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कैसे मिले खेलों को बढ़ावा..खेल मैदान हैं न खेलों का सामान
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पीलीभीत। खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन प्रशासन स्तर से सिर्फ कागजी प्रयास हो रहे हैं। यही वजह है कि युवाओं में खेलों के प्रति रुझान बढ़ने के बावजूद खेल प्रतिभाओं का विकास नहीं हो पा रहा है। पहले तो खेलने के लिए मैदान तलाशना ही भारी पड़ जाता है। इसके बाद स्पोर्ट्स का सामान खरीदने के लिए भी भटकना पड़ता है। चंद दुकानें ही शहर में हैं। इन पर भी हर समय सामान मुहैया नहीं हो पाता।
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों के युवाओं का खेलों के प्रति जुनून देखने लायक होता है। समय आने पर वह प्रतिभा के दम पर अपने हुनर को भी दिखाते है, लेकिन मैदान के साथ संसाधनों की कमी युवाओं के जुनून को समेट रही है। खेलों में भविष्य देखने वाले युवाओं को मायूसी हाथ लग रही है। ऐसा तब है जब हॉकी, क्रिकेट, बैडमिंटन के अलावा पहलवानी के क्षेत्र में युवा जनपद का नाम रोशन कर रहे है। इधर खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके लिए जनपद के अफसर भी लगातार प्रयास में जुटे है, लेकिन मैदान की कमी खेलों को बढ़ावा देने में बाधा डाले हुए है। यही वजह है कि अब स्पोट्र्स शॉप के संचालकों ने भी संसाधनों को रखना कम कर दिया है। शहर में तीन-चार स्पोर्ट्स शॉप है, सभी का हाल ऐसा ही है।
पहले से आधी हुई बिक्री तो कम कर दिया सामान रखना
शहर के स्पोर्ट्स शॉप के संचालक अनुराग बताते है कि पहले एक दौर था कि जब जनपद में खेलों के प्रति युवाओं का जुनून देखने लायक था। जिसके चलते दुकानों पर भी रौनक रहती थी। हर खेल का सामान रखते थे। अब बिक्री आधी रह गई है। कई-कई दिनों तक एक भी युवा दुकान पर नहीं आता है। इसके पीछे मैदानों की कमी ही सामने आ रही है।
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शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों के युवाओं का खेलों के प्रति जुनून देखने लायक होता है। समय आने पर वह प्रतिभा के दम पर अपने हुनर को भी दिखाते है, लेकिन मैदान के साथ संसाधनों की कमी युवाओं के जुनून को समेट रही है। खेलों में भविष्य देखने वाले युवाओं को मायूसी हाथ लग रही है। ऐसा तब है जब हॉकी, क्रिकेट, बैडमिंटन के अलावा पहलवानी के क्षेत्र में युवा जनपद का नाम रोशन कर रहे है। इधर खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन स्तर से योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके लिए जनपद के अफसर भी लगातार प्रयास में जुटे है, लेकिन मैदान की कमी खेलों को बढ़ावा देने में बाधा डाले हुए है। यही वजह है कि अब स्पोट्र्स शॉप के संचालकों ने भी संसाधनों को रखना कम कर दिया है। शहर में तीन-चार स्पोर्ट्स शॉप है, सभी का हाल ऐसा ही है।
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पहले से आधी हुई बिक्री तो कम कर दिया सामान रखना
शहर के स्पोर्ट्स शॉप के संचालक अनुराग बताते है कि पहले एक दौर था कि जब जनपद में खेलों के प्रति युवाओं का जुनून देखने लायक था। जिसके चलते दुकानों पर भी रौनक रहती थी। हर खेल का सामान रखते थे। अब बिक्री आधी रह गई है। कई-कई दिनों तक एक भी युवा दुकान पर नहीं आता है। इसके पीछे मैदानों की कमी ही सामने आ रही है।
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