{"_id":"5842fd224f1c1b0c1ede92ab","slug":"subsequently-questions-were-also-raised-on-the-functioning-of-the-management","type":"story","status":"publish","title_hn":"हादसे के बाद भी मिल प्रबंधन की कार्यशैली पर उठते रहे सवाल! ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हादसे के बाद भी मिल प्रबंधन की कार्यशैली पर उठते रहे सवाल!
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Sat, 03 Dec 2016 11:02 PM IST
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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गुस्साए भीड़ ने मिल की लापरवाही को बताया हादसे का जिम्मेदार
चीनी मिल में हुए हादसे के पीछे क्या कारण रहे? इसको लेकर तो फिलहाल स्थित अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन तरह तरह की चर्चाएं जुरुर तेज रहीं। जिसको लेकर मिल प्रबंधन की लापरवाही को हादसे का जिम्मेदार भीड़ ठहराती रही।
मिल में काम करने वाले मजदूरों के परिवारीजनों का आरोप था कि मिल प्रबंधन की ओर से हादसे के बाद भी कोई मदद नहीं की जा रही है। मलवे में फंसे लोगों को बाहर निकालने में भी औपचारिकता निभाई गई। प्रशासनिक अमला आने के बाद भी मिल के जिम्मेदार खुद मुंह मोड़ते रहे। परिवारीजनों को कोई सटीक जवाब नहीं दिया जा रहा। कुछ लोग हादसे के कारण को लेकर बताते रहे कि ग्रेडर में चीनी की ओवरलोडिंग किए जाने से ब्लास्ट हुआ, तो कोई शार्ट सर्किट को कारण बताता रहा। हालांकि इसको लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मलबा हटाने के लिए भी परिवारीजन का कहना था कि वह खुद लगे रहे। मिल की ओर से कोई आगे नहीं आ रहा था। सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही थी। इसकी शिकायत परिवारीजनों ने पुलिस व प्रशासनिक अफसरों से भी मौखिक तौर पर की और न्याय की गुहार लगाते रहे।
रेस्क्यू के दौरान मिल में रहीं एंबुलेंस
प्रशासनिक टीम जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर लापता हुए लोगों को देर सायं तक खोजा जाता रहा। घायलों को तत्काल उपचार मुहैया कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया जा सके, इसके लिए करीब आधा दर्जन एंबुलेंस प्रशासन की ओर से मिल परिसर में ही खड़ी करा ली गईं।
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मृत, घायल मजदूरों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं
मिल प्रबंधन से लेकर प्रशासन तक का रहा गोलमोल जवाब
हादसे में मारा गया मजदूर पवन अथवा घायल मजदूर मिल के अपने कर्मचारी हैं अथवा ठेके के यह स्थित भी देर सायं तक न तो मिल प्रबंधन स्पष्ट कर सका और न ही प्रशासन। यही नहीं हादसे का असली कारण, इलाज और मुआवजे की बात पर भी पर मिल प्रबंधन व प्रशासन का जवाब गोलमोल ही रहा।
मिल के जीएम एचआर आशीष गुप्ता ने कहा कि हादसा कैसे हुआ यह तो फिलहाल बतापाना मुश्किल होगा, लेकिन प्रथम दृष्ट्या यह हादसा शार्ट सर्किट से होना प्रतीत हो रहा है। पूरी बात जांच के बाद ही पता चल सकेगी। उन्होंने कहा कि घायलों को इलाज के लिए राममूर्ति मेडिकल कालेज भोजीपुरा भेजा जा रहा है। जहां मिल प्रबंधन उनका बेहतर से बेहतर इलाज कराएगा। मृतक के परिवार को आर्थिक मदद भी मिल प्रशासन देगा, लेकिन इलाज और मृतक के परिवार को मुआवजा के रूप में कितनी धनराशि दी जाएगी वह स्पष्ट नहीं कर सके। बस इतना कहा कि जो भी मिल प्रबंधन की गाइड लाइन होगी उसके मुताबिक आर्थिक सहायता दी जाएगी। मिल प्रबंधन पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करेगा।
जिलाधिकारी मासूम अली सरवर ने अमर उजाला को बताया कि हादसे के शिकार कर्मचारी मिल कर्मचारी थे अथवा ठेकेदार के इसका सही पता अभी मिल प्रबंधन उन्हें नहीं बता सका है। मिल प्रबंधन ने मिल व ठेके के मिक्स कर्मचारियों के वहां काम करने की बात कही है। प्रशासन का पूरा ध्यान फिलहाल घायलों के इलाज, मलवे में दवे अन्य लोगों को बाहर निकालने और हादसे के बाद से शांति व्यवस्था के साथ स्थिति सामान्य बनाने के हैं। इसके बाद मिल का उपस्थिति रजिस्टर आदि चेक कराया जाएगा जिससे हादसे में मारे गए और घायल मजदूरों की स्थिति स्पष्ट हो सके। डीएम ने कहा घायलों का उचित इलाज कराया जाएगा और मृतक मजदूर के परिवार वालों को जो भी संभव होगा आर्थिक सहायता दिलवाई जाएगी।
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चीनी मिल में हुए हादसे के पीछे क्या कारण रहे? इसको लेकर तो फिलहाल स्थित अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन तरह तरह की चर्चाएं जुरुर तेज रहीं। जिसको लेकर मिल प्रबंधन की लापरवाही को हादसे का जिम्मेदार भीड़ ठहराती रही।
मिल में काम करने वाले मजदूरों के परिवारीजनों का आरोप था कि मिल प्रबंधन की ओर से हादसे के बाद भी कोई मदद नहीं की जा रही है। मलवे में फंसे लोगों को बाहर निकालने में भी औपचारिकता निभाई गई। प्रशासनिक अमला आने के बाद भी मिल के जिम्मेदार खुद मुंह मोड़ते रहे। परिवारीजनों को कोई सटीक जवाब नहीं दिया जा रहा। कुछ लोग हादसे के कारण को लेकर बताते रहे कि ग्रेडर में चीनी की ओवरलोडिंग किए जाने से ब्लास्ट हुआ, तो कोई शार्ट सर्किट को कारण बताता रहा। हालांकि इसको लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मलबा हटाने के लिए भी परिवारीजन का कहना था कि वह खुद लगे रहे। मिल की ओर से कोई आगे नहीं आ रहा था। सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही थी। इसकी शिकायत परिवारीजनों ने पुलिस व प्रशासनिक अफसरों से भी मौखिक तौर पर की और न्याय की गुहार लगाते रहे।
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रेस्क्यू के दौरान मिल में रहीं एंबुलेंस
प्रशासनिक टीम जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर लापता हुए लोगों को देर सायं तक खोजा जाता रहा। घायलों को तत्काल उपचार मुहैया कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया जा सके, इसके लिए करीब आधा दर्जन एंबुलेंस प्रशासन की ओर से मिल परिसर में ही खड़ी करा ली गईं।
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मृत, घायल मजदूरों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं
मिल प्रबंधन से लेकर प्रशासन तक का रहा गोलमोल जवाब
हादसे में मारा गया मजदूर पवन अथवा घायल मजदूर मिल के अपने कर्मचारी हैं अथवा ठेके के यह स्थित भी देर सायं तक न तो मिल प्रबंधन स्पष्ट कर सका और न ही प्रशासन। यही नहीं हादसे का असली कारण, इलाज और मुआवजे की बात पर भी पर मिल प्रबंधन व प्रशासन का जवाब गोलमोल ही रहा।
मिल के जीएम एचआर आशीष गुप्ता ने कहा कि हादसा कैसे हुआ यह तो फिलहाल बतापाना मुश्किल होगा, लेकिन प्रथम दृष्ट्या यह हादसा शार्ट सर्किट से होना प्रतीत हो रहा है। पूरी बात जांच के बाद ही पता चल सकेगी। उन्होंने कहा कि घायलों को इलाज के लिए राममूर्ति मेडिकल कालेज भोजीपुरा भेजा जा रहा है। जहां मिल प्रबंधन उनका बेहतर से बेहतर इलाज कराएगा। मृतक के परिवार को आर्थिक मदद भी मिल प्रशासन देगा, लेकिन इलाज और मृतक के परिवार को मुआवजा के रूप में कितनी धनराशि दी जाएगी वह स्पष्ट नहीं कर सके। बस इतना कहा कि जो भी मिल प्रबंधन की गाइड लाइन होगी उसके मुताबिक आर्थिक सहायता दी जाएगी। मिल प्रबंधन पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करेगा।
जिलाधिकारी मासूम अली सरवर ने अमर उजाला को बताया कि हादसे के शिकार कर्मचारी मिल कर्मचारी थे अथवा ठेकेदार के इसका सही पता अभी मिल प्रबंधन उन्हें नहीं बता सका है। मिल प्रबंधन ने मिल व ठेके के मिक्स कर्मचारियों के वहां काम करने की बात कही है। प्रशासन का पूरा ध्यान फिलहाल घायलों के इलाज, मलवे में दवे अन्य लोगों को बाहर निकालने और हादसे के बाद से शांति व्यवस्था के साथ स्थिति सामान्य बनाने के हैं। इसके बाद मिल का उपस्थिति रजिस्टर आदि चेक कराया जाएगा जिससे हादसे में मारे गए और घायल मजदूरों की स्थिति स्पष्ट हो सके। डीएम ने कहा घायलों का उचित इलाज कराया जाएगा और मृतक मजदूर के परिवार वालों को जो भी संभव होगा आर्थिक सहायता दिलवाई जाएगी।