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करोड़ों खर्च कर तीन मंजिला बिल्डिंग बनाई, चिकित्सकों के कक्ष पड़े हैं खाली

Wed, 06 Jul 2022 01:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 06 Jul 2022 01:24 AM IST
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The building made three floors empty of doctors' rooms
काधोटांडा सीएचसी की तीन मंजिला बनी इमारत। - फोटो : PILIBHIT
कलीनगर। माधोटांडा सीएचसी के लिए करोड़ों की लागत से तीन मंजिला इमारत तो खड़ी करा दी, लेकिन छह साल बाद भी यहां चिकित्सकों की कमी दूर नहीं की जा सकी। नतीजतन मरीजों को सिर्फ परामर्श की सुविधा ही मिल रही है। रोगियों को पूरनपुर और जिला मुख्यालय भागना पड़ रहा है। चिकित्सकों और सुविधाओं की कमी के चलते अस्पताल के अधिकांश कक्ष खाली पड़े हैं।
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माधोटांडा क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए वर्ष 2014 में सीएचसी की मंजूरी मिली। मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट योजना के तहत करीब 12 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया। निर्माण एवं परिकल्प सेवाएं उत्तर प्रदेश जल निगम को कार्य की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2016 में कार्य पूरा होने के बाद पीएचसी नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया।
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ऐसा माना गया कि जल्द ही नए भवन में सीएचसी की सुविधाओं को बढ़ाने के साथ चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी, लेकिन छह साल बाद भी ऐसा नहीं हो सका। अस्पताल में आयुष चिकित्सक डॉ. छत्रपाल और डेंटल चिकित्सक खुर्शीद हसन मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। वहीं, फार्मासिस्ट प्रदीप कुुमार व एक अन्य सर्दी, जुकाम, बुखार समेत सामान्य समस्याओं की उपलब्ध दवाई मरीजों को उपलब्ध कराने में जुटे हैं।
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स्टाफ ने सीएचसी के खाली कक्षों को बनाया सहारा
सीएचसी का तीन मंजिला भवन तो तैयार हो गया, लेकिन स्टाफ के रुकने के लिए आवासीय भवन नहीं बन सका। दो-तीन पुराने आवासों में कर्मचारी रहने पर मजबूर हैं। इसके अलावा प्रभारी चिकित्सक, डेंटल चिकित्सक के अलावा अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नए भवन के खाली कक्षों में रहने को मजबूर हैं।

सीएचसी में सुविधाओं मुताबिक मरीजों को सहूलियतें दी जा रही हैं। अल्ट्रासाउंड की सुविधा अभी शुरू नहीं हो सकी हैं। सुविधाओं के विस्तार के लिए पत्राचार किए गए हैं। आवासीय भवन की कमी है। इसलिए नए भवन के खाली कक्षों में स्टाफ रुकता हैं। - डॉ. छात्रपाल, प्रभारी सीएचसी माधोटांडा
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