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गांव मुजफ्फरनगर में लगे शहीद मेले में हुई गोष्ठी
पीलीभीत
Updated Wed, 20 Jan 2016 11:29 PM IST
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शहीद गांव मुजफ्फरनगर में 26 वां शहीद मेला लगा। शहीद स्मारक पर पुष्पार्चन के साथ मेले का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर विचार और काव्य गोष्ठी हुई। शहीदों के घरवालों को कंबल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान गरीबों को भी कंबल बांटे गए।
गांव में शहीद स्मारक परिसर में मेला लगा। एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, सीओ राजेश्वर सिंह आदि ने स्मारक पर पुष्पार्चन कर मेले का शुभारंभ कराया। एसडीएम ने कहा कि शहीदों की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। गांव में दो शहीदों ने जन्म लिया है। सभी लोग मिलकर शहीदों के सपनों को साकार करें। सीओ राजेश्वर सिंह ने कहा कि शहीदों की कुर्बानी की जानकारी नई पीढ़ी को दें। गोष्ठी में इसके अलावा वक्ताओं ने शहीदों की कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा कि शहीदों की कुर्बानी से क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। गांव में चहुंमुखी विकास की जरुरत है। गोष्ठी में शहीद मेला और गांव के विकास को अफसरों और नेताओं की उपेक्षा पर रोष व्यक्त किया गया। गोष्ठी में पूर्व विधायक गोपाल कृष्ण सक्सेना, आकिल खां अजीजी, बृजेश भदौरिया, ब्लाक प्र्रमुख पति अजय भारती, मनोज मिश्रा, शहीद ग्रामोउत्थान समिति के अध्यक्ष ओमपाल सिंह, आरके दीक्षित, विपिन मिश्रा आदि ने विचार रखे। रामऔतार शर्मा, अंशुमाली दीक्षित, नरेश सिंह, डॉ. यूआर मीत, भगवान सिंह आदि ने काव्य पाठ किया। संचालन फूलबाबू खां ने किया।शहीद परिवार वालों को कंबल उढाकर सम्मानित किया गया। राजस्व प्रशासन की ओर से गरीबों को कंबल बांटने को दिए गए। गायत्री परिवार के संदीप खंडेलवाल ने भी गांव पहुंचकर पांच गरीबों को कंबल बांटे।
मेला की उपेक्षा को लेकर जताया रोष
वर्ष 1937 को शहीद हुए गांव के नत्थूलाल, माखन लाल की याद में सालों से गांव में मेला लगता है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने वर्ष 1989 में गांव पहुंचकर शहीद स्मारक के शिलापट का अनावरण किया था। तब से गांव में तीन दिवसीय शहीद मेला लगता था। जिला स्तरीय अफसर भी मेला में पहुुंचते थे। विभिन्न प्रदर्शनियां भी लगाई जाती थी। अब मेला मात्र एक दिवसीय लगता है। पिछले साल मेला में कोई अफसर नहीं पहुंचे थे। इस बार भी शहीद ग्रामोउत्थान समिति की ओर से अफसरों और नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन जिला स्तरीय कोई अफसर इस बार भी मेला मेें नहीं पहुंचा। इसको लेकर लोगों ने रोष जताया।
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गांव में शहीद स्मारक परिसर में मेला लगा। एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, सीओ राजेश्वर सिंह आदि ने स्मारक पर पुष्पार्चन कर मेले का शुभारंभ कराया। एसडीएम ने कहा कि शहीदों की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। गांव में दो शहीदों ने जन्म लिया है। सभी लोग मिलकर शहीदों के सपनों को साकार करें। सीओ राजेश्वर सिंह ने कहा कि शहीदों की कुर्बानी की जानकारी नई पीढ़ी को दें। गोष्ठी में इसके अलावा वक्ताओं ने शहीदों की कुर्बानी का जिक्र करते हुए कहा कि शहीदों की कुर्बानी से क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। गांव में चहुंमुखी विकास की जरुरत है। गोष्ठी में शहीद मेला और गांव के विकास को अफसरों और नेताओं की उपेक्षा पर रोष व्यक्त किया गया। गोष्ठी में पूर्व विधायक गोपाल कृष्ण सक्सेना, आकिल खां अजीजी, बृजेश भदौरिया, ब्लाक प्र्रमुख पति अजय भारती, मनोज मिश्रा, शहीद ग्रामोउत्थान समिति के अध्यक्ष ओमपाल सिंह, आरके दीक्षित, विपिन मिश्रा आदि ने विचार रखे। रामऔतार शर्मा, अंशुमाली दीक्षित, नरेश सिंह, डॉ. यूआर मीत, भगवान सिंह आदि ने काव्य पाठ किया। संचालन फूलबाबू खां ने किया।शहीद परिवार वालों को कंबल उढाकर सम्मानित किया गया। राजस्व प्रशासन की ओर से गरीबों को कंबल बांटने को दिए गए। गायत्री परिवार के संदीप खंडेलवाल ने भी गांव पहुंचकर पांच गरीबों को कंबल बांटे।
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मेला की उपेक्षा को लेकर जताया रोष
वर्ष 1937 को शहीद हुए गांव के नत्थूलाल, माखन लाल की याद में सालों से गांव में मेला लगता है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने वर्ष 1989 में गांव पहुंचकर शहीद स्मारक के शिलापट का अनावरण किया था। तब से गांव में तीन दिवसीय शहीद मेला लगता था। जिला स्तरीय अफसर भी मेला में पहुुंचते थे। विभिन्न प्रदर्शनियां भी लगाई जाती थी। अब मेला मात्र एक दिवसीय लगता है। पिछले साल मेला में कोई अफसर नहीं पहुंचे थे। इस बार भी शहीद ग्रामोउत्थान समिति की ओर से अफसरों और नेताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन जिला स्तरीय कोई अफसर इस बार भी मेला मेें नहीं पहुंचा। इसको लेकर लोगों ने रोष जताया।
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