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Pilibhit News: पकड़े जाने पर अब चिड़ियाघर नहीं भेजे जाएंगे बाघ और तेंदुए
Fri, 11 Aug 2023 11:18 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 11 Aug 2023 11:18 PM IST
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बाघ का फाइल फोटो ।
पीलीभीत। पूरनपुर सामाजिक वानिकी रेंज के गोपालपुर बीट में बाघों और तेंदुओं के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। सेंटर बन जाने से टाइगर रिजर्व के बाहर आने वाले बाघों और तेंदुओं को पकड़ने के बाद चिड़ियाघरों नहीं भेजा जाएगा। उनको यहीं रखा जाएगा। बाद में उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा।
करीब तीन साल पहले शासन की ओर से रेस्क्यू सेंटर मंजूर किया गया था, जिसके लिए 4.72 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई। 20 फीसदी काम भी हो चुका है। फिलहाल यहां 10 बाघों और तेंदुओं को रखने की व्यवस्था है।
पीलीभीत के जंगल को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। अनुकूल वातावरण के चलते जंगल में बाघ, तेंदुए समेत वन्यजीवों की संख्या में इजाफा होता गया, लेकिन संसाधनों की कमी होने से वन्यजीवों की सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं हो सके। ऐसे में आबादी क्षेत्र में आकर हमला करने वाले बाघों और तेंदुओं के पकड़े जाने पर उन्हें चिड़ियाघर में भेजना पड़ता था।
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इसको देखते हुए शासन ने यहां भी रेस्क्यू सेंटर निर्माण की मंजूरी दे दी। इसके लिए पूरनपुर क्षेत्र में सामाजिक वानिकी के दायरे में जमीन को चिह्नित किया गया। दो चरणों में कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी सीएनडीएस संस्था को सौंपी गई। पहली किस्त के रूप में 4.72 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे लगभग 20 फीसदी काम भी पूरा हो चुका है।
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रेस्क्यू सेंटर खुलने से ये मिलेंगे लाभ
रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों के रहने के लिए बाड़े, फीडिंग चैंबर, मेडिकल सुविधाएं आदि मुहैया कराई जाएंगी। इसके अलावा तालाब भी विकसित किए जाएंगे तो वन्यजीवों को पानी की कमी महसूस न हो, इसके लिए तालाबों में सोलर पंप लगाकर पानी भरा जाएगा। इसके अलावा अन्य जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।
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क्या होता है रेस्क्यू सेंटर
जंगल से बाहर आकर लोगों पर हमला करने वाले बाघ व तेंदुए को पकड़ा जाता था लेकिन इन्हें अब तक चिड़ियाघर भेज दिया जाता था। अब ऐसे बाघ और तेंदुओं को रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा। बाद में उनके स्वभाव में बदलाव आने के बाद यहीं जंगल में छोड़ा जाएगा।
-- पूरनपुर क्षेत्र में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का निर्माण शुरू कर दिया गया है। पहली किस्त की मिली धनराशि से बीस प्रतिशत काम हो चुका है। यहां पर फिलहाल अभी दस जानवरों के रखने की व्यवस्था की जाएगी।
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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करीब तीन साल पहले शासन की ओर से रेस्क्यू सेंटर मंजूर किया गया था, जिसके लिए 4.72 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई। 20 फीसदी काम भी हो चुका है। फिलहाल यहां 10 बाघों और तेंदुओं को रखने की व्यवस्था है।
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पीलीभीत के जंगल को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। अनुकूल वातावरण के चलते जंगल में बाघ, तेंदुए समेत वन्यजीवों की संख्या में इजाफा होता गया, लेकिन संसाधनों की कमी होने से वन्यजीवों की सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं हो सके। ऐसे में आबादी क्षेत्र में आकर हमला करने वाले बाघों और तेंदुओं के पकड़े जाने पर उन्हें चिड़ियाघर में भेजना पड़ता था।
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इसको देखते हुए शासन ने यहां भी रेस्क्यू सेंटर निर्माण की मंजूरी दे दी। इसके लिए पूरनपुर क्षेत्र में सामाजिक वानिकी के दायरे में जमीन को चिह्नित किया गया। दो चरणों में कार्य पूरा कराने की जिम्मेदारी सीएनडीएस संस्था को सौंपी गई। पहली किस्त के रूप में 4.72 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे लगभग 20 फीसदी काम भी पूरा हो चुका है।
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रेस्क्यू सेंटर खुलने से ये मिलेंगे लाभ
रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों के रहने के लिए बाड़े, फीडिंग चैंबर, मेडिकल सुविधाएं आदि मुहैया कराई जाएंगी। इसके अलावा तालाब भी विकसित किए जाएंगे तो वन्यजीवों को पानी की कमी महसूस न हो, इसके लिए तालाबों में सोलर पंप लगाकर पानी भरा जाएगा। इसके अलावा अन्य जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।
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क्या होता है रेस्क्यू सेंटर
जंगल से बाहर आकर लोगों पर हमला करने वाले बाघ व तेंदुए को पकड़ा जाता था लेकिन इन्हें अब तक चिड़ियाघर भेज दिया जाता था। अब ऐसे बाघ और तेंदुओं को रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा। बाद में उनके स्वभाव में बदलाव आने के बाद यहीं जंगल में छोड़ा जाएगा।
- नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व

बाघ का फाइल फोटो ।