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सरकारी चीनी मिलें शुरू न होने से किसान परेशान
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पीलीभीत। धान खरीद और फिर डीएपी खाद की किल्लत से किसान अभी पूरी तरह से उभर नहीं पाए कि सरकारी सिस्टम गन्ना किसानों की मुसीबत बढ़ाने लगा है। सरकारी चीनी मिलें शुरू न होने से किसानों को आधे-पौने दामों पर गन्ना बेचना पड़ रहा है। अफसर किसानों को सिर्फ दिलासा दे रहे हैं। ऐसे में किसान संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। पूरनपुर के किसान नेताओं ने कहा कि अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
जिले में इस बार करीब सवा लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल है। इसमें तीस फीसदी से ज्यादा पेड़ी गन्ना है। किसान इसे पहले काटते हैं और खेत में गेहूं की बुआई करते हैं। पिछले साल 15 नवंबर को पूरनपुर और बीसलपुर सहकारी मिलें शुरू हो गईं थी जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। दोनों मिलें शुरू नहीं हो सकीं। वहीं जिले में स्थापित निजी शुगर मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। पूरनपुर तहसील क्षेत्र में इस बार 74.66 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन होने का अनुमान है। इसमें 44.90 लाख क्विंटल गन्ना पूरनपुर सहकारी मिल के लिए सुरक्षित है। बाकी गन्ना एलएच शुगर मिल पीलीभीत को दिया जाता रहा है। पिछले साल पूरनपुर मिल ने 23.08 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, जबकि क्षेत्र में 49.85 लाख क्विंटल गन्ना था। इस बार मिल देरी से शुरू होने से किसान परेशान हैं। मिल 25 नवंबर को शुरू होगी। मिल शुरू न होने से किसान कम कीमत पर गन्ना बेच रहे हैं। इस बार सरकार की तरफ से गन्ने का लाभकारी मूल्य यानि एसएपी 340 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि किसान मजबूरी में 220 से 250 रुपये में गन्ना बेच रहे हैं।
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किसानों में रोष, आंदोलन करने की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक ) के जिला अध्यक्ष मंजीत सिंह का कहना है कि पूरनपुर में कुल गन्ने के रकबे में तीस फीसदी से ज्यादा क्षेत्रफल में पेड़ी गन्ना है। यही हाल बीसलपुर का है। बारिश में गन्ना सूख गया है। धान की फसलें बर्बाद हुईं। अब किसान गेहूं की बुआई करना चाहता है, लेकिन मिल शुरू न होने के कारण कोल्हू पर गन्ना डालना पड़ रहा है। किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर मिल जल्द शुरू नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करेगा।
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मिलें शुरू न होने से दिक्कत बढ़ी
दो एकड़ गन्ना है। इसमें चार बीघा पेड़ी है। अगर मिल चल जातीं हैं तो पेड़ी वाला खेत खाली करके गेहूं की बुआई कर लेते। मजबूरन गन्ना कोल्हू पर डालना पड़ेगा।
-भूपराम, किसान
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धान की फसल खराब होने के बाद गन्ने की फसल से आस थी, लेकिन मिल शुरू न होने के कारण गन्ना कोल्हू पर डालना पड़ेगा। अगले महीने मिल चलने की खबर मिली है। गेहूं की बुआई में देरी हो रही है।
- जागन लाल, किसान
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जिले में इस बार करीब सवा लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल है। इसमें तीस फीसदी से ज्यादा पेड़ी गन्ना है। किसान इसे पहले काटते हैं और खेत में गेहूं की बुआई करते हैं। पिछले साल 15 नवंबर को पूरनपुर और बीसलपुर सहकारी मिलें शुरू हो गईं थी जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। दोनों मिलें शुरू नहीं हो सकीं। वहीं जिले में स्थापित निजी शुगर मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। पूरनपुर तहसील क्षेत्र में इस बार 74.66 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन होने का अनुमान है। इसमें 44.90 लाख क्विंटल गन्ना पूरनपुर सहकारी मिल के लिए सुरक्षित है। बाकी गन्ना एलएच शुगर मिल पीलीभीत को दिया जाता रहा है। पिछले साल पूरनपुर मिल ने 23.08 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, जबकि क्षेत्र में 49.85 लाख क्विंटल गन्ना था। इस बार मिल देरी से शुरू होने से किसान परेशान हैं। मिल 25 नवंबर को शुरू होगी। मिल शुरू न होने से किसान कम कीमत पर गन्ना बेच रहे हैं। इस बार सरकार की तरफ से गन्ने का लाभकारी मूल्य यानि एसएपी 340 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि किसान मजबूरी में 220 से 250 रुपये में गन्ना बेच रहे हैं।
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किसानों में रोष, आंदोलन करने की चेतावनी
भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक ) के जिला अध्यक्ष मंजीत सिंह का कहना है कि पूरनपुर में कुल गन्ने के रकबे में तीस फीसदी से ज्यादा क्षेत्रफल में पेड़ी गन्ना है। यही हाल बीसलपुर का है। बारिश में गन्ना सूख गया है। धान की फसलें बर्बाद हुईं। अब किसान गेहूं की बुआई करना चाहता है, लेकिन मिल शुरू न होने के कारण कोल्हू पर गन्ना डालना पड़ रहा है। किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर मिल जल्द शुरू नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करेगा।
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मिलें शुरू न होने से दिक्कत बढ़ी
दो एकड़ गन्ना है। इसमें चार बीघा पेड़ी है। अगर मिल चल जातीं हैं तो पेड़ी वाला खेत खाली करके गेहूं की बुआई कर लेते। मजबूरन गन्ना कोल्हू पर डालना पड़ेगा।
-भूपराम, किसान
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धान की फसल खराब होने के बाद गन्ने की फसल से आस थी, लेकिन मिल शुरू न होने के कारण गन्ना कोल्हू पर डालना पड़ेगा। अगले महीने मिल चलने की खबर मिली है। गेहूं की बुआई में देरी हो रही है।
- जागन लाल, किसान