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अचानक खेत में दिखा बाघ.. किसानों ने गन्ने के खेत में छिपकर बचाई जान
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सुहास गांव के समीप खेत में बाघ के पैरों के निशान ट्रेस करता वनकर्मी
- फोटो : PILIBHIT
गजरौला। क्षेत्र के गांव सुहास में बृहस्पतिवार सुबह करीब 10 बजे उस समय हड़कंप मच गया, जब एक बाघ खेत में खड़ा दिखाई दिया। बाघ को देख खेतों में काम कर रहे किसान भाग खड़े हुए। वहीं कुछ किसानों ने गन्ने के खेत में छिपकर जान बचाई।
ठंड की दस्तक के साथ ही क्षेत्र में बाघों ने फिर से दस्तक देनी शुरू कर दी है। इन दिनों किसान गन्ना और गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार कर रहे हैं। बृहस्पतिवार सुबह भी कुछ किसान गांव के समीप खेतों में काम कर रहे थे। इसी बीच एक किसान को गांव निवासी लालाराम के खेत में बाघ दिखाई दिया। बाघ देखते ही किसान शोर शराबा करते हुए भाग खड़े हुए। कुछ किसानों ने गन्ने के खेतों में छिपकर अपनी जान बचाई। किसानों के मुताबिक बाघ कुछ देर चहलकदमी करने के बाद पास के गन्ने के खेत में घुस गया। इसकी सूचना सामाजिक वानिकी प्रभाग को दी गई। बीसलपुर सामाजिक वानिकी के वन दरोगा सुरेशपाल वर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बाघ के पैरों के निशान ट्रेस किए। उन्होंने ग्रामीणों को समूह के रूप में ही खेतों की ओर जाने की अपील की। बाघ की दहशत के चलते बृहस्पतिवार शाम तक किसान खेतों की ओर नहीं गए। मंगलवार रात बैवहा फार्म के समीप एक बाघिन शावक के साथ देखी गई थी।
मैं सुबह अपने खेत में आलू की बुवाई कर रहा था। शोर शराबे पर मैंने निगाह उठाकर देखा तो खेत में बाघ घूमता दिखाई दिया। सामने मौत देखकर मैंने भागना ही सही समझा। - जमुना प्रसाद, किसान, गांव सुहास
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मेरे घर के पीछे ही गन्ने के खेतों में बाघ छिपा है। अब तो घर से बाहर निकलने में भी डर लग रहा है। वन विभाग को बाघ को रेस्क्यू करने के प्रयास करने चाहिए। - फूलचंद, किसान, गांव सुहास
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ठंड की दस्तक के साथ ही क्षेत्र में बाघों ने फिर से दस्तक देनी शुरू कर दी है। इन दिनों किसान गन्ना और गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार कर रहे हैं। बृहस्पतिवार सुबह भी कुछ किसान गांव के समीप खेतों में काम कर रहे थे। इसी बीच एक किसान को गांव निवासी लालाराम के खेत में बाघ दिखाई दिया। बाघ देखते ही किसान शोर शराबा करते हुए भाग खड़े हुए। कुछ किसानों ने गन्ने के खेतों में छिपकर अपनी जान बचाई। किसानों के मुताबिक बाघ कुछ देर चहलकदमी करने के बाद पास के गन्ने के खेत में घुस गया। इसकी सूचना सामाजिक वानिकी प्रभाग को दी गई। बीसलपुर सामाजिक वानिकी के वन दरोगा सुरेशपाल वर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बाघ के पैरों के निशान ट्रेस किए। उन्होंने ग्रामीणों को समूह के रूप में ही खेतों की ओर जाने की अपील की। बाघ की दहशत के चलते बृहस्पतिवार शाम तक किसान खेतों की ओर नहीं गए। मंगलवार रात बैवहा फार्म के समीप एक बाघिन शावक के साथ देखी गई थी।
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मैं सुबह अपने खेत में आलू की बुवाई कर रहा था। शोर शराबे पर मैंने निगाह उठाकर देखा तो खेत में बाघ घूमता दिखाई दिया। सामने मौत देखकर मैंने भागना ही सही समझा। - जमुना प्रसाद, किसान, गांव सुहास
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मेरे घर के पीछे ही गन्ने के खेतों में बाघ छिपा है। अब तो घर से बाहर निकलने में भी डर लग रहा है। वन विभाग को बाघ को रेस्क्यू करने के प्रयास करने चाहिए। - फूलचंद, किसान, गांव सुहास