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Pilibhit News: टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन भूमि पर सीमांकन किया तेज, जीपीएस सर्वे के साथ लगाए जा रहे पिलर
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शारदा पार वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, 300 हेक्टेयर जमीन कब्जे में
कलीनगर। शारदा नदी के पार रमनगरा क्षेत्र में टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रयास तेज किए हैं। उपप्रभागीय वनाधिकारी के नेतृत्व में जीपीएस तकनीक की सहायता से चल रहे सीमांकन कार्य के साथ-साथ सीमा पिलर लगाए जा रहे हैं। सर्वे के दौरान बड़े पैमाने पर वन भूमि पर अतिक्रमण होने की बात सामने आई है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत शारदा नदी के पार स्थित रमनगरा, ढकिया तालुके महाराजपुर और गुनहान गांवों में लंबे समय से वन भूमि पर कब्जों की शिकायतें उठती रही हैं। सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां प्रशासनिक निगरानी भी चुनौतीपूर्ण रही है। हाल के दिनों में जिला प्रशासन, गृह मंत्रालय और सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) की सक्रियता के बाद पीटीआर प्रशासन ने सर्वे अभियान शुरू कराया।
उपप्रभागीय वनाधिकारी के नेतृत्व में तीन सर्वेयरों की टीम ने 27 मई से जीपीएस तकनीक के माध्यम से सीमांकन कार्य शुरू किया। इस दौरान वन भूमि की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया और सीमा चिह्नित करने के लिए पिलर लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। सर्वे के दौरान दो ट्रैक्टर वन भूमि पर जोताई करते पकड़े गए थे। दोनों वाहनों को एसएसबी चौकी पर खड़ा कराया गया। मामले में वन विभाग की ओर से जुर्माना लगाने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि क्षेत्र में ट्रैक्टरों को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं भी बनी हुई हैं।
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इधर, सर्वे के दौरान अब तक करीब 300 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जे की बात सामने आई। कई स्थानों पर प्रस्तावित जंगल, पौधरोपण क्षेत्र और टाइगर रिजर्व की भूमि पर भी कब्जे पाए गए हैं। बड़ा दायरा होने के चलते सीमांकन कार्य जारी है। हालांकि सीमांकन के बाद पीटीआर प्रशासन के सामने कब्जे हटाकर भूमि को पुनः वन विभाग के नियंत्रण में लाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
एसडीएम रमेश चौहान ने बताया कि शारदा पार सीमांकन की प्रक्रिया जारी है। कब्जों की स्थिति भी सामने आई है। सीमांकन पूरा होने के बाद आगे की प्रक्रिया पर अमल किया जाएगा।
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रमनगरा में सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर कब्जे के आरोप
राजस्व और वन विभाग के अभिलेखों के अनुसार, रमनगरा गांव में गाटा संख्या 1, 2, 3, 5, 7 सहित कई गाटों की भूमि पूरी तरह टाइगर रिजर्व के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसके अलावा कई गाटों में पट्टेदारों की भूमि के साथ बड़ी मात्रा में वन भूमि भी शामिल है। क्षेत्रीय जानकारों के अनुसार वर्षों से इन जमीनों पर खेती की जा रही है और वन विभाग को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि केवल रामनगरा गांव का ही आकलन किया जाए तो सैकड़ों एकड़ वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में है।
टाइगर रिजर्व प्रशासन का सीमांकन अभियान केवल रमनगरा तक सीमित नहीं है। पड़ोसी गांव ढकिया ताल्लुके महाराजपुर और गुनहान में भी सर्वे और अतिक्रमण चिन्हांकन प्रस्तावित है। गुनहान गांव में भी कई गाटा संख्याओं की भूमि वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है, जबकि कुछ भूमि राजस्व विभाग और ग्राम समाज के अंतर्गत आती है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार यहां भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं। संवाद
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कलीनगर। शारदा नदी के पार रमनगरा क्षेत्र में टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रयास तेज किए हैं। उपप्रभागीय वनाधिकारी के नेतृत्व में जीपीएस तकनीक की सहायता से चल रहे सीमांकन कार्य के साथ-साथ सीमा पिलर लगाए जा रहे हैं। सर्वे के दौरान बड़े पैमाने पर वन भूमि पर अतिक्रमण होने की बात सामने आई है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत शारदा नदी के पार स्थित रमनगरा, ढकिया तालुके महाराजपुर और गुनहान गांवों में लंबे समय से वन भूमि पर कब्जों की शिकायतें उठती रही हैं। सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां प्रशासनिक निगरानी भी चुनौतीपूर्ण रही है। हाल के दिनों में जिला प्रशासन, गृह मंत्रालय और सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) की सक्रियता के बाद पीटीआर प्रशासन ने सर्वे अभियान शुरू कराया।
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उपप्रभागीय वनाधिकारी के नेतृत्व में तीन सर्वेयरों की टीम ने 27 मई से जीपीएस तकनीक के माध्यम से सीमांकन कार्य शुरू किया। इस दौरान वन भूमि की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया और सीमा चिह्नित करने के लिए पिलर लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। सर्वे के दौरान दो ट्रैक्टर वन भूमि पर जोताई करते पकड़े गए थे। दोनों वाहनों को एसएसबी चौकी पर खड़ा कराया गया। मामले में वन विभाग की ओर से जुर्माना लगाने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि क्षेत्र में ट्रैक्टरों को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं भी बनी हुई हैं।
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इधर, सर्वे के दौरान अब तक करीब 300 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जे की बात सामने आई। कई स्थानों पर प्रस्तावित जंगल, पौधरोपण क्षेत्र और टाइगर रिजर्व की भूमि पर भी कब्जे पाए गए हैं। बड़ा दायरा होने के चलते सीमांकन कार्य जारी है। हालांकि सीमांकन के बाद पीटीआर प्रशासन के सामने कब्जे हटाकर भूमि को पुनः वन विभाग के नियंत्रण में लाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
एसडीएम रमेश चौहान ने बताया कि शारदा पार सीमांकन की प्रक्रिया जारी है। कब्जों की स्थिति भी सामने आई है। सीमांकन पूरा होने के बाद आगे की प्रक्रिया पर अमल किया जाएगा।
रमनगरा में सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर कब्जे के आरोप
राजस्व और वन विभाग के अभिलेखों के अनुसार, रमनगरा गांव में गाटा संख्या 1, 2, 3, 5, 7 सहित कई गाटों की भूमि पूरी तरह टाइगर रिजर्व के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसके अलावा कई गाटों में पट्टेदारों की भूमि के साथ बड़ी मात्रा में वन भूमि भी शामिल है। क्षेत्रीय जानकारों के अनुसार वर्षों से इन जमीनों पर खेती की जा रही है और वन विभाग को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि केवल रामनगरा गांव का ही आकलन किया जाए तो सैकड़ों एकड़ वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में है।
टाइगर रिजर्व प्रशासन का सीमांकन अभियान केवल रमनगरा तक सीमित नहीं है। पड़ोसी गांव ढकिया ताल्लुके महाराजपुर और गुनहान में भी सर्वे और अतिक्रमण चिन्हांकन प्रस्तावित है। गुनहान गांव में भी कई गाटा संख्याओं की भूमि वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज है, जबकि कुछ भूमि राजस्व विभाग और ग्राम समाज के अंतर्गत आती है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार यहां भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं। संवाद