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Pilibhit News: अष्टधातु मूर्ति की पुरातत्व विभाग की टीम दोबारा करेगी जांच
Sun, 30 Jul 2023 11:44 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 30 Jul 2023 11:44 PM IST
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पूरनपुर। कोतवाली के मालखाने से गायब होने के बाद नाटकीय ढंग से बरामद हुई गौतम बुद्ध की अष्टधातु की मूर्ति की जांच रिपोर्ट पुरातत्व विभाग की ओर से न्यायालय में पेश की गई। रिपोर्ट में मूर्ति के सालों पुराने होने का हवाला दिया गया। इस पर न्यायालय ने पूछा है कि मूर्ति कितने साल पुरानी है और इसकी कीमत क्या है। न्यायालय ने दोबारा जांच करने के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा है।
पूरनपुर कोतवाली पुलिस ने वर्ष 2006 में भगवान बुद्ध की अष्टधातु की प्राचीन मूर्ति बरामद की थी। इसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। बरामद मूर्ति कोतवाली के मालखाने से गायब हो गई। कई बार कहने के बाद भी जब मूर्ति न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई तो न्यायालय की तरफ से शासन को पत्र लिखा गया। तत्कालीन सीओ की मौजूदगी में कई दिन तक कोतवाली में मूर्ति की तलाश कराई गई। न मिलने पर तत्कालीन हेड मोहर्रिर अमरनाथ यादव और अन्य के खिलाफ चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
हेड मोहर्रिरों को नोटिस भेजकर तलब किया गया था। पुलिस कर्मियों पर जब कार्रवाई की तलवार लटकी तो एक अप्रैल को कोतवाली से ही रहस्यमय ढंग से मूर्ति बरामद हो गई। इसके बाद न्यायालय ने पुरातत्व विभाग से मूर्ति की जांच कराने के आदेश दिए। 19 जुलाई को लखनऊ से आई पुरातत्व विभाग की दो सदस्यीय टीम के सदस्य डॉ. प्रदीप और रवि कुमार ने कोतवाली के मालखाने से निकलवाकर मूर्ति की जांच की।
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कोतवाल आशुतोष रघुवंशी ने बताया कि पुरातत्व विभाग की टीम ने अपनी रिपोर्ट न्यायालय में पेश कर दी है। इसमें मूर्ति के सालों पुरानी होने का हवाला दिया। इस पर न्यायालय ने पूछा है कि मूर्ति कितने साल पुरानी है और उसकी अनुमानित कीमत कितनी है। इसे लेकर पुरातत्व विभाग को दोबारा जांच करने के लिए पत्र भेजा गया है।
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पूरनपुर कोतवाली पुलिस ने वर्ष 2006 में भगवान बुद्ध की अष्टधातु की प्राचीन मूर्ति बरामद की थी। इसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। बरामद मूर्ति कोतवाली के मालखाने से गायब हो गई। कई बार कहने के बाद भी जब मूर्ति न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई तो न्यायालय की तरफ से शासन को पत्र लिखा गया। तत्कालीन सीओ की मौजूदगी में कई दिन तक कोतवाली में मूर्ति की तलाश कराई गई। न मिलने पर तत्कालीन हेड मोहर्रिर अमरनाथ यादव और अन्य के खिलाफ चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
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हेड मोहर्रिरों को नोटिस भेजकर तलब किया गया था। पुलिस कर्मियों पर जब कार्रवाई की तलवार लटकी तो एक अप्रैल को कोतवाली से ही रहस्यमय ढंग से मूर्ति बरामद हो गई। इसके बाद न्यायालय ने पुरातत्व विभाग से मूर्ति की जांच कराने के आदेश दिए। 19 जुलाई को लखनऊ से आई पुरातत्व विभाग की दो सदस्यीय टीम के सदस्य डॉ. प्रदीप और रवि कुमार ने कोतवाली के मालखाने से निकलवाकर मूर्ति की जांच की।
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कोतवाल आशुतोष रघुवंशी ने बताया कि पुरातत्व विभाग की टीम ने अपनी रिपोर्ट न्यायालय में पेश कर दी है। इसमें मूर्ति के सालों पुरानी होने का हवाला दिया। इस पर न्यायालय ने पूछा है कि मूर्ति कितने साल पुरानी है और उसकी अनुमानित कीमत कितनी है। इसे लेकर पुरातत्व विभाग को दोबारा जांच करने के लिए पत्र भेजा गया है।