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Pilibhit News: जिस पर लगे आरोप उसी को बना दिया जांच अधिकारी

Thu, 18 Sep 2025 01:27 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Thu, 18 Sep 2025 01:27 AM IST
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The person against whom the allegations were made was made the investigating officer.
पीलीभीत। शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप में दोषी अधिकारी को ही अफसरों ने जांच अधिकारी बना दिया। जांच अधिकारी ने खुद के आरोपों को निराधार बताते हुए निचले स्तर के कर्मचारियों को दोषी बना दिया है। अफसरों की कारगुजारी अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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पूरनपुर ब्लाॅक में मनरेगा कार्य का फर्जी तरह से 11 करोड़ का भुगतान करने की शिकायत शासन स्तर तक की गई। शासन स्तर पर हुई शिकायत के बाद जब प्रशासनिक अफसरों तक मामला पहुंचा, तो इसमें खेल शुरू हो गया।
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पूरनपुर ब्लॉक में खंड विकास अधिकारी की तैनाती नहीं है। ऐसे में यहां का अतिरिक्त प्रभार एसडीएम को दिया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से भेजी गई शिकायत में उनपर भी आरोप लगाए गए थे। अफसरों ने इस मामले की जांच के लिए एसडीएम पूरनपुर को ही जांच अधिकारी बनाते हुए पूरे मामले की जांच सौंपी।
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जांच अधिकारी ने स्वयं को बचाते हुए ब्लॉक कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अमित वर्मा, मनरेगा आंकिक मनीष व नितिन अग्रवाल और प्रभारी अधिकारी मनरेगा आदर्श कुमार वर्मा को दोषी बनाते हुए संबंधित जांच अफसरों को सौंप दी। जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर सीडीओ राजेंद्र कुमार श्रीवास की ओर से कर्मचारियों को चेतावनी पत्र जारी करते हुए उन्हें ऐसा न करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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शासन स्तर का मामला फिर भी हल्के में ले गए अफसर

-पूरा मामला शासन स्तर से पकड़ में आया। जबकि प्रशासनिक स्तर के अफसर इसे हल्के में लेते रहे। यही कारण रहा कि जांच के नाम पर खानापूर्ति करते हुए अफसरों ने दोषी को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया।

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11 करोड़ में 56 लाख रुपये का गलत भुगतान की हो सकी पुष्टि

- शिकायतकर्ता की ओर से लगाए आरोप में बताया कि ब्लॉक क्षेत्र के 10 गांवों में मनरेगा कार्यों का करीब 11 करोड़ का भुगतान गलत तरीके से किया गया है। वहीं जांच में पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के भुगतान को पहले न करके 2024-2025 का 56 लाख से अधिक रुपये का भुगतान गलत तरीके से कर दिया गया। अफसरों का दावा कि जांच में 11 करोड़ के भुगतान करने की बात सामने नहीं आई है।

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वर्जन
पूरे मामले की जांच कराई गई है। इसमें दोषियों को चेतावनी पत्र जारी करते हुए उनका जवाब मांगा गया है। खंड विकास अधिकारी पर वहां का अतिरिक्त कार्यभार है। लगाए जा रहे आरोप गलत हैं।- राजेंद्र कुमार श्रीवास, मुख्य विकास अधिकारी।
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