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Pilibhit News: तेजी से चढ़ रहा पारा, गेहूं की फसल को हो सकता है नुकसान
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गत वर्ष फरवरी में 24-25 डिग्री तक रहा अधिकतम तापमान, इस बार अभी से 26 डिग्री पार
पीलीभीत। इस बार दिसंबर और फिर जनवरी के महीनों में कड़ाके की सर्दी रही। फरवरी के पहले सप्ताह में भी सर्दी का काफी असर रहा, लेकिन अब तापमान तेजी से बढ़ रहा है। तापमान बढ़ने की यही स्थिति रही तो खेतों में तैयार हो रही गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग की ओर से तापमान में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई गई है।
शुक्रवार को सुबह आसमान पूरी तरह साफ रहा। ऐसे में खुलकर धूप खिली। दिन चढ़ने के साथ ही धूप में तेजी आती गई। दोपहर में तो हालत यह हो गई कि लोग गर्मी का अहसास करने लगे। धूप में ठहरना लोगों के लिए मुश्किल होने लगा। राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ढाका ने पंतनगर स्थित कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के हवाले से जानकारी दी कि तराई के जिले में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 12.8 एवं अधिकतम 26.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। डॉ. ढाका के अनुसार, आगामी दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष फरवरी के महीने में अधिकतम तापमान 25 डिग्री के आसपास ही रहा, लेकिन इस बार यह 27 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाने की संभावना है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि अभी तो फिलहाल गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यदि मार्च में अधिकतम तापमान 30-32 डिग्री तक पहुंच गया तो गेहूं की बालियों में दाना कमजोर पड़ जाने की आशंका रहेगी। संवाद
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पीलीभीत। इस बार दिसंबर और फिर जनवरी के महीनों में कड़ाके की सर्दी रही। फरवरी के पहले सप्ताह में भी सर्दी का काफी असर रहा, लेकिन अब तापमान तेजी से बढ़ रहा है। तापमान बढ़ने की यही स्थिति रही तो खेतों में तैयार हो रही गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग की ओर से तापमान में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई गई है।
शुक्रवार को सुबह आसमान पूरी तरह साफ रहा। ऐसे में खुलकर धूप खिली। दिन चढ़ने के साथ ही धूप में तेजी आती गई। दोपहर में तो हालत यह हो गई कि लोग गर्मी का अहसास करने लगे। धूप में ठहरना लोगों के लिए मुश्किल होने लगा। राजकीय कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ढाका ने पंतनगर स्थित कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के हवाले से जानकारी दी कि तराई के जिले में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 12.8 एवं अधिकतम 26.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। डॉ. ढाका के अनुसार, आगामी दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष फरवरी के महीने में अधिकतम तापमान 25 डिग्री के आसपास ही रहा, लेकिन इस बार यह 27 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाने की संभावना है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि अभी तो फिलहाल गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यदि मार्च में अधिकतम तापमान 30-32 डिग्री तक पहुंच गया तो गेहूं की बालियों में दाना कमजोर पड़ जाने की आशंका रहेगी। संवाद
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