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Pilibhit News: दहशत का पर्याय बना बाघ सातवें दिन शारदा नदी के पार निकला
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कलीनगर के नगरिया खुर्द कला क्षेत्र में बाघ के बने पैरों के निशान। संवाद
कलीनगर। शारदा डैम के सर्विस मार्ग पर ग्रामीण को घायल करने के बाद आबादी क्षेत्र में डेरा जमाय बाघ सातवें दिन रविवार सुबह शारदा नदी के पार जंगल की ओर निकल गया। निगरानी में जुटी टीम का दावा है कि बाघ के पगचिह्न ट्रेस किए गए हैं।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत शारदा डैम के छह किलोमीटर पर स्थित मार्ग पर सोमवार को जंगल से निकलकर एक बाघ पहुंच गया था। उसने नगरिया निवासी सुजीत राय को घायल करने के बाद आबादी क्षेत्र में डेरा जमा लिया था।
नरकुल वाले क्षेत्र में छिपा बाघ ग्रामीणों के लिए दहशत का पर्याय बना हुआ था। स्थिति को देखते हुए वन विभाग की ओर से पिंजरा लगाने के साथ कैमरे भी लगाए गए थे, लेकिन फिर भी बाघ की दहशत कम नहीं हो रही थी।
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रविवार को सातवें दिन बाघ नगरिया क्षेत्र से निकलकर शारदा नदी के पार निकल गया। निगरानी में जुटी टीम ने बाघ के पैरों के निशान ट्रेस किए। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के लौटने का खतरा बना हुआ है।
बराही रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि बाघ शारदा नदी को पार कर प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गया है। पगचिह्न ट्रेस किए गए हैं।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत शारदा डैम के छह किलोमीटर पर स्थित मार्ग पर सोमवार को जंगल से निकलकर एक बाघ पहुंच गया था। उसने नगरिया निवासी सुजीत राय को घायल करने के बाद आबादी क्षेत्र में डेरा जमा लिया था।
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नरकुल वाले क्षेत्र में छिपा बाघ ग्रामीणों के लिए दहशत का पर्याय बना हुआ था। स्थिति को देखते हुए वन विभाग की ओर से पिंजरा लगाने के साथ कैमरे भी लगाए गए थे, लेकिन फिर भी बाघ की दहशत कम नहीं हो रही थी।
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रविवार को सातवें दिन बाघ नगरिया क्षेत्र से निकलकर शारदा नदी के पार निकल गया। निगरानी में जुटी टीम ने बाघ के पैरों के निशान ट्रेस किए। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि बाघ के लौटने का खतरा बना हुआ है।
बराही रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि बाघ शारदा नदी को पार कर प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गया है। पगचिह्न ट्रेस किए गए हैं।