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अबकी बार गोबर के दीयों से रोशन होगी दिवाली

Wed, 27 Oct 2021 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 27 Oct 2021 12:24 AM IST
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This time Diwali will be illuminated with cow dung lamps
गोबर और मिट्टी से तैयार मूर्तियों को कलर करती महिला। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। दिवाली पर इस बार गोबर से बने दीये से घर और प्रतिष्ठान रोशन होंगे। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गोबर से दीये, लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां बनाने में जुटी हैं। प्रशासन की तरफ से सात विकास खंड मुख्यालयों और विकास भवन में बिक्री केंद्र भी खोले गए हैं। जहां से लोग गोबर से बनी वस्तुएं खरीद सकते हैं।
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जिले के सात विकास खंडों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 3200 स्वयं सहायता समूह हैं। इसमें से 14 समूहों की 150 महिलाएं गोशालाओं से गोबर लेकर दीया और गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति, गमले, धूप बत्ती आदि तैयार कर रहीं हैं। इससे उनके जीवन में उम्मीद के नए रास्ते खुल रहे हैं। घर बैठे घंटे दो घंटे की मेहनत में महिलाएं अभी एक से डेढ़ हजार रुपये महीने तक कमा रही हैं। अगर उनके उत्पादों को बाजार मिला तो आमदनी और बढ़ेगी परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक हो सकेगी। बता दें कि गोबर से बने उत्पाद पूरी तरह से ईको फ्रेंडली है। इन्हें बनाने में ऐसा कुछ भी इस्तेमाल नहीं होता है जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे। इन दीयों को इस्तेमाल करने के बाद फेंकने की भी जरूरत नहीं है। इनका इस्तेमाल खाद के रूप में भी किया जा सकता है।
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मझोला। ग्राम निवाड ऐठपुर में शांति स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नुपूर गोयल के प्रयासों के बाद गाय के गोबर से गमले और धूपबत्ती तैयार कर रहीं हैं। महिलाएं अपने काम से उत्साहित हैं।
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ऐसे बनते हैं दीये
शांति स्वयं सहायता समूह की सदस्य उर्मिला देवी ने बताया कि सबसे पहले गाय के गोबर व तालाब से चिकनी मिट्टी को सुखा कर बरीक पीसा जाता है। तीन हिस्सा गोबर और एक हिस्सा मिट्टी का मिला कर दीये तैयार किए जा रहे हैं। इसी प्रकार गमले भी बनाए जाते हैं। घर का काम निपटा कर एक महिला दो घंटे में लगभग 50 दीये बना लेती हैं। अमरिया ब्लॉक मुख्यालय के आउटलेट में दीये बेचे जा रहे हैं।
मेरे समूह की महिलाएं दस रुपये की दस धूपबत्ती बेच रही हैं। समूह को एक महीने में दस से पंद्रह हजार रुपये महीने की आमदनी होती है। अभी एक महिला एक से डेढ़ हजार रुपये महीने कमा रही है।
- ममता देवी, दुर्गा स्वयं सहायता समूह
मैं अपने घर में दीये, धूप बत्ती तैयार करती हूं। जब से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हूं तब से मुझे आगे बढ़ने और कुछ नया सीखने की प्रेरणा मिली है।
- सरिता देवी
स्वयं सहायता समूह ने हमें मिलजुलकर काम करने और अपनी बचत करने की आदत डाली है। दिवाली पर हमारे बनाए दीये पसंद किए जा रहे हैं।
- शिवानी गंगवार
गोशालाओं से जुड़े विभिन्न समूहों के उत्पादों को बाजार देने के लिए डीएम के प्रयासों से विकास भवन में आउटलेट खुला। मोम से भरे चार दीये बीस रुपये की कीमत पर हैं। गोबर से बने दस दीये 25 रुपये की कीमत पर हैं।
- सोनी, विकास भवन स्थित विक्रय केंद्र की संचालक
महिलाओं की मेहनत और लगन ने मुझे भी उत्साहित किया है। इनके उत्पादों की बिक्री के लिए सात विकास खंड मुख्यालयों और विकास भवन में आउटलेट बनाए गए हैं। दिवाली से पहले जिला मेले आयोजित किए जाएंगे। जहां लोग उत्पाद खरीद सकेंगे।
- पुलकित खरे, जिलाधिकारी
ऐसे शुरू हुआ गोबर से दीये और गमले बनने का सफर
नागपुर से मूर्ति, दीये और गमले बनाने के फर्मे मंगाए गए। महिलाओं ने अपनी छोटी-छोटी बचत से उन्हें खरीदा। सरकार की ओर से 15-15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। अब विक्रय के लिए स्कूलों में स्टॉल लगवाए जा रहे हैं। विकास भवन, विकास खंड मुुख्यालयों में आउटलेट संचालित हो रहे हैं। मिशन प्रबंधक प्रदीप गौतम ने महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

पूरनपुर, बीसलपुर और पीलीभीत में 28 से लगेंगे मेले
दिवाली मेले का 28 अक्तूबर से चार नवंबर तक पूरनपुर, बीसलपुर और पीलीभीत में लगाए जाएंगे। पीलीभीत का मेला गांधी प्रेक्षागृह परिसर में होगा। पूरनपुर और बीसलपुर के मेले रामलीला मैदान में लगाए जाएंगे।
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