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केंद्रीय मंत्री के जिले में स्टाफ का टोटा
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Tue, 27 Jun 2017 08:02 PM IST
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चिराग तले अंधेरा। यह कहावत बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में एकदम फिट है। यहां की सांसद महिला एवं बाल विकास मंत्रालय होने के बावजूद जिले में स्टाफ की भारी कमी से है। इसमें सर्वाधिक कमी सुपरवाइजरों की है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में महिलाओं एवं बच्चों को कुपोषण से दूर करने का जिम्मा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का है। यहां की सांसद मेनका गांधी इस विभाग की केंद्रीय मंत्री है। बावजूद इसके विभाग बदहाली के आंसू बहा रहा है। जिले में स्टाफ का नियतन उन दिनों का है जब जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 1712 थी। आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या बढ़कर 1960 हो गई है, लेकिन इसके सापेक्ष स्टाफ बढ़ने के बजाय घट गया है। पूर्व नियतन के अनुसार जिले में एक कार्यालय अधीक्षक, एक अन्वेषक सह संगणक, एक वरिष्ठ सहायक, एक चपरासी और दो कनिष्ठ सहायक के पद रिक्त हैं। सीडीपीओ आठ के सापेक्ष छह हैं। सबसे ज्यादा कमी सुपरवाइजर (मुख्य सेविका) पद की है। जिले की आठों परियोजनाएं मिलाकर 66 मुख्य सेविकाएं होनी चाहिए, जिसके सापेक्ष मात्र 18 हैं। यानी 48 पद रिक्त हैं। एक सुपरवाइजर के पास तीन या चार पदों का अतिरिक्त चार्ज है। इसके अलावा 11 कनिष्ठ सहायकों के सापेक्ष मात्र एक कनिष्ठ और चार चालकों के सापेक्ष मात्र दो ही चालक हैं। 1738 के सापेक्ष 1655 कार्यकत्री हैं। मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्री 222 के सापेक्ष 198 है और 1739 के सापेक्ष 1636 सहायिकाएं हैं।
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