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‘पूरे प्रदेश में होगा खरूआ जमीन मामले का प्रभाव’
पीलीभीत।
Updated Fri, 15 Jan 2016 10:55 PM IST
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किसान नेता एवं खरूआ प्रकरण में याचिकाकर्ता पूर्व विधायक वीएम सिंह ने
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कहा कि शासन किसानों को उनका हक देना नहीं चाहती। कोर्ट के आदेशों का
उल्लंघन कर किसानों को गुमराह किया जा रहा है।
जिले के दौरे पर आए किसान नेता ने पत्रकारों को बताया कि एसएसबी मुख्यालय बनाने के लिए वर्ष 2005 में प्रशासन ने जो जमीन अधिगृहीत की थी, उस समय किसानों को मात्र 12 हजार रुपये बीघा का दाम दिया जा रहा था, लेकिन उनकी पहल पर किसानों को बड़ी रकम मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
उन्होंने बताया कि सात दिसंबर 2015 के आदेश में कोर्ट ने सरकार को वर्तमान सर्किल रेट से चार गुना दाम देने के आदेश दिए हैं, जो वर्तमान में करीब आठ लाख रुपये बीघा है, लेकिन शासन-प्रशासन कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने बताया कि शासन को डर है कि यदि खरूआ के किसानों को कोर्ट के अनुपालन में जमीन का दाम दे दिया तो इसका असर पूरे प्रदेश में पड़ेगा जिससे किसानों को बड़ा फायदा होगा। इसलिए शासन इसे लागू करने से बच रहा है।
उन्होंने बताया कि शासन जिस अध्यादेश का हवाला दे रहा है, वह मई 2014 का है और खरूआ जमीन मामले में कोर्ट का आदेश दिसंबर 2015 का है। इस प्रकार नया आदेश पर पुराना शासनादेश लागू नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि अध्यादेश अवैध है, इसे भी निरस्त कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होनी है। उन्होंने बताया कि किसानों को प्रशासन के लोग दबाव बनाने के साथ धमकी भी दे रहे हैं। ऐसे किसानों से उन्होंने शपथपत्र सहित शिकायत मांगी है। यदि शपथ पत्र मिलते हैं तो ऐसे अधिकारियों को भी कोर्ट में खड़ा किया जाएगा।
जिले के दौरे पर आए किसान नेता ने पत्रकारों को बताया कि एसएसबी मुख्यालय बनाने के लिए वर्ष 2005 में प्रशासन ने जो जमीन अधिगृहीत की थी, उस समय किसानों को मात्र 12 हजार रुपये बीघा का दाम दिया जा रहा था, लेकिन उनकी पहल पर किसानों को बड़ी रकम मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
उन्होंने बताया कि सात दिसंबर 2015 के आदेश में कोर्ट ने सरकार को वर्तमान सर्किल रेट से चार गुना दाम देने के आदेश दिए हैं, जो वर्तमान में करीब आठ लाख रुपये बीघा है, लेकिन शासन-प्रशासन कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने बताया कि शासन को डर है कि यदि खरूआ के किसानों को कोर्ट के अनुपालन में जमीन का दाम दे दिया तो इसका असर पूरे प्रदेश में पड़ेगा जिससे किसानों को बड़ा फायदा होगा। इसलिए शासन इसे लागू करने से बच रहा है।
उन्होंने बताया कि शासन जिस अध्यादेश का हवाला दे रहा है, वह मई 2014 का है और खरूआ जमीन मामले में कोर्ट का आदेश दिसंबर 2015 का है। इस प्रकार नया आदेश पर पुराना शासनादेश लागू नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि अध्यादेश अवैध है, इसे भी निरस्त कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होनी है। उन्होंने बताया कि किसानों को प्रशासन के लोग दबाव बनाने के साथ धमकी भी दे रहे हैं। ऐसे किसानों से उन्होंने शपथपत्र सहित शिकायत मांगी है। यदि शपथ पत्र मिलते हैं तो ऐसे अधिकारियों को भी कोर्ट में खड़ा किया जाएगा।