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लापरवाह लोग, बेपरवाह तंत्र
Pilibhit
Updated Thu, 30 Jul 2015 11:03 PM IST
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तीन माह के अंतराल में स्कूली वाहन से गिरकर हुई दो छात्रों की मौत के बाद भी न तो स्कूल संचालकों ने कोई सबक लिया और न ही अभिभावक ही जागरूक दिखे। गुरुवार को शहर की सड़कों पर यातायात नियमों को ताक पर रख तमाम अनफिट और अपंजीकृत स्कूली वाहन दौड़ते देखे गए। वहीं तमाम छात्र बाइक से फर्राटा भरते देखे गए। अमर उजाला टीम ने शहर के कुछ प्रमुख चौराहों और स्थानों का जायजा लिया तो महज 30 मिनट में यह तस्वीर नजर आई।
बिलसंडा में स्कूली वाहन के हादसे को लेकर लोगों के बीच गुरुवार को चर्चा तो खूब हुई, लेकिन सबक लेने की किसी ने जहमत नहीं उठाई। अस्पताल गेट के सामने से गुजरे एक मैजिक वाहन में स्कूली बच्चे भूसे की तरह भरे गए थे। वहीं वाहन का पिछला गेट भी भगवान भरोसे टिका हुआ था।
बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्कूल संचालक भी खासे लापरवाह दिखे। एक स्कूल के बाहर तमाम रिक्शा चालक बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाकर सड़कों पर जाते दिखे।
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स्कूलों से निकलते ही बन जाते हैं बाइकर्स
बाइक और स्कूटी से स्कूल आने वाले विद्यार्थी सड़कों पर आते ही बाइकर्स की भूमिका में नजर आ जाते हैं। एक कॉलेज से तीन बाइक से निकले छात्रों के बीच निकले। वह एक दूसरे की जान की परवाह किए बिना हवा से बातें करते देखे गए।
शहर के गौहनिया चौराहे से अधिकतर स्कूलों के बच्चें गुजरते हैं। इस वजह से यहां ट्रैफिक पुलिस भी तैनात हैं। गुरुवार को तमाम अनफिट स्कूली वाहन ट्रैफिक पुलिस के सामने से गुजरते रहे। मैजिक से लेकर थ्री व्हीलरों तक में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था।
बिना पंजीकृत औरअनफिट स्कूली वाहनों के संचालनों पर रोक के लिए शीघ्र अभियान चलाया जाएगा। अभिभावकों को भी चाहिए कि वह अपने बच्चों को भेजते समय यह सुनिश्चित कर लें कि वह जिस वाहन में अपने लाडले को भेज रहें हैं वह स्कूल वाहन के रूप में एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत है अथवा नहीं। यदि वह स्कूल वाहन के रूप में पंजीकृत नहीं है तो ऐसे वाहनों में अभिभावक अपने बच्चों को न भेजें। साथ ही इसकी सूचना उन्हें अथवा प्रशासन या निकट के थाने को दें। इससे संबंधित वाहन को सीज कर उसके मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
- राजेश कर्दम, एआरटी
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बिलसंडा में स्कूली वाहन के हादसे को लेकर लोगों के बीच गुरुवार को चर्चा तो खूब हुई, लेकिन सबक लेने की किसी ने जहमत नहीं उठाई। अस्पताल गेट के सामने से गुजरे एक मैजिक वाहन में स्कूली बच्चे भूसे की तरह भरे गए थे। वहीं वाहन का पिछला गेट भी भगवान भरोसे टिका हुआ था।
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बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्कूल संचालक भी खासे लापरवाह दिखे। एक स्कूल के बाहर तमाम रिक्शा चालक बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाकर सड़कों पर जाते दिखे।
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स्कूलों से निकलते ही बन जाते हैं बाइकर्स
बाइक और स्कूटी से स्कूल आने वाले विद्यार्थी सड़कों पर आते ही बाइकर्स की भूमिका में नजर आ जाते हैं। एक कॉलेज से तीन बाइक से निकले छात्रों के बीच निकले। वह एक दूसरे की जान की परवाह किए बिना हवा से बातें करते देखे गए।
शहर के गौहनिया चौराहे से अधिकतर स्कूलों के बच्चें गुजरते हैं। इस वजह से यहां ट्रैफिक पुलिस भी तैनात हैं। गुरुवार को तमाम अनफिट स्कूली वाहन ट्रैफिक पुलिस के सामने से गुजरते रहे। मैजिक से लेकर थ्री व्हीलरों तक में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था।
बिना पंजीकृत औरअनफिट स्कूली वाहनों के संचालनों पर रोक के लिए शीघ्र अभियान चलाया जाएगा। अभिभावकों को भी चाहिए कि वह अपने बच्चों को भेजते समय यह सुनिश्चित कर लें कि वह जिस वाहन में अपने लाडले को भेज रहें हैं वह स्कूल वाहन के रूप में एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत है अथवा नहीं। यदि वह स्कूल वाहन के रूप में पंजीकृत नहीं है तो ऐसे वाहनों में अभिभावक अपने बच्चों को न भेजें। साथ ही इसकी सूचना उन्हें अथवा प्रशासन या निकट के थाने को दें। इससे संबंधित वाहन को सीज कर उसके मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
- राजेश कर्दम, एआरटी