फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   The drain that carries water to the Gomti river source is in a dilapidated condition, and despite spending crores, the uninterrupted flow is in danger.

Pilibhit News: गोमती उद्गम तक पानी लाने वाला नाला बदहाल, करोड़ों खर्च के बाद भी अविरल धारा पर संकट

Thu, 19 Feb 2026 12:06 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 19 Feb 2026 12:06 AM IST
विज्ञापन
The drain that carries water to the Gomti river source is in a dilapidated condition, and despite spending crores, the uninterrupted flow is in danger.
गोमती नदी तक पानी पहुंचाने के लिए खोदे गए नाले में पटी गंदगी। संवाद
कलीनगर। अविरल धारा के प्रवाह के लिए गोमती उद्गम स्थल तक 25 क्यूसेक पानी पहुंचाने के लिए करीब 2.15 करोड़ रुपये की लागत से खुदवाया गया नाला वर्तमान में बदहाली का शिकार है। देखरेख के अभाव में नाला जगह-जगह पट चुका है। उस पर कूड़ा-कचरा डाला जा रहा है और बरसात में गंदा पानी सीधे उद्गम स्थल की झीलों तक पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता से वर्षों की कवायद पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
विज्ञापन

माधोटांडा रजवाहा से गोमती उद्गम स्थल तक पानी पहुंचाने के साथ-साथ झीलों की खोदाई और सफाई भी कराई गई थी, ताकि नदी की अविरल धारा बह सके। कलीनगर तहसील क्षेत्र के माधोटांडा और फुलहर इलाके में स्थित उद्गम स्थल की झीलें पहले पर्याप्त पानी न मिलने से सूखी रहती थीं। इसके पुनरुद्धार के लिए गोमती भक्तों और समाजसेवियों के आंदोलन के बाद सरकारें सक्रिय हुईं और विभिन्न रास्तों से पानी पहुंचाने की योजनाएं बनीं। इसी क्रम में माधोटांडा रजवाहा से नाले के जरिए उद्गम स्थल तक पानी पहुंचाने का निर्णय लिया गया। तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव के दौरे के बाद 25 क्यूसेक पानी की योजना पर सहमति बनी और तत्काल बजट स्वीकृत कर कार्य शुरू हुआ। नाले की खुदाई के साथ उद्गम स्थल की झीलों का सौंदर्यीकरण भी कराया गया।
विज्ञापन

इससे पहले मायावती सरकार के समय मनरेगा से भी काम हुए, वहीं भूमि संरक्षण विभाग ने भी इसी नाले पर कार्य कराया था। हालांकि, करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नाले की नियमित सफाई और संरक्षण नहीं किया गया। नतीजा यह है कि आज नाला कई स्थानों पर अतिक्रमण की चपेट में है। युवक मंगल दल के पास नाला पूरी तरह पट गया है, जबकि पूरनपुर-खटीमा मार्ग के आसपास कचरा फैला है। माधोटांडा कस्बे का गंदा पानी भी इसी नाले में मिल रहा है, जो बरसात में सीधे उद्गम स्थल की झीलों तक पहुंच सकता है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

---
दबाव पड़ने पर देवीपुर माइनर से पानी देने की शुरू की कवायद
गोमती नदी में पानी पहुंचने के लिए दबाव पड़ने पर शारदा सागर खंड के अभियंताओं ने करीब दो साल पूर्व देवीपुर माइनर से उद्गम स्थल तक पानी देना शुरू किया, लेकिन यह व्यवस्था अस्थाई मानी जा रही है। क्योंकि माइनर कृषि सिंचाई के लिए बनी है। गर्मियों में जब माइनर बंद होती है, तो उद्गम स्थल फिर सूखने लगता है। पहले हरदोई ब्रांच नहर से एक गूल के जरिए लगातार पानी आता था, लेकिन समय के साथ वह रास्ता भी बंद कर दिया गया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि माधोटांडा रजवाहा से उद्गम स्थल तक नाले की व्यापक सफाई कराई जाए, अतिक्रमण हटे और गंदगी डालने वालों पर कार्रवाई हो। वैकल्पिक रूप से, यदि आवश्यक हो तो नाले का मार्ग बदला जाए ताकि बरसात में भी गंदा पानी गोमती में न पहुंचे।
--
गोमती नदी से संबंधित कई प्रस्तावों पर अमल चल रहा है। जल्द ही उसपर अमल शुरू होगा।
प्रमेश कुमार, एसडीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed