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छात्रा ने सिस्टम पर उठाया सवाल

Sun, 28 Nov 2021 01:12 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 28 Nov 2021 01:12 AM IST
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student raised quedtion on system
पीलीभीत। नारियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए पुलिस का मिशन शक्ति अभियान तीसरे फेज में पहुंच गया, लेकिन महिला सम्मान के लिए जो बुनियादी सोच होनी चाहिए वही पैदा नहीं हो सकी। इसके चलते महिलाएं और भी पीड़ित हो रही हैं। पीलीभीत जिले की छात्रा के साथ पहले तो डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर ने दुष्कर्म किया फिर डराया धमकाया। जिससे वह कानून के पंजे में न आ सके। मगर जब छात्रा नहीं मानी और पुलिस तक पहुंच गई तो पुलिस का रवैया भी छात्रा को प्रोत्साहित करने वाला नहीं रहा। यदि 21 नवंबर से अब तक के घटनाक्रम में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गौर फरमाएंगे तो जमीनी हकीकत सामने आ जाएगी। क्योंकि छात्रा को एफआईआर दर्ज कराने में साढ़े छह घंटे और मेडिकल कराने में चौबीस घंटे से ज्यादा का समय लगा। जबकि यह काम दो से तीन घंटे में निपट सकते थे लेकिन सरकारी तंत्र की अपनी सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही तथा हीलाहवाली मिनटों के काम में घंटों लगवा देती है। ऐसा ही दुष्कर्म पीड़िता के संग हुआ है। पीड़ित छात्रा इससे आहत है। उसका कहना है कि अगर ऐसे ही रहा तो दूसरी पीड़ित छात्राएं पुलिस को साक्ष्य देने क्यों आएंगी।
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सिस्टम पर सवाल उठा रहा है यह घटनाक्रम
पहला उदाहरण
21 नवंबर - छात्रा रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए शाम 5.00 बजे कोतवाली पहुंची। पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने का निर्णय लेने में साढ़े पांच घंटे लग गए। छात्रा को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए 6.30 घंटे तक कोतवाली में रहना रहना पड़ा। रात में 10.45 बजे रिपोर्ट दर्ज हुई पर उसकी प्रति नहीं मिली। रिपोर्ट की प्रति 22 नवंबर को दोपहर में मिली।
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दूसरा उदाहरण
26 नवंबर - पुलिस के आग्रह पर छात्रा दोपहर 12 बजे मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंची। साढ़े तीन बजे तक महिला अस्पताल से जिला अस्पताल तक भटकी पर मेडिकल की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। एक्सरे के लिए छात्रा 27 नवंबर को दोपहर 12 बजे फिर पहुंची पर एक्सरे करने में देरी की गई। दोपहर तीन बजे तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।
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