फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Swings of the monsoon season no longer hang from the trees.

Pilibhit News: पेड़ों पर नहीं पड़ते अब सावन के झूले

Tue, 11 Aug 2026 12:00 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Tue, 11 Aug 2026 12:00 AM IST
विज्ञापन
Swings of the monsoon season no longer hang from the trees.
स्नेहलता आर्य। - फोटो : Archive
पीलीभीत। सावन में जब तराई की ठंडी हवा के साथ बरसती बूंदें मिट्टी को छूती थीं तो फिजा में एक सोंधी सी खुशबू घुल जाती थी। यह महक गांवों से लेकर शहर के मोहल्लों तक बेटियों और बहुओं के चेहरों पर आने वाली मुस्कान की दस्तक होती थी। लेकिन बदलते दौर के साथ अब सावन के महीने में ऐसा कुछ नहीं रहा। पेड़ों पर पड़ने वाले झूले गायब हो गए हैं।
विज्ञापन

आधुनिकता की दौड़ और सिमटते बाग-बगीचों के बीच सावन का वह पारंपरिक रंग फीका पड़ गया है। अब न तो नीम, आम और बरगद के पेड़ों पर मजबूत रस्सियों वाले झूले दिखते हैं और न ही पहले जैसी उमंग, लोकगीत और रस्में सावन के महीनों में देखने को मिलती हैं। शहर की महिलाओं का मानना है कि अब सावन में पहली जैसी बात नहीं रही। उनका कहना है कि उनके समय में वह सावन के माह में मायके जातीं थीं, लेकिन आज के घर के व्यस्तता में सब कुछ पीछे छूट गया है। अब सिर्फ बाजार जाना, पारंपरिक तीज पूजा व सोलह शृंगार करने तक ही सावन रह गया है, बच्चे भी अब मोबाइल में ही खुश रहते हैं।
विज्ञापन

00
फोटो - 31
सावन के दिनों की बात ही कुछ और थी, घर और सामाजिक बदलती रीतियों में अब काफी कुछ नहीं हो पाता। हां लेकिन सावन के महीने में फिर भी सालभर से ज्यादा खुशी रहती है। - स्नेहलता आर्या
विज्ञापन
विज्ञापन

00
फोटो - 32
सावन में पहले तो मायके जाना, सावन के झूले डालकर झूलना ये सब हो जाता था। लेकिन शादी के बाद अब पारिवारिक जिम्मेदारियों में उलझकर व बदलते दौर में चीजें खत्म होते देखने को ही सिर्फ मिल रहा है। - पूनम अरोरा
00
फोटो - 34
सावन के वो भी दिन थे, जबकि हम छोटे बच्चे हुआ करते थे और अपनी सहेलियों के साथ सावन के माह का उत्सुकता से इंतजार किया करते थे। लेकिन अब दोस्तों से ही पूरे समय बात हो जाए तो वो ही बड़ी बात है। - शिखा रस्तोगी

00
फोटो - 33
सावन में अब सिर्फ हरियाली तीज पर साज-सज्जा आदि को लेकर ही चीजें पूरी हो पाती हैं। काफी कुछ नहीं हो पाता। पहले के दिन की बात ही कुछ और है। - नमिता रस्तोगी

स्नेहलता आर्य।

स्नेहलता आर्य।- फोटो : Archive

स्नेहलता आर्य।

स्नेहलता आर्य।- फोटो : Archive

स्नेहलता आर्य।

स्नेहलता आर्य।- फोटो : Archive

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed