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पीलीभीत: दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क का विरोध, व्यापारी हुए लामबंद, सौंपा ज्ञापन

Thu, 17 Sep 2026 02:06 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: Mukesh Kumar Updated Thu, 17 Sep 2026 02:06 PM IST
सार

पीलीभीत में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 15 अक्तूबर से प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क का विरोध किया है। व्यापारियों ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। पदाधिकारियों ने अपर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।

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Traders protested against the charges levied on UPI payments in Pilibhit
व्यापारियों ने अपर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 15 अक्तूबर से प्रस्तावित शुल्क के विरोध में व्यापारी लामबंद हो गए हैं। पीलीभीत में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने सरकार के इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। जिलाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा।

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व्यापारियों ने कहा कि खुदरा और थोक कारोबार पहले से ही बढ़ते खर्च, ऑनलाइन कारोबार से मिल रही चुनौती और लगातार घटते मुनाफे से जूझ रहा है। ऐसे में दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। व्यापारियों का कहना है कि किराना, खाद्यान्न, थोक तथा रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं के कारोबार में मुनाफे की गुंजाइश पहले ही बेहद कम है। ऐसे में भुगतान पर लगने वाला शुल्क उनकी वास्तविक कमाई को और प्रभावित करेगा।
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कारोबारियों पर बढ़ेगा दबाव 
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि आज बड़ी संख्या में ग्राहक नकद के बजाय यूपीआई से भुगतान करना पसंद करते हैं। ऐसे में दुकानदारों के पास डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करने का व्यावहारिक विकल्प भी नहीं है। इसका सीधा असर कारोबारियों की लागत पर पड़ेगा। व्यापारियों को माल खरीदने, आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान करने, कर्मचारियों का वेतन देने और बिजली सहित अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। अतिरिक्त शुल्क से इस पर भी दबाव बढ़ेगा।

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शुल्क से मुक्त रखने की मांग 
व्यापारियों ने सरकार से पारंपरिक कारोबार के लिए शुल्क रहित व्यवस्था जारी रखने अथवा छोटे और मध्यम व्यापारियों को प्रस्तावित शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखने की मांग की। उनका कहना है कि यदि शुल्क लागू करना जरूरी हो तो ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे इसका असर व्यापारियों के सीमित मुनाफे पर न पड़े। शुल्क के बदले मिलने वाली कर संबंधी छूट और समायोजन की व्यवस्था भी पूरी तरह स्पष्ट किए जाने की मांग उठाई गई।

व्यापार मंडल ने कहा कि शुल्क लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। पदाधिकारियों के अनुसार स्थानीय व्यापारी केवल सामान बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह रोजगार देने के साथ ही स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था और बाजार की निरंतरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ पारंपरिक कारोबार की आर्थिक क्षमता को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल, युवा जिलाध्यक्ष दीप अग्रवाल, जिला उपाध्यक्ष प्रियांश अग्रवाल, महामंत्री रजत बंसलिया, हर्षल सिंह, तुषार, शिवेश अग्रवाल, शुभम गुप्ता, माधव गुप्ता सहित बड़ी संख्या में व्यापारी और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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