फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   The soul trembles even at the thought of that scene

वो मंजर सोच कर भी कांप जाती है रूह

Fri, 22 Oct 2021 01:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 01:42 AM IST
विज्ञापन
The soul trembles even at the thought of that scene
पूरनपुर। जान बचाने के लिए शीशम के पेड़ पर 74 घंटे तक रहे छह लोगों का कहना है कि जब वो मंजर याद आता है तो अब भी रूह कांप जाती है। पेड़ से नीचे से पानी की तेज धार बह रही थी और ऊपर बरसात हो रही थी। पल-पल यही लग रहा था कि अब जान नहीं बच पाएगी। सभी लोग ऊपर वाले का नाम लेकर दुआ मांग रहे थे। इन लोगों ने बताया कि सोमवार को रात दो बजे वह लोग पानी से घिरे थे और जान बचाने के लिए पेड़ पर चढ़े थे। जब पानी कम हुआ तो बृहस्पतिवार दोपहर बाद तीन बजे उतर सके। इस तरह से 74 घंटे भूखे प्यासे ऐसे ही बीते।
विज्ञापन

परिवार का ख्याल आते ही आंखों में आ जाते थे आंसू
पेड़ पर जान बचाने को बैठे रहे 55 वर्षीय जमालुद्दीन ने बताया कि पेड़ पर चढ़े सभी छह लोग जान जाना पक्का मान चुके थे। नीचे तेज धार में बह रहे पानी और हवा में पेड़ हिलने से मौत का मंजर सामने आ रहा था। कब पेड़ पानी में बहने लग जाएगा कहा नहीं जा सकता था। लेकिन हालात को देखकर डर ही लग रहा था। इस दौरान ऊपर वाले से जान की सलामती की दुआ मांगते रहे। तमाम बुरे ख्यालात मन में बार-बार आ रहे थे। परिवार और बच्चों की सोच कर कई बार तो आंखों से आंसू आ जाते थे।
विज्ञापन

- जमालुद्दीन
मरना मान लिया तय, ऊपर वाले ने बचा लिया
अचानक गौढ़ी में चार फिट पानी घुसने से सोमवार रात करीब दो बजे शीशम के पेड़ पर शरण ली। घंटों पेड़ पर बैठने से हालत खराब होने लगी थी। तब गौढ़ी में लगे बांस के डंडों को पेड़ की टहनियों से आड़े, तिरछे बांध लिया था। इन्हीं डंडों के सहारे सभी ने 74 घंटे काटे। नींद का तो नाम नहीं था। बस मरने का ख्याल बार-बार मन में आ रहा था। कब पेड़ उखड़कर बहने लगे और सबकी मौत हो जाए। कहा नहीं जा सकता था। बस हालात देखकर डर लग रहा था। सबने तो मरना तय मान लिया था। किसी तरह जिंदगी बच जाए। इसके लिए हम सब दुआ कर रहे थे। ऊपर वाले ने दुआ सुनी और जान बच गई। जिंदगी भर यह मंजर याद रहेगा। मंजर को सोचकर एक बार सबकी रुह कांप उठती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- मोहिद अली
इन लोगों ने पेड़ पर ले रखी थी शरण
जलालुद्दीन (55) पुत्र ताबुद्दीन
हसन (22) पुत्र अजमुद्दीन
रमजानी (25) पुत्र अजमुद्दीन
मोहद (26) पुत्र आशिक
मोइनुद्दीन (32) पुत्र अतीक
कल्लू (21) पुत्र खलील सभी निवासी गांव नहरोसा, थाना हजारा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed