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ट्रांस क्षेत्र में एएनएम भर्ती मामले में हाईकोर्ट गंभीर
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 19 May 2016 10:59 PM IST
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भरतपुर पीएचसी में एएनएम भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने सीएमओ को 30 मई को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। यह आदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने भरतपुर की शशि प्रभा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए 15 मई को पारित किया।
ट्रांस शारदा क्षेत्र के गांव भरतपुर निवासी शशि प्रभा ने एनआरएचएम के तहत वर्ष 2011 में एएनएम पद पर उनकी जगह हाईस्कूल की कथित फर्जी अंकतालिका के आधार पर नवदीप कौर की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दायर याचिका में कहा गया कि एएनएम पद पर नियुक्ति हाईस्कूल में प्राप्त अंकों के आधार पर की जानी थी। याची के हाईस्कूल में 372 अंक थे और भरतपुर स्वास्थ्य केंद्र द्वारा जारी मेरिट सूची में उसका नाम पहले स्थान पर था, जबकि एएनएम पद पर नियुक्त नवदीप कौर के हाईस्कूल में 318 अंक ही थे और मेरिट सूची में नाम तीसरे नंबर पर था। बाद में अधिकारियों से मिलीभगत करके नवदीप कौर का गलत तरीके से चयन कर लिया गया था। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए 18 अप्रैल 2015 को नियुक्ति संबंधी पत्रावली कोर्ट में तलब की थी। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील संजय कुमार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के संबंध में सीएमओ को दो पत्र भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने नियुक्ति संबंधी मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 30 मई तक मूल पत्रावली उपलब्ध न कराने पर सीएमओ को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। याची शशिप्रभा की ओर से अधिवक्ता शम्स विकास ने बहस की।
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ट्रांस शारदा क्षेत्र के गांव भरतपुर निवासी शशि प्रभा ने एनआरएचएम के तहत वर्ष 2011 में एएनएम पद पर उनकी जगह हाईस्कूल की कथित फर्जी अंकतालिका के आधार पर नवदीप कौर की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दायर याचिका में कहा गया कि एएनएम पद पर नियुक्ति हाईस्कूल में प्राप्त अंकों के आधार पर की जानी थी। याची के हाईस्कूल में 372 अंक थे और भरतपुर स्वास्थ्य केंद्र द्वारा जारी मेरिट सूची में उसका नाम पहले स्थान पर था, जबकि एएनएम पद पर नियुक्त नवदीप कौर के हाईस्कूल में 318 अंक ही थे और मेरिट सूची में नाम तीसरे नंबर पर था। बाद में अधिकारियों से मिलीभगत करके नवदीप कौर का गलत तरीके से चयन कर लिया गया था। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए 18 अप्रैल 2015 को नियुक्ति संबंधी पत्रावली कोर्ट में तलब की थी। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील संजय कुमार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के संबंध में सीएमओ को दो पत्र भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने नियुक्ति संबंधी मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 30 मई तक मूल पत्रावली उपलब्ध न कराने पर सीएमओ को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश दिए हैं। याची शशिप्रभा की ओर से अधिवक्ता शम्स विकास ने बहस की।
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