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स्ट्रीट लाइट बाजार रेट से ज्यादा कीमत पर कैसे खरीद ली, डीएम कराएंगे जांच

Sun, 01 Mar 2020 02:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2020 02:34 AM IST
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Street light scam
पीलीभीत। नगरपालिका में बाजार रेट से तीन या चार गुने महंगे रेट में स्ट्रीट लाइट खरीद का मामला सामने आने के बाद नगरपालिका में हड़कंप मच गया। अमर उजाला में खबर छपने के बाद डीएम ने पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। वहीं शनिवार को नगरपालिका में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। इक्का दुक्का कर्मचारी ही दफ्तर पहुंचे। सभासदों से लेकर स्टाफ के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा।
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शहर में प्रकाश व्यवस्था ठीक करने के नाम पर नगरपालिका ने जनवरी में 1500 एलईडी स्ट्रीट लाइटों की खरीद की थी। ये लाइटें जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदना बताया गया है। स्ट्रीट लाइटों की सप्लाई लखनऊ की एक फर्म ने की थी। फर्म ने हैलोनिक्स की 45 वाट की एक स्ट्रीट लाइट 4,940 रुपये और 75 वाट की स्ट्रीट लाइट की सप्लाई 8050 रुपये के हिसाब से नगरपालिका को की। नगरपालिका ने 1500 स्ट्रीट लाइटें खरीदने के बदले लखनऊ की फर्म को एक करोड़ तीन लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया। हालांकि फर्म का पेमेंट एक करोड़ पांच लाख 20 हजार रुपये होना है। बाकी रुपये फर्म को अभी देना बाकी है।
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इधर, सभासदों की कमेटी से सत्यापन न कराए जाने पर नगरपालिका में विवाद छिड़ गया। सभासदों ने मंडलायुक्त को पत्र भेजकर स्ट्रीट लाइट घपले की जांच की मांग कर डाली। उसके बाद नगरपालिका ने सभासदों की एक कमेटी बनाकर उससे जांच की खानापूरी कर दी। मगर, उसमें सभासदों के दो गुट बन गए। एक गुट ने दूसरे गुट पर रुपये लेकर लाइट खरीद का सत्यापन करने का आरोप लगाया। सभासदों में विवाद इतना बढ़ा कि कमेटी में शामिल सभासद ने अपने दाहिने हाथ की नस काट ली।
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इस पूरे गोलमाल को अमर उजाला ने शनिवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद डीएम ने बताया कि खबर से पूरा मामला जानने के बाद खरीद की जांच कराने का निर्णय लिया है। बोले-गड़बड़ी पकड़ में आने पर दोषियों पर कार्रवाई होगी।

एसडीओ ने आनन-फानन में गुपचुप कर दिया सत्यापन
नियमानुसार नगरपालिका को सभासदों की सत्यापन कमेटी से लाइट खरीद का सत्यापन कराना था। मगर, नगरपालिका ने आनन-फानन में बिजली विभाग के अमरिया के एसडीओ दीपक नेगी से गुपचुप सत्यापन कराकर फर्म को तत्काल एक करोड़ तीन लाख का भुगतान कर दिया। पता चलने पर सभासदों ने हंगामा किया तो सभासदों की एक कमेटी बनाकर खानापूरी की गई। इन डेढ़ हजार लाइट की कीमत बाजार में 29.50 लाख रुपये की है, वहीं एक करोड़ से ज्यादा में खरीदा गया।
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