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Pilibhit News: वन विभाग की तीन टीमें... 12 दिन बीते, फिर पकड़ से बाहर बाघ, जान का खतरा बरकरार

Tue, 15 Jul 2025 12:06 AM IST
बरेली ब्यूरो फखरूल इस्लाम, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
फखरूल इस्लाम, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Tue, 15 Jul 2025 12:06 AM IST
सार

एक माह पूर्व से न्यूरिया क्षेत्र में घूम रहा बाघ इंसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। मेवातपुर गांव में किसान को मारने वाले बाघ की लगातार जंगल से बाहर मौजूदगी देखी जा रही है। लेकिन वन विभाग की टीमें अब तक बाघ को नहीं पकड़ पाई हैं। 

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Three teams...12 days have passed since permission was granted, but threat to life remains
बाघ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीलीभीत के न्यूरिया क्षेत्र में बाघ का आतंक ग्रामीणों की जिंदगी में खौफ बनकर छाया हुआ है। बाघ को पकड़ने की अनुमति मिले हुए 12 दिन बीत चुके हैं, इसके बावजूद तीन टीमें उसे पकड़ नहीं सकी हैं। ऐसे में खेतों में काम करना, बच्चों का स्कूल जाना और घर से बाहर निकलना अब जोखिम भरा हो गया है। मेवातपुर के बाद फुलहर गांव में किसान पर हुए हमले ने लोगों के दिलों में डर और गहरा कर दिया है। वन विभाग के पास अनुमति होने के बावजूद बाघ को पकड़ने की कोशिशें धीमी हैं और इसी लापरवाही ने ग्रामीणों को रोजाना जान का जोखिम उठाने पर मजबूर कर दिया है।

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बाघों की बढ़ती संख्या ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व को देश और दुनिया में अलग पहचान दिलाई, लेकिन यही बाघ जंगल से सटे इलाके में लोगों के लिए मुसीबत भी बन रहे हैं। बढ़ती संख्या के चलते बाघों के जंगल से बाहर निकलने का सिलसिला जारी है। गन्ने का दायरा बढ़ने से बाघों को बाहर छिपने में आसानी हो रही है। करीब पहुंचने पर बाघ इंसानों पर हमला कर रहे हैं। 
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जनपद में पिछले दो माह की बात करें तो मानव वन्यजीव संघर्ष में छह लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें चार घटना पूरनपुर तहसील क्षेत्र के सेहरामऊ और हजारा क्षेत्र में हुई, जबकि दो घटना न्यूरिया क्षेत्र में हुई है। इन घटनाओं के बाद विभाग भी गंभीर हुआ। सेहरामऊ क्षेत्र से एक बाघ को बेहोश कर पकड़ा भी गया। लेकिन इसके बाद भी हमले की घटना कम नहीं हो सकी है। 

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बाघ न पकड़े जाने से लोगों में खौफ और आक्रोश 
एक माह पूर्व से न्यूरिया क्षेत्र में घूम रहा बाघ इंसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। मेवातपुर गांव में किसान को मारने वाले बाघ की लगातार जंगल से बाहर मौजूदगी देखी जा रही है। पूर्व में बढ़ती सक्रियता को देखते हुए विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए शासन से अनुमति भी ले ली, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी विभाग बाघ को नहीं पकड़ सका। नतीजतन सोमवार को फुलहर गांव निवासी दयाराम को बाघ ने मार दिया। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में खौफ के बीच विभाग के प्रति आक्रोश भी है। 

दयाराम के परिवार में पत्नी के अलावा दो पुत्रियां और एक पुत्र हैं। पुत्रियों की शादी हो चुकी हैं। पिता की मौत की सूचना पर पुत्रियां घर पहुंची। दोनों का रो रोकर बुरा हाल था। घटना के बाद दिन भर मृतक के घर पर परिजनों की चीखपुकार मचती रही। 

कई मवेशियों को मार चुका बाघ उत्तराखंड की सीमा तक दहशत
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि बाघ न्यूरिया थाना क्षेत्र के 15 किलोमीटर दायरे में घूम रहा है। पूर्व में मझोला और उत्तराखंड की सीमा में बाघ कई दिनों तक डेरा जमाकर चहलकदमी करता रहा था। वहीं विभागीय अफसरों का कहना है कि बाघ पर टीमें लगातार नजर रखी रही थीं। पिछले दिनों बाघ उत्तराखंड की सीमा में निकल गया था। उसकी लोकेशन भी उत्तराखंड में मिल रही थी। सोमवार को घटना के बाद यह स्पष्ट किया जा रहा कि घटना को अंजाम देने वाला बाघ वहीं है या कोई दूसरा है। एक माह में कई मवेशियों को मार चुका है। 

कैमरे लगाने के साथ रखवाया जा रहा पिंजरा, पकड़ने पर भी जोर
डीएफओ भरत कुमार डीके के अनुसार घटना के बाद विभागीय टीम के अलावा डब्ल्यूटीआई की टीम भी सतर्क हो गई है। सीसी कैमरे लगाने के साथ घटना स्थल के निकट पिंजरा भी लगाया जा रहा है। ग्रामीणों के आक्रोश को ध्यान में रखते हुए टीमें काम कर रही हैं। उनका कहना है कि हमलावर बाघ को पकड़ने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन उसकी लोकेशन उत्तराखंड की सीमा में मिल रही थी। 

सोमवार की घटना के बाद पगचिह्न के आधार पर बाघ को चिह्नित किया जा रहा है। सही समय और सुरक्षित स्थान पर बाघ को पकड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए विभागीय मदद के रूप में 10 हजार रुपये दिए गए हैं। मुआवजे की प्रक्रिया पर भी अमल शुरू कर दिया गया है। 

दो महीनों में छह लोगों की जान ली 
तिथि         मृतक          गांव
14 मई    हंसराज        नजीरगंज
18 मई    रामप्रसाद     चतीपुर
25 मई    लौंगश्री,खिरकिया बरगदिया
03 जून    रेशमा, शांतिनगर हजारा
09 जून    मुकेश कुमार, मेवातपुर
14 जुलाई    दयाराम    फुलहर
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