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चौकी इंचार्ज बोले- अगर थाने से जल्दी पुलिस न आती तो चली जाती जान

Wed, 09 Feb 2022 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 12:57 AM IST
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The outpost in-charge said - if the police did not come soon from the police station, then the life would have gone
पीलीभीत। अगर थाने की पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो मेरी जान भी जा सकती थी। हमले का मंजर बयां करते हुए जरा कोठी के चौकी इंचार्ज जितेंद्र सिंह ने कही। बोले- वह हेड कांस्टेबिल अनिल और कांस्टेबल मोहित पाल के साथ गांव बानगंज पहुंचे तो वहां पर 40-50 लोग एकत्र थे। कुछ लोगों के हाथ में लाठी डंडे थे। आग जल रही थी। कुछ लोग ताप रहे थे।
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चौकी इंचार्ज ने बताया कि पीआरवी की सूचना पर वह गांव गए थे। उन्हें बताया गया था कि जल निकासी को लेकर विवाद है। जब पूछताछ की तो एक व्यक्ति अचानक उग्र हो गया। जलती हुई लकड़ी लेकर मेरी ओर दौड़ा। मैं बचने को पीछे हटा फिर भी उसने हमला कर दिया। मेरा गाल जल गया। कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल बचाने के लिए आए तो एक महिला ने लाठी चला दी। महिला को पकड़ने का प्रयास किया तो लोग उग्र हो गए। इसके बाद पुलिस घिर गई। उनके साथ सबसे ज्यादा खींचतान हुई। बचाव करते-करते वर्दी फट गई। सिपाहियों को भी पीटा गया। इसी दौरान मैंने किसी तरह से थाने को कॉल कर दी। करीब बीस मिनट बाद थाने से पुलिस बल आया। अगर पुलिस नहीं पहुंचती तो मेरी जान भी जा सकती थी। पुलिस के पहुंचने पर ही मैं लोगों के चंगुल से छूट सका। पुलिस रात में 1.30 बजे जिला अस्पताल लेकर आई। मेरा और अनिल और मोहित पाल का मेडिकल कराया।
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पुलिस के डंडा उठाने से भड़के थे लोग
दो पक्षों में जल निकासी को लेकर विवाद पहले से था। पुलिस की अब तक की कार्रवाई से एक पक्ष खफा था और इसीलिए उस पक्ष ने पीआरवी की बात पर कोई तवज्जो नहीं दी थी जब चौकी पुलिस पहुंची तो उस पक्ष ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए तीखा कमेंट कर दिया। कमेंट पर पुलिसकर्मी को गुस्सा आया और उसने एक युवक पर डंडा चला दिया। इसके बाद लोग भड़क गए। भीड़ अधिक थी और पुलिसकर्मी दरोगा समेत सिर्फ तीन ही थे। नतीजा यह रहा कि पुलिस को लेने के देने पड़ गए। पुलिस इस मामले में अपना बचाव भी नहीं कर सकी। अगर गजरौला थाने की पुलिस आधा घंटे के भीतर न पहुंच गई होती तो कुछ भी हो सकता था क्योंकि लोगों के तेवर बड़े उग्र हो गए थे।
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