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पिंजरा लगाते वक्त वनकर्मियों के सामने आया बाघ, मची भगदड़
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खन्नौत नदी के पास बाघ पकडने के लिए पिंजड़ा लगाते वनकर्मी।
- फोटो : PILIBHIT
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माधोटांडा। जंगल से बाहर निकलकर चार दिन से डेरा जमाए बाघ को कैद करने के लिए रविवार को पिंजरा लगा दिया गया। पिंजरा लगाते समय अचानक वनकर्मियों के सामने बाघ निकल आया, जिससे भगदड़ मच गई। हवाई फायरिंग और पटाखे छोड़कर वन कर्मियों ने खुद को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद 50 मीटर दूर बैठा बाघ देर शाम तक पिंजरे में कैद नहीं हो सका। डीएफओ संजीव कुमार टीम के साथ मौके पर जुटे रहे।
टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर लगभग एक माह से माधोटांडा क्षेत्र में एक बाघ की मौजूदगी बनी हुई है। पहले हरदोई ब्रांच और खारजा नहर कि पटरियों में शरण लेकर बाघ कई दिनों तक चहलकदमी करता रहा। उधर, सप्ताह भर पूर्व से बाघ शाहगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत खन्नौत नदी की सीमा में पहुंच गया। चार दिन पूर्व खन्नौत नदी के नजदीकी क्षेत्र में झोपड़ियों में रह रहे बंगाली परिवारों के घास चर रहे एक मवेशी को मार डालने के बाद बाघ ने वहां डेरा जमा लिया। नरकुल क्षेत्र में शरण लिया बाघ दिन के अलावा रात में भी चहलकदमी करते देखा जा रहा है। उधर, बाघ की बढ़ती सक्रियता के बाद अफसरों ने तस्वीर की मदद से उसका मिलान किया, जिस पर माधोटांडा और शाहगढ़ क्षेत्र में एक ही बाघ होने की पुष्टि हुई। उसके बाद मुख्यालय के निर्देश पर शनिवार को मौके पर पिंजरा भेज दिया गया।
रविवार को सामाजिक वानिकी रेंजर अयूब हसन, वजीर हसन टीम के साथ पिंजरा लगाने के लिए नरकुल क्षेत्र में पहुंचे। पिंजरा लगाते समय अचानक नरकुल से निकलकर बाघ सामने आ गया। बाघ को नजदीक देख वनकर्मी सहम गए।
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सूत्रों के मुताबिक, वन कर्मियों ने बचाव में एक हवाई फायर के अलावा पटाखे छोड़े। इसके बाद किसी तरह पिंजरे में बकरी को बांधा गया। इसके बाद वनकर्मी सुरक्षित स्थान तक पहुंच सके। पिंजरा लगने के बाद से ही बाघ 50 मीटर की दूरी पर जाकर बैठ गया, लेकिन देर शाम तक वह पिंजरे में कैद नहीं हो सका।
बाघ को सामने देख पिंजरे से चिल्लाने लगी बकरी
नरकुल क्षेत्र में पिंजरा लगाने के बाद बाघ को लालच देने के लिए बकरी बांधी गई। पिंजरा लगाते समय ही बाघ सामने निकलकर आ गया। वनकर्मियों के वहां से जाते ही बाघ पिंजरे के और नजदीक पहुंच गया। बाघ को देख पिंजरे में बंधी बकरी चिल्लाने लगी। हालांकि देर रात तक बाघ पिंजरे की कैद से दूर रहा।
बाघ को कैद करने के लिए पिंजरा लगा दिया गया है। उसमें बकरे को बांधा गया है। मौके पर मौजूद रहकर निगरानी की जा रही है। - संजीव कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी
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टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर लगभग एक माह से माधोटांडा क्षेत्र में एक बाघ की मौजूदगी बनी हुई है। पहले हरदोई ब्रांच और खारजा नहर कि पटरियों में शरण लेकर बाघ कई दिनों तक चहलकदमी करता रहा। उधर, सप्ताह भर पूर्व से बाघ शाहगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत खन्नौत नदी की सीमा में पहुंच गया। चार दिन पूर्व खन्नौत नदी के नजदीकी क्षेत्र में झोपड़ियों में रह रहे बंगाली परिवारों के घास चर रहे एक मवेशी को मार डालने के बाद बाघ ने वहां डेरा जमा लिया। नरकुल क्षेत्र में शरण लिया बाघ दिन के अलावा रात में भी चहलकदमी करते देखा जा रहा है। उधर, बाघ की बढ़ती सक्रियता के बाद अफसरों ने तस्वीर की मदद से उसका मिलान किया, जिस पर माधोटांडा और शाहगढ़ क्षेत्र में एक ही बाघ होने की पुष्टि हुई। उसके बाद मुख्यालय के निर्देश पर शनिवार को मौके पर पिंजरा भेज दिया गया।
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रविवार को सामाजिक वानिकी रेंजर अयूब हसन, वजीर हसन टीम के साथ पिंजरा लगाने के लिए नरकुल क्षेत्र में पहुंचे। पिंजरा लगाते समय अचानक नरकुल से निकलकर बाघ सामने आ गया। बाघ को नजदीक देख वनकर्मी सहम गए।
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सूत्रों के मुताबिक, वन कर्मियों ने बचाव में एक हवाई फायर के अलावा पटाखे छोड़े। इसके बाद किसी तरह पिंजरे में बकरी को बांधा गया। इसके बाद वनकर्मी सुरक्षित स्थान तक पहुंच सके। पिंजरा लगने के बाद से ही बाघ 50 मीटर की दूरी पर जाकर बैठ गया, लेकिन देर शाम तक वह पिंजरे में कैद नहीं हो सका।
बाघ को सामने देख पिंजरे से चिल्लाने लगी बकरी
नरकुल क्षेत्र में पिंजरा लगाने के बाद बाघ को लालच देने के लिए बकरी बांधी गई। पिंजरा लगाते समय ही बाघ सामने निकलकर आ गया। वनकर्मियों के वहां से जाते ही बाघ पिंजरे के और नजदीक पहुंच गया। बाघ को देख पिंजरे में बंधी बकरी चिल्लाने लगी। हालांकि देर रात तक बाघ पिंजरे की कैद से दूर रहा।
बाघ को कैद करने के लिए पिंजरा लगा दिया गया है। उसमें बकरे को बांधा गया है। मौके पर मौजूद रहकर निगरानी की जा रही है। - संजीव कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी