UP News: पीलीभीत में 'करोड़पति' चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और उसकी पत्नी पर रिपोर्ट दर्ज, संपत्ति की होगी जांच
पीलीभीत में निलंबित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम शम्सी पर एक करोड़ रुपये से अधिक सरकारी धनराशि के निजी खातों में लेनदेन का आरोप है। डीएम के निर्देश पर शम्सी और उसकी पत्नी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। दोनों की संपत्तियों की जांच भी होगी।
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पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय के विभिन्न मदों से 98 ट्रांजेक्शन के जरिए 1.01 करोड़ रुपये की धनराशि का निजी खातों में लेनदेन करने के मामले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी के खिलाफ सरकारी धन के गबन की रिपोर्ट दर्ज की गई है। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के आदेश पर डीआईओएस ने शनिवार को रिपोर्ट दर्ज कराई।
डीआईओएस कार्यालय में वर्ष 2015 से संबद्ध चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम शम्सी द्वारा विभागीय धनराशि अपने और पत्नी अर्शी खातून के खाते में ट्रांसफर किए जाने का मामला चार दिन पूर्व सामने आया था। डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने डीआईओएस से रिपोर्ट तलब की। इसके बाद शुक्रवार को इल्हाम शम्सी को निलंबित कर दिया गया था। एफआईआर में कहा गया है कि जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज बीसलपुर में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इल्हाम शम्सी व उसकी पत्नी अर्शी खातून के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में 21 एनईएफटी के जरिए तीन दिसंबर 2025 को 24.27 लाख रुपये भेजे गए।
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बैंक रिकॉर्ड खंगालने पर जून 2024 से अब तक कुल एक करोड़ एक लाख रुपये का लेनदेन पाए जाने की बात सामने आई। कोषागार रिपोर्ट में भी डीआईओएस कार्यालय से संबंधित एनईएफटी की पुष्टि हुई है। कोतवाल सत्येंद्र कुमार ने बताया कि इल्हाम शम्सी, अर्शी खातून को नामजद किया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी की संपत्ति की होगी जांच
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी कर्मचारी और उसकी पत्नी की चल-अचल संपत्ति की जांच के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि इल्हाम शम्सी का रहन-सहन काफी लग्जरी था। वह महंगे मोबाइल फोन और कई लग्जरी कारों का शौकीन बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटेंगी कि उसकी घोषित आय और संपत्ति के बीच कितना अंतर है।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर न केवल एफआईआर दर्ज की गई है। बल्कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े सभी आहरण-वितरण को भुगतान से संबंधित बिलों का गहन परीक्षण करने के आदेश भी दिए गए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद विभागीय अधिकारियों में खलबली मची हुई है। प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि संपत्ति जांच और भुगतान बिलों की पड़ताल से इस पूरे लेनदेन नेटवर्क के अन्य चेहरे भी सामने आ सकते हैं।
वर्षों से वेतन, बिल, टोकन आदि का कार्य देखता था निलंबित कर्मचारी
निलंबित कर्मचारी अपने बीसलपुर के जनता टेक्निकल कॉलेज में अपने मूल तैनाती के बजाय कार्यालय से संबद्ध था। डीआईओएस राजीव कुमार ने बताया कि कर्मचारी कार्यालय में वेतन, बिल, टोकन, जनरेशन आदि का कार्य देख रहा था। कर्मचारी फर्जी और कूटरचित तरीके से अपने और पत्नी के खाते में वेतन मद से गलत तरीके से बनाकर एवं तत्कालीन डीआईओएस को अंधकार में रखकर स्वीकृत कराकर वर्ष 2024 से 98 ट्रांजेक्शन के द्वारा 1.01 करोड़ की धनराशि अपनी पत्नी के खाते में कोषागार के माध्यम से एनईएफटी के द्वारा लेनदेन किया और अधिकारियों को अंधकार में रखकर हस्ताक्षर कराए गए हैं, जो सरकारी संपत्ति के गबन से संबंधित है।
अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई न होने से उठे सवाल
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 1.01 करोड़ की सरकारी धनराशि का निजी खातों में लेनदेन में डीआईओएस से लेकर बाबुओं तक की संलिप्तता पाई गई थी। निलंबित कर्मचारी ने एक साल तक विभिन्न मदों की धनराशि को अपने खातों में भेजा। उन खातों का अलग-अलग लिपिकों का कोड बना हुआ है। रुपये को भेजने में उनकी अनुमति भी लेनी पड़ती है। इसके अलावा डीआईओएस की संस्तुति के बिना भी धनराशि का ट्रांजेक्शन संभव नहीं है।
वहीं, कोषागार के संबंधित कर्मचारी भी बिना देख बड़ी रकम को भेजने में संस्तुति करते रहे, लेकिन सख्ती के बाद निलंबन के बाद कर्मचारी और उसकी पत्नी को एफआईआर में नामजद किया गया, लेकिन अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों पर न तो अभी तक कोई कार्रवाई हुई न ही एफआईआर में उन्हें नामजद किया गया।