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बाघिन की दहाड़ सुनकर गाड़ियों में छिप गए थे अफसर
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पूरनपुर। ग्रामीणों के हमले में बुरी तरह घायल बाघिन की सुरक्षा के लिए पहुंचे अफसर भी उसके मरणासन्न होने के बावजूद पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। बाघिन दहाड़ी तो अफसरों में भगदड़ मच गई। किसी ने पुलिस की गाड़ी में छिपकर दरवाजा बंद कर लिया तो किसी ने रेस्क्यू के लिए लाए गए पिंजरे के ऊपर चढ़ने का प्रयास किया। हालांकि बाघिन अपनी जगह से हिलडुल भी नहीं सकी थी।
घायल बाघिन को बुधवार को सुरक्षा घेरे में लेने के लिए उसके चारों ओर जाल लगाया गया। साथ ही गंभीर रूप से बाघिन के इलाज के लिए पशु चिकित्सक भी बुला लिए गए। घायल बाघिन चलने-फिरने में भी लाचार हो गई थी। रात करीब सवा 11 बजे बाघिन ने दहाड़ लगाकर उठने का प्रयास किया, तो उसे समीप से देख रहे अफसरों में भगदड़ मच गई। अफसर और कर्मचारी गिरते-पड़ते भागे। वन विभाग के एक अफसर ने तो दौड़ लगाकर गजरौला एसओ की सरकारी गाड़ी में घुसकर गाड़ी को बंद कर लिया। एक प्रशासनिक अफसर तो दौड़ लगाते हुए नाले को पार कर बाघिन को कैद करने के लिए लाए गए जाल के ऊपर चढ़ने लगे। बाघिन की दहाड़ पर मची भगदड़ दूसरे दिन बृहस्पतिवार को अफसर और कर्मचारियों में चर्चा का विषय बनी रही।
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घायल बाघिन को बुधवार को सुरक्षा घेरे में लेने के लिए उसके चारों ओर जाल लगाया गया। साथ ही गंभीर रूप से बाघिन के इलाज के लिए पशु चिकित्सक भी बुला लिए गए। घायल बाघिन चलने-फिरने में भी लाचार हो गई थी। रात करीब सवा 11 बजे बाघिन ने दहाड़ लगाकर उठने का प्रयास किया, तो उसे समीप से देख रहे अफसरों में भगदड़ मच गई। अफसर और कर्मचारी गिरते-पड़ते भागे। वन विभाग के एक अफसर ने तो दौड़ लगाकर गजरौला एसओ की सरकारी गाड़ी में घुसकर गाड़ी को बंद कर लिया। एक प्रशासनिक अफसर तो दौड़ लगाते हुए नाले को पार कर बाघिन को कैद करने के लिए लाए गए जाल के ऊपर चढ़ने लगे। बाघिन की दहाड़ पर मची भगदड़ दूसरे दिन बृहस्पतिवार को अफसर और कर्मचारियों में चर्चा का विषय बनी रही।
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