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Pilibhit News: तनाव व नशे की आदत युवाओं को बना रही हृदय रोगी
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पीलीभीत का जिला चिकित्सालय। फाइल फोटो
पीलीभीत। अब तक हृदय रोग की समस्या अधिकतर 40 के पार के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन बढ़ती नशे की आदत व काम के तनाव के चलते इसने युवाओं को भी अपनी चपेट में ले लिया है। नतीजतन आएदिन हार्ट अटैक से युवाओं की मृत्यु के मामले सामने आ रहे है। जिले में भी इसका असर देखा जा रहा है। यही कारण है कि रोजाना करीब चार से पांच युवा मरीज मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए पहुंचते हैं।
देर रात तक जागने की आदत और पौष्टिक भोजन न करने से जहां लोगों की फिटनेस खराब हो रही है, वहीं मोटापे के साथ ब्लडप्रेशर-मधुमेह जैसी तमाम बीमारियों से वे पीड़ित हो रहे है। शुरुआत में लोगों को बेचैनी, घबराहट, पसीना आने की समस्या होती है। जिसे वे नजरअंदाज कर देते हैं, बाद में यही समस्या उन्हें हृदय रोगी बना देती है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि 80 फीसदी 51 से 80 साल आयु वर्ग के हृदय रोगी यहां उपचार के लिए आते हैं। इसके अलावा 20 फीसदी मरीज युवा होते हैं। जो तनाव व नशे की आदत की वजह से हृदय से संबंधित बीमारियों से पीड़ित होते हैं।
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25 लाख की आबादी पर महज एक कॉर्डियोलॉजिस्ट
जिले की बात की जाए, तो यहां करीब 25 लाख आबादी है। पांच तहसीले हैं, जहां सीएचसी भी बनी हैं, बावजूद इसके पूरे जिले में महज एक कॉर्डियोलॉजिस्ट जिला मुख्यालय पर तैनात है। ऐसे में हृदय संबंधी कोई समस्या होने पर लोग जिला मुख्यालय या फिर हायर सेंटर के लिए जाते हैं।
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ये रखें ध्यान तो नहीं होंगे परेशान
- 40 से 60 मिनट सुबह तेज गति से चलें।
- आधा घंटा रोजाना साइकिल चलाएं।
- तली सामग्री, चटपटा और बाजार का खाना कम खाएं।
- फल, हरी सब्जी, दाल का भरपूर प्रयोग करें।
- नशे वाले चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।
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हृदय रोग के एक चिकित्सक मेडिकल कॉलेज में बैठ रहे है। लगातार व्यवस्था को बेहतर बनाने को कोशिश है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
- संगीता अनेजा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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देर रात तक जागने की आदत और पौष्टिक भोजन न करने से जहां लोगों की फिटनेस खराब हो रही है, वहीं मोटापे के साथ ब्लडप्रेशर-मधुमेह जैसी तमाम बीमारियों से वे पीड़ित हो रहे है। शुरुआत में लोगों को बेचैनी, घबराहट, पसीना आने की समस्या होती है। जिसे वे नजरअंदाज कर देते हैं, बाद में यही समस्या उन्हें हृदय रोगी बना देती है।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि 80 फीसदी 51 से 80 साल आयु वर्ग के हृदय रोगी यहां उपचार के लिए आते हैं। इसके अलावा 20 फीसदी मरीज युवा होते हैं। जो तनाव व नशे की आदत की वजह से हृदय से संबंधित बीमारियों से पीड़ित होते हैं।
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25 लाख की आबादी पर महज एक कॉर्डियोलॉजिस्ट
जिले की बात की जाए, तो यहां करीब 25 लाख आबादी है। पांच तहसीले हैं, जहां सीएचसी भी बनी हैं, बावजूद इसके पूरे जिले में महज एक कॉर्डियोलॉजिस्ट जिला मुख्यालय पर तैनात है। ऐसे में हृदय संबंधी कोई समस्या होने पर लोग जिला मुख्यालय या फिर हायर सेंटर के लिए जाते हैं।
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ये रखें ध्यान तो नहीं होंगे परेशान
- 40 से 60 मिनट सुबह तेज गति से चलें।
- आधा घंटा रोजाना साइकिल चलाएं।
- तली सामग्री, चटपटा और बाजार का खाना कम खाएं।
- फल, हरी सब्जी, दाल का भरपूर प्रयोग करें।
- नशे वाले चीजों का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।
हृदय रोग के एक चिकित्सक मेडिकल कॉलेज में बैठ रहे है। लगातार व्यवस्था को बेहतर बनाने को कोशिश है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
- संगीता अनेजा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज