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Pilibhit News: कोर्ट ने वापस किया पुलिस का गुंडा एक्ट का नोटिस
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पीलीभीत। पुलिस की ओर से युवक के खिलाफ भेजी गई गुंडा एक्ट की रिपोर्ट को वापस कर दिया गया है। न्यायालय ने रिपोर्ट को पर्याप्त आधार नहीं माना है।
गुंडा नियंत्रण अधिनियम केे तहत अजय पाल उर्फ अजय कुमार निवासी ग्राम गुलड़ा मचवापुर थाना बरखेड़ा के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक की आख्या के साथ अपर जिलाधिकारी न्यायिक अजीत परेश के न्यायालय में 27 मई 2021 को वाद योजित किया गया था। पुलिस अधीक्षक ने आख्या दी थी कि अभियुक्त एक आपराधिक किस्म का व्यक्ति है। जिसकी आपराधिक गतिविधियां चरम सीमा पर पहुंच गईं हैं।
कोई भी व्यक्ति इसके द्वारा किए गए अपराध की सूचना देने व साक्ष्य देने का साहस नहीं करता है। आम जनता के हितों को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त का आजाद रहना शांति व्यवस्था एवं आम जनमानस के लिए खतरे से खाली नहीं है।
पुलिस अधीक्षक द्वारा अपनी आख्या के साथ विपक्षी का लिखित आपराधिक इतिहास दिया गया था। साथ ही प्रतिपक्षी को उप्र गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत आठ जुलाई 2021 को नोटिस भेजा था। नोटिस के माध्यम से विपक्षी को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
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29 सितंबर 2022 को नोटिस के विरुद्ध आपत्ति प्रस्तुत की गई। आपत्ति में कहा गया आपत्तिकर्ता गुंडा प्रवृत्ति का व्यक्ति है, ऐसा कहना गलत है। आपत्तिकर्ता पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद है। आपत्तिकर्ता के विरुद्ध एक मुकदमा अपराध संख्या 325/2020 धारा 363/366/376 भादवि एवं 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट झूठे एवं फर्जी है।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों व तर्काें का सम्यक अध्ययन के बाद अपर जिलाधिकारी न्यायिक अजीत परेश ने पाया कि विपक्षी का कोई आपराधिक इतिहास हो, ऐसी कोई आख्या पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है। बीट सूचना भी गंभीर प्रकृति की नहीं हैं। विपक्षी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों ने भी उसे गुंडा प्रकृति का व्यक्ति होने से इन्कार किया है।
इस प्रकार पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से विपक्षी के विरुद्ध गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। कोर्ट ने विपक्षी को निर्गत नोटिस वापस लेकर कार्रवाई समाप्त किए जाने योग्य मानते हुए नोटिस वापस लिए जाने का आदेश जारी किया है।
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गुंडा नियंत्रण अधिनियम केे तहत अजय पाल उर्फ अजय कुमार निवासी ग्राम गुलड़ा मचवापुर थाना बरखेड़ा के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक की आख्या के साथ अपर जिलाधिकारी न्यायिक अजीत परेश के न्यायालय में 27 मई 2021 को वाद योजित किया गया था। पुलिस अधीक्षक ने आख्या दी थी कि अभियुक्त एक आपराधिक किस्म का व्यक्ति है। जिसकी आपराधिक गतिविधियां चरम सीमा पर पहुंच गईं हैं।
कोई भी व्यक्ति इसके द्वारा किए गए अपराध की सूचना देने व साक्ष्य देने का साहस नहीं करता है। आम जनता के हितों को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त का आजाद रहना शांति व्यवस्था एवं आम जनमानस के लिए खतरे से खाली नहीं है।
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पुलिस अधीक्षक द्वारा अपनी आख्या के साथ विपक्षी का लिखित आपराधिक इतिहास दिया गया था। साथ ही प्रतिपक्षी को उप्र गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत आठ जुलाई 2021 को नोटिस भेजा था। नोटिस के माध्यम से विपक्षी को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
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29 सितंबर 2022 को नोटिस के विरुद्ध आपत्ति प्रस्तुत की गई। आपत्ति में कहा गया आपत्तिकर्ता गुंडा प्रवृत्ति का व्यक्ति है, ऐसा कहना गलत है। आपत्तिकर्ता पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद है। आपत्तिकर्ता के विरुद्ध एक मुकदमा अपराध संख्या 325/2020 धारा 363/366/376 भादवि एवं 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट झूठे एवं फर्जी है।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों व तर्काें का सम्यक अध्ययन के बाद अपर जिलाधिकारी न्यायिक अजीत परेश ने पाया कि विपक्षी का कोई आपराधिक इतिहास हो, ऐसी कोई आख्या पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है। बीट सूचना भी गंभीर प्रकृति की नहीं हैं। विपक्षी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों ने भी उसे गुंडा प्रकृति का व्यक्ति होने से इन्कार किया है।
इस प्रकार पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से विपक्षी के विरुद्ध गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। कोर्ट ने विपक्षी को निर्गत नोटिस वापस लेकर कार्रवाई समाप्त किए जाने योग्य मानते हुए नोटिस वापस लिए जाने का आदेश जारी किया है।