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टाइगर रिजर्व में शीशम के पेड़ों पर आफत
पीलीभीत।
Updated Tue, 01 Mar 2016 08:09 PM IST
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बराही जंगल में शीशम के सैकड़ों पेड़ किसी बीमारी का शिकार हो गए हैं या लकड़ी माफिया की उन पर नजर है, मामला जो भी हो लेकिन टाइगर रिजर्व में वन संपदा को हो रहे नुकसान को रोकने में किसी की दिलचस्पी नहीं है। कटान पर रोक होने के कारण यह बीमारीग्रस्त बेशकीमती पेड़ या तो गिरकर सड़ गल जाएंगे या फिर जिम्मेदारों की साठगांठ से लकड़ी माफिया के कब्जे में आ जाएंगे। टाइगर रिजर्व का जंगल शारदा नदी के पार अंतर्राष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर 24 से 29 तक पड़ता है। इसमें बराही रेंज का लग्गा भग्गा, भूड़ा गोरखडिब्बी, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा एवं गुन्हान गांव के क्षेत्र लगते हैं।
400 एकड़ भूमि पर थारु जनजाति का कब्जा
लग्गा भग्गा के पूर्वी इलाके में लगभग 400 एकड़ भूमि पर थारू जनजाति का अवैध कब्जा है। यहां मात्र 45 परिवारों को राजस्व विभाग ने आवासीय पट्टे पर भूमि दी थी। लग्गा भग्गा वन क्षेत्र के कर्मी यह अतिक्रमण ढकिया ताल्लुके महाराजपुर क्षेत्र का और ढकिया ताल्लुके महाराजपुर के वनकर्मी इसे लग्गा भग्गा क्षेत्र में होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ते आ रहे हैं।
संयुक्त सीमांकन न होने से हो रहे वारेन्यारे
सीमा पिलर नंबर 27 से 28 के मध्य सैकड़ों एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की जद में है। मात्र चंद पट्टेदारों की भूमि के सहारे सर्वाधिक भूमि टाइगर रिजर्व की जोतकर खेती की जा रही है और संयुक्त सीमांकन को ढाल बनाकर वन संपदा नष्ट की जा रही है।
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बची भूमि पर खड़े शीशम के पेड़ों पर आफत
अतिक्रमणकारियों के चंगुल से टाइगर रिजर्व की जो करीब सौ एकड़ भूमि बची थी, उस पर सैकड़ों शीशम के पेड़ तो खड़े हैं, लेकिन यह अचानक सूखते जा रहे हैं। यह पेड़ किसी बीमारी का शिकार हुए हैं, या अतिक्रमण कर खेती की योजना के चलते इन्हें सुखाया जा रहा है, इस पर वन विभाग के जिम्मेदार लोग खामोश हैं। फिलहाल मामला जो भी हो, नियमानुसार इन पेड़ों का टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन निगम कटान नहीं करा सकता। ऐसे में सूख रहे पेड़ या तो चूल्हों में जलाने के काम आ रहे हैं या फिर साठगांठ के चलते फर्नीचर बनाने वालों को बेचा जा रहा है। यह वन संपदा नेपाल ले जाकर भी बेची जा रही है।
शीशम के वृक्ष बीमारी से सूख रहे हैं। यह समस्या टाइगर रिजर्व के बराही और हरीपुर जंगल की ही नहीं, बल्कि प्रदेश भर में शीशम के पेड़ों में पैदा हुई है। इस बीमारी का पता वन विशेषज्ञ लगा रहे हैं। अतिक्रमण की समस्या को हल करने तथा वन भूमि पर कब्जा लेने को डीएफओ के निर्देश पर अगले सप्ताह से सीमांकन कराया जाएगा।
-अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी, बराही
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400 एकड़ भूमि पर थारु जनजाति का कब्जा
लग्गा भग्गा के पूर्वी इलाके में लगभग 400 एकड़ भूमि पर थारू जनजाति का अवैध कब्जा है। यहां मात्र 45 परिवारों को राजस्व विभाग ने आवासीय पट्टे पर भूमि दी थी। लग्गा भग्गा वन क्षेत्र के कर्मी यह अतिक्रमण ढकिया ताल्लुके महाराजपुर क्षेत्र का और ढकिया ताल्लुके महाराजपुर के वनकर्मी इसे लग्गा भग्गा क्षेत्र में होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ते आ रहे हैं।
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संयुक्त सीमांकन न होने से हो रहे वारेन्यारे
सीमा पिलर नंबर 27 से 28 के मध्य सैकड़ों एकड़ भूमि पर अतिक्रमण की जद में है। मात्र चंद पट्टेदारों की भूमि के सहारे सर्वाधिक भूमि टाइगर रिजर्व की जोतकर खेती की जा रही है और संयुक्त सीमांकन को ढाल बनाकर वन संपदा नष्ट की जा रही है।
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बची भूमि पर खड़े शीशम के पेड़ों पर आफत
अतिक्रमणकारियों के चंगुल से टाइगर रिजर्व की जो करीब सौ एकड़ भूमि बची थी, उस पर सैकड़ों शीशम के पेड़ तो खड़े हैं, लेकिन यह अचानक सूखते जा रहे हैं। यह पेड़ किसी बीमारी का शिकार हुए हैं, या अतिक्रमण कर खेती की योजना के चलते इन्हें सुखाया जा रहा है, इस पर वन विभाग के जिम्मेदार लोग खामोश हैं। फिलहाल मामला जो भी हो, नियमानुसार इन पेड़ों का टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन निगम कटान नहीं करा सकता। ऐसे में सूख रहे पेड़ या तो चूल्हों में जलाने के काम आ रहे हैं या फिर साठगांठ के चलते फर्नीचर बनाने वालों को बेचा जा रहा है। यह वन संपदा नेपाल ले जाकर भी बेची जा रही है।
शीशम के वृक्ष बीमारी से सूख रहे हैं। यह समस्या टाइगर रिजर्व के बराही और हरीपुर जंगल की ही नहीं, बल्कि प्रदेश भर में शीशम के पेड़ों में पैदा हुई है। इस बीमारी का पता वन विशेषज्ञ लगा रहे हैं। अतिक्रमण की समस्या को हल करने तथा वन भूमि पर कब्जा लेने को डीएफओ के निर्देश पर अगले सप्ताह से सीमांकन कराया जाएगा।
-अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी, बराही