती चली गई और रेंज कार्यालय पर धावा बोल दिया। परिसर में एक झोपड़ी, कार, चार बाइक समेत आठ वाहन आग के हवाले कर दिए। कार्यालय में घुसकर कंप्यूटर, सीसीटीवी का डीवीआर सिस्टम तोड़ दिया। अभिलेख भी फाड़ दिए गए। हंगामा का पता लगने पर रिछोला चौकी के पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया तो उन पर भी भीड़ हमलावर हो गई और उन्हें पीट दिया।
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गजरौला थाने से पहुंची फोर्स भी भीड़ के गुस्से के आगे बेबस नजर आई। नतीजतन बवाल बढ़ता चला गया और हालात बेकाबू हो गए। आरोप है कि हवाई फायरिंग करने के साथ ही पथराव किया गया। आनन-फानन में डीएम वैभव श्रीवास्तव, एसपी अभिषेक दीक्षित, एएसपी रोहित मिश्र, सीओ सिटी प्रवीण मलिक, सीओ पूरनपुर योगेंद्र कुमार, सीओ सदर प्रमोद कुमार समेत कई अफसर आ गए। भीड़ को बातचीत कर शांत कराने का प्रयास किया तो कोई नहीं माना। पुलिस ने शव कब्जे में लेने की कोशिश की तो अफसरों को भी घेर लिया गया। बस इसी के बाद प्रशासन सख्त हुआ। बरखेड़ा, जहानाबाद, पूरनपुर, माधोटांडा, न्यूरिया समेत 10 थानों और पुलिस लाइन का फोर्स मौके पर बुला लिया गया। फिर पुलिस और भीड़ में संघर्ष हो गया। पुलिस ने भी जमकर लाठियां भांजीं। इसके बाद तो भगदड़ सी मच गया और भीड़ को खदेड़ने में अफसर कामयाब रहे। फिर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस पर भेज दिया गया। इस मामले में वन विभाग के रेंजर रामजी और गजरौला थाने के दरोगा सुभाष चंद की ओर से ग्रामीणों पर संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। रात भर चली दबिशों के बाद पुलिस की एफआईआर में नामजद सभी 23 लोगों की गिरफ्तारी कर ली गई। मंगलवार सुबह सभी का चालान कर कोर्ट में पेश किया गया। वहां से जेल भेज दिया गया।
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पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए संघर्ष में ग्रामीणों के साथ ही तीन सिपाहियों के भी चोटें आईं। इनमें गजरौला थाने में तैैनात राहुल कुमार, अरुण और माधोटांडा में तैनात अभिषेक कुमार शामिल हैं, उनके सिर व शरीर के अन्य हिस्सों में चोट आईं। गजरौला थाने के इंस्पेक्टर जयप्रकाश सिंह भी घायल हुए। रात में ही घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। सिपाही अभिषेक कुमार को अस्पताल में भर्ती किया गया है।
30 किए नामजद, 120 अज्ञात आरोपी बनाए
माला रेंजर रामजी की ओर से जानलेवा हमले, आगजनी, बलवा, महामारी अधिनियम की धाराओं धारा 188,269,270,147,149,436,307 के साथ ही सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, सेवन क्रिमिनल लॉ एक्ट में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसमें गोयल कॉलोनी निवासी हरीश, गनेश, विश्वजीत, अभिषेक, सहदेव, रतनचंद्र, अभिजीत, सागर, विपुल, अरविंद, माधव, मनीष, महादेव, देवाशीष, रविंद्र, समुल, शेखर, गोविंद, गोलक, हरिशंकर, नरेशदेव, सपन, गौरंग, करमदत्त, गोपी, शिवा, देवा, शिवा, मधु मंडल और घेरा रिछौला गांव निवासी सतवीर 30 नामजद और 120 अज्ञात आरोपी बनाए हैं। इसके अलावा पुलिस की ओर से लिखी गई रिपोर्ट में भी इन्हीं 30 नामजद में से 23 को नामजद और 120 अज्ञात आरोपी बनाए हैं।
ये 23 किए गए गिरफ्तार
हरीश, गनेश, विश्वजीत, सपन, गौरंग, मनीष, अरविंद, विपुल, महादेव, रविंद्र, माधव, सागर, शेखर, हरिशंकर, श्यामल, नरेशदेव, गोलक, गोविंद, देवाशीष, सहदेव, अभिषेक, अभिजीत, रतनचंद निवासी गोयल कॉलोनी।
डीएफओ और वनकर्मियों ने भागकर खुद की जान बचाई
सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार पर भी ग्रामीणों ने हमला किया। उन्होंने भागकर खुद को बचाया। इसके अलावा वन विभाग के कर्मचारियों के आवासों पर भी धावा बोला गया। वहां से वनकर्मियों के परिवार भी दहशत में भागकर खुद को बचाते नजर आए। घरों में घुसकर तोड़फोड़ की गई। बाद में तो आलम यह हो गया कि घटनास्थल से दूर जाकर खुद को कमरों में बंद करके वनकर्मी और उनके परिजन खुद को सुरक्षित करते दिखाई दिए।
दूसरे दिन गांव में सन्नाटा, पुरुष धरपकड़ के डर से भागे
पीलीभीत। बाघिन के हमले में किसान की मौत के बाद हुए बवाल के दूसरे दिन मंगलवार को गजरौला की माला रेंज के जंगल से सटी गोयल कॉलोनी में दहशत के बीच सन्नाटा पसरा रहा। पुलिस और वन विभाग की ओर से संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के बाद ताबड़तोड़ दबिशें दीं। पकड़े जाने के डर से अधिकांश पुरुष इससे पहले ही भाग चुके थे। घरों पर महिलाएं-बच्चे ही थे। पुलिस अधिकारी दोबारा विवाद न हो जाए इस आशंका के चलते घटनास्थल के पास पुख्ता इंतजाम किए रहे। वहीं गांव वाले पुलिस पर बर्बरता बरतने का आरोप लगाते रहे।
बाघिन के हमले में मारे गए किसान शुवेंदु विश्वास की पत्नी कोनिका, भाई सुबीर ने बताया कि एक तरफ परिवार के मुखिया की जान चली गई। इसके बाद शव को जबरन उठाकर पुलिस वाले ले गए। रोकने पर बेरहमी से पिटाई की गई। घरों में घुसकर सामान में तोड़फोड़ की गई। घटना के बाद घर आए बहनोई शिवांकर मंडल को भी पुलिस बेवजह पकड़कर ले गई। परिवार की अन्य महिलाओं पर भी लाठियां बरसाई गईं। इसके अलावा गांव के अन्य परिवारों की महिलाएं को भी पीटा गया। शरीर पर आए जख्मों को दिखाते हुए सभी अघिकारियों से लेकर पुलिस तक सभी पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते रहे। बच्चों के चेहरों पर भी बीती रात हुई घटना की दहशत दिखाई दे रही थी।
घटना के बाद हुए बवाल को लेकर दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। नामजद किए गए 23 हमलावरों की गिरफ्तारी कर जेल भेजा गया है। मामले में निष्पक्ष जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाघ के हमलों को लेकर स्थाई समाधान के लिए शासन स्तर पर भी बात की गई है। - अभिषेक दीक्षित, एसपी