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सदी के सबसे बड़े सूर्य ग्रहण के समय छाए बादल, साफ नहीं दिख पाया
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पीलीभीत। मानसूनी बादल के चलते सदी के सबसे बड़े सूर्य ग्रहण का लोग स्पष्ट नजारा नहीं देख सके। हालांकि बादलों की लुकाछिपी के बीच कुछ लोगों ने सुरक्षित तरीके से इस खगोलीय घटना को करीब से देखा। सूर्य ग्रहण के समय मठ मंदिरों के कपाट बंद रहे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण किया गया।
जनपद में रविवार सुबह 10:31 बजे से सूर्यग्रहण प्रांरभ हुआ, जो दोपहर 2:04 बजे तक चला। ज्योतिषचार्यों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान ग्रह एवं नक्षत्रों का ऐसा संयोग बना, जो पिछले 500 साल या उससे भी पहले नहीं बना। हालांकि सुबह से ही आसमान मानसूनी बादलों से घिरा होने की वजह से सूर्य ग्रहण साफ तौर पर नहीं दिखा। मगर, सूर्य बीच-बीच में बादलों की ओट से अपने दर्शन देते रहे। सूर्य ग्रहण शुरू होते ही लोगों ने अपने को घर के कमरों तक समेट लिया। सिर्फ जरूरी कामकाज वाले लोग ही घरों से बाहर निकले। ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है, इसलिए कई लोगों ने इस दौरान इष्टदेव के मंत्र का जाप किया। सूर्यग्रहण का मोक्ष पूर्वाह्न 2:04 बजे हुआ। सूर्य ग्रहण समाप्त होते ही घरों मेें साफ सफाई का दौर चल पड़ा। ग्रहण के चलते मठ-मंदिरों के पट 12 घंटे पूर्व ही बंद कर दिए गए थे। सूतक काल समाप्त होते मंदिरों में साफ सफाई कर देव प्रतिमाओं का विधि विधान से शुद्धीकरण किया गया।
पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का महायोग करीब 500 साल या उससे पहले आया था। उन्होंने बताया कि इस ग्रहण के 15 दिन पहले चंद्र ग्रहण पड़ा था और 15 दिन बाद फिर चंद्र ग्रहण पड़ेगा। इन दोनों ग्रहणों के बीच यह सूर्य ग्रहण पड़ा है। 21 जुलाई 2009 के बाद 21 जून रविवार को सबसे अधिक समय तक लगभग साढ़े तीन घंटे तक सूर्य ग्रहण देखने को मिला। उन्होंने बताया कि ग्रहण के अशुभ प्रभाव से कीटाणुयुक्त महामारी फैलने, अतिवृष्टि, ओला, बाढ़, तूफान और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका है।
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विशेष चश्मों से देखी सबसे बड़ी खगोलीय घटना
समाधान विकास समिति विपनेट क्लब के कार्यालय पर रविवार को विशेष चश्मों की सहायता से बड़े और बच्चों ने सदी की सबसे बड़ी खगोलीय घटना को देखा। हालांकि बादलों की लुकाछिपी के बीच उन्हें स्पष्ट नजारा देखने को नहीं मिला। बच्चों ने एक्स-रे फिल्म के जरिए सूर्य ग्रहण को देखा।
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जनपद में रविवार सुबह 10:31 बजे से सूर्यग्रहण प्रांरभ हुआ, जो दोपहर 2:04 बजे तक चला। ज्योतिषचार्यों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान ग्रह एवं नक्षत्रों का ऐसा संयोग बना, जो पिछले 500 साल या उससे भी पहले नहीं बना। हालांकि सुबह से ही आसमान मानसूनी बादलों से घिरा होने की वजह से सूर्य ग्रहण साफ तौर पर नहीं दिखा। मगर, सूर्य बीच-बीच में बादलों की ओट से अपने दर्शन देते रहे। सूर्य ग्रहण शुरू होते ही लोगों ने अपने को घर के कमरों तक समेट लिया। सिर्फ जरूरी कामकाज वाले लोग ही घरों से बाहर निकले। ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है, इसलिए कई लोगों ने इस दौरान इष्टदेव के मंत्र का जाप किया। सूर्यग्रहण का मोक्ष पूर्वाह्न 2:04 बजे हुआ। सूर्य ग्रहण समाप्त होते ही घरों मेें साफ सफाई का दौर चल पड़ा। ग्रहण के चलते मठ-मंदिरों के पट 12 घंटे पूर्व ही बंद कर दिए गए थे। सूतक काल समाप्त होते मंदिरों में साफ सफाई कर देव प्रतिमाओं का विधि विधान से शुद्धीकरण किया गया।
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पंडित आशुतोष शर्मा के मुताबिक चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का महायोग करीब 500 साल या उससे पहले आया था। उन्होंने बताया कि इस ग्रहण के 15 दिन पहले चंद्र ग्रहण पड़ा था और 15 दिन बाद फिर चंद्र ग्रहण पड़ेगा। इन दोनों ग्रहणों के बीच यह सूर्य ग्रहण पड़ा है। 21 जुलाई 2009 के बाद 21 जून रविवार को सबसे अधिक समय तक लगभग साढ़े तीन घंटे तक सूर्य ग्रहण देखने को मिला। उन्होंने बताया कि ग्रहण के अशुभ प्रभाव से कीटाणुयुक्त महामारी फैलने, अतिवृष्टि, ओला, बाढ़, तूफान और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आशंका है।
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विशेष चश्मों से देखी सबसे बड़ी खगोलीय घटना
समाधान विकास समिति विपनेट क्लब के कार्यालय पर रविवार को विशेष चश्मों की सहायता से बड़े और बच्चों ने सदी की सबसे बड़ी खगोलीय घटना को देखा। हालांकि बादलों की लुकाछिपी के बीच उन्हें स्पष्ट नजारा देखने को नहीं मिला। बच्चों ने एक्स-रे फिल्म के जरिए सूर्य ग्रहण को देखा।