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Pilibhit News: विस्थापितों के वारिसों को जगी मालिकाना हक की उम्मीद
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पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पूर्वी पाकिस्तान-बांग्लादेश के विस्थापितों को जमीन पर मालिकाना हक दिलाने को लेकर ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश से जिले के करीब 1400 परिवारों में खुशी है। पूरनपुर ब्लॉक के 25 गांवों में रहने वाले विस्थापितों को जमीन पर भूमिधर अधिकार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है।
वर्ष 1960 में उत्तराखंड के नानक सागर बांध के विस्थापित जिले में आए थे। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन के समय भी विस्थापितों को जिले में बसाया गया। वर्ष 2019 में इनकी संख्या करीब 30 से 35 हजार थी। पूरनपुर, कलीनगर, सदर, अमरिया तहसील में इन्हें रहने व खेतीबाड़ी के लिए जमीन दी गई। बताया जा रहा है कि विभाजन के समय उत्तराखंड के रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप से विस्थापितों को जिले में भेजा गया। उस समय करीब 1700 परिवारोंं को जमीन दी गई।
यह भूमि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट, 1895 के तहत दी गई थी। अब इन विस्थापितों के वारिसों को जमीन का मालिकाना हक देने की मांग की जा रही है। कुछ माह पूर्व मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय सिंह की अध्यक्षता में गठित टीम में शामिल पीलीभीत प्रशासन ने भी विस्थापितों का सर्वे और सत्यापन कराया था। बांग्लादेश या फिर पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले परिवारों की जानकारी जुटाई गई। बताया जा रहा है कि 2100 से अधिक परिवार सामने आए थे, इनमें करीब 1400 परिवार ऐसे हैं जिन्हें भूमि पर संक्रमणीय अधिकार मिल सकता है।
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लखनऊ में मुख्यमंत्री की बैठक के बाद से जिले में रहने वाले विस्थापितों के वारिसों में खुशी है। जमीन पर मालिकाना हक मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। देर शाम पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान ने वीडियो बयान जारी कर मुख्यमंत्री का आभार जताया है। कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के करीब 25 गांवों में रहने वाले विस्थापितोंं को इसका लाभ मिलेगा।
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वर्ष 1960 में उत्तराखंड के नानक सागर बांध के विस्थापित जिले में आए थे। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन के समय भी विस्थापितों को जिले में बसाया गया। वर्ष 2019 में इनकी संख्या करीब 30 से 35 हजार थी। पूरनपुर, कलीनगर, सदर, अमरिया तहसील में इन्हें रहने व खेतीबाड़ी के लिए जमीन दी गई। बताया जा रहा है कि विभाजन के समय उत्तराखंड के रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप से विस्थापितों को जिले में भेजा गया। उस समय करीब 1700 परिवारोंं को जमीन दी गई।
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यह भूमि गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट, 1895 के तहत दी गई थी। अब इन विस्थापितों के वारिसों को जमीन का मालिकाना हक देने की मांग की जा रही है। कुछ माह पूर्व मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय सिंह की अध्यक्षता में गठित टीम में शामिल पीलीभीत प्रशासन ने भी विस्थापितों का सर्वे और सत्यापन कराया था। बांग्लादेश या फिर पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले परिवारों की जानकारी जुटाई गई। बताया जा रहा है कि 2100 से अधिक परिवार सामने आए थे, इनमें करीब 1400 परिवार ऐसे हैं जिन्हें भूमि पर संक्रमणीय अधिकार मिल सकता है।
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लखनऊ में मुख्यमंत्री की बैठक के बाद से जिले में रहने वाले विस्थापितों के वारिसों में खुशी है। जमीन पर मालिकाना हक मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। देर शाम पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान ने वीडियो बयान जारी कर मुख्यमंत्री का आभार जताया है। कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के करीब 25 गांवों में रहने वाले विस्थापितोंं को इसका लाभ मिलेगा।