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रायपुर के निकट हरदोई ब्रांच नहर में बैठा दिखा बाघ
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत/जराकोठी।
Updated Tue, 28 Nov 2017 10:25 PM IST
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बाघ
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अमरिया क्षेत्र के कई स्थानों पर भी दिखे पगचिह्न
ठंड बढ़ने के साथ ही टाइगर रिजर्व के जंगल से निकल कर बाघ बाहर आने लगे हैं। पौर खास में दो दिन से शावकों संग देखी गई बाघिन के बाद जराकोठी क्षेत्र ग्राम रायपुर के निकट हरदोई ब्रांच नहर में मंगलवार करीब दो बजे कुछ लोगों ने बाघ को देखा। इसके अलावा अमरिया क्षेत्र के भी कुछ स्थानों पर बाघ के पगचिह्न मिले हैं।
हरदोई ब्रांच नहर में बाघ को सबसे पहले गांव रायपुर निवासी हरजीत सिंह ने उस समय देखा जब वह संडई हाल्ट स्कूल से बच्चों को लेकर वापस घर आ रहे थे। नहर में बाघ को बैठा देखा तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने इसकी जानकारी ग्रामीणों को दी। सूचना पर क्षेत्र के ग्रामीण भी नहर के निकट एकत्रित होने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक काफी देर तक बाघ नहर के पानी में किनारे बैठा रहा। उसके बाद वह जंगल की ओर चला गया। ग्रामीणों की सूचना पर वनकर्मी भी मौके पर पहुंचे। वन रक्षक प्रयाग ने गांव के लोगों ने नहर की ओर अकेले न जाने की सलाह दी है। वनकर्मियों ने भी क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी आदर्श कुमार ने बताया कि इसके अलावा अमरिया क्षेत्र में ग्राम धुंधरा मेें राम सिंह के गेहूं के खेत में बाघ के पगचिह्न वनकर्मियों को मिले हैं। इसके अलावा अमरिया क्षेत्र के ही ग्राम नावकूड व सुस्यार के बीच में नदी के रेत में तथा गजरौला फार्म के चकरोड पर भी बाघ के पगचिह्न पाए गए हैं। बाघ की चहलकदमी बीसलपुर क्षेत्र में भी हो रही है। यहां क्षेत्र के ग्राम मिंटरपुर में राममूर्ति लाल के गन्ने के खेत में भी बाघ के पगचिह्न मिले हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को बाघ से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं और निरंतर निगरानी की जा रही है।
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ठंड बढ़ने के साथ ही टाइगर रिजर्व के जंगल से निकल कर बाघ बाहर आने लगे हैं। पौर खास में दो दिन से शावकों संग देखी गई बाघिन के बाद जराकोठी क्षेत्र ग्राम रायपुर के निकट हरदोई ब्रांच नहर में मंगलवार करीब दो बजे कुछ लोगों ने बाघ को देखा। इसके अलावा अमरिया क्षेत्र के भी कुछ स्थानों पर बाघ के पगचिह्न मिले हैं।
हरदोई ब्रांच नहर में बाघ को सबसे पहले गांव रायपुर निवासी हरजीत सिंह ने उस समय देखा जब वह संडई हाल्ट स्कूल से बच्चों को लेकर वापस घर आ रहे थे। नहर में बाघ को बैठा देखा तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने इसकी जानकारी ग्रामीणों को दी। सूचना पर क्षेत्र के ग्रामीण भी नहर के निकट एकत्रित होने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक काफी देर तक बाघ नहर के पानी में किनारे बैठा रहा। उसके बाद वह जंगल की ओर चला गया। ग्रामीणों की सूचना पर वनकर्मी भी मौके पर पहुंचे। वन रक्षक प्रयाग ने गांव के लोगों ने नहर की ओर अकेले न जाने की सलाह दी है। वनकर्मियों ने भी क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है।
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प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी आदर्श कुमार ने बताया कि इसके अलावा अमरिया क्षेत्र में ग्राम धुंधरा मेें राम सिंह के गेहूं के खेत में बाघ के पगचिह्न वनकर्मियों को मिले हैं। इसके अलावा अमरिया क्षेत्र के ही ग्राम नावकूड व सुस्यार के बीच में नदी के रेत में तथा गजरौला फार्म के चकरोड पर भी बाघ के पगचिह्न पाए गए हैं। बाघ की चहलकदमी बीसलपुर क्षेत्र में भी हो रही है। यहां क्षेत्र के ग्राम मिंटरपुर में राममूर्ति लाल के गन्ने के खेत में भी बाघ के पगचिह्न मिले हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को बाघ से बचने के उपाय बताए जा रहे हैं और निरंतर निगरानी की जा रही है।
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