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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Speculative cane mill surrounded in controversy, committee officer

गन्ना सट्टा विवाद में घिरे  मिल, समिति अधिकारी

Thu, 15 Dec 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Thu, 15 Dec 2016 11:55 PM IST
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 पेराई सत्र शुरू होने के कुछ समय बाद ही किसान सहकारी चीनी मिल संपूर्णानगर और खीरी पीलीभीत सहकारी गन्ना विकास समिति सट्टा संचालन के मामले को लेकर विवादों में घिर गई है। वजह दोनों के अधिकारियों ने भूदान क्षेत्र के तमाम किसानों का सट्टा यह कह कर नहीं चलाया कि उनकी भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं है, लेकिन अब उनमे से तमाम उन किसानों के सट्टे चलाने की तैयारी मिल प्रबंधन कर रहा है जिन्हें तहसीलदार पूरनपुर ने अवैध कब्जेदार करार दिया है। खास बात यह है कि महज कब्जे के आधार पर पिछले कई सालों से सट्टा संचालन करते आ रहे इन किसानों में से करीब दो दर्जन किसानों को सूची में शामिल न करने से मिल प्रबंधन पर सवालिया निशान लग गया है। जिले के ट्रांस शारदा क्षेत्र के ग्राम सिंघाड़ा उर्फ टाटरगंज, बाजार घाट, बम्हनपुरी भगीरथ व घाघरघाट समेत कई गांव संपूर्णानगर वन रेंज और नेपाल तथा खीरी की सीमा से सटे बसे हैं। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि कई दशक पहले शारदा सागर डैम की स्थापना के समय उन्हें यहां पुनर्वासित किया गया था, लेकिन उन्हें जिस भूमि पर बसाया गया उसका उन्हें पट्टा आदि नहीं दिया गया। जिसके चलते राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज नहीं हो पाया। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि कब्जे के आधार पर उन लोगों का सट्टा भी चलता है तथा जमीन में बोये गन्ने का हर साल सर्वे भी होता है। बताया जाता है कि गत पेराई सत्र में कुछ लोगों ने मिल व समिति प्रबंधन पर कब्जे के आधार पर बिना राजस्व अभिलेख देखे तमाम किसानों का सट्टा बना देने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों को भेजी थी। जिसके बाद समिति ने उपरोक्त गांवों 1165 किसानों का सट्टा बंद कर दिया। किसानों के हो हल्ला करने पर समिति ने किसानों द्वारा उपलब्ध कराई गई 1120 किसानों की सूची सत्यापन के लिए तहसील पूरनपुर भेज दी। तहसीलदार पूरनपुर ने सूची में शामिल लोगों की जांच कराई तो उनमे लगभग सभी किसान ऐसे निकले जिनके नाम और भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं थी। तहसीलदार ने अपनी टिप्पणी में सूची में शामिल लोगों को उपनिवेशन, नानजेडए और वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप से काबिज होने की रिपोर्ट दी। इसके बाद उन सभी किसानों के सट्टा संचालन पर मिल प्रबंधन ने रोक लगा दी थी। बताया जाता है कि इधर आनन-फानन में इनमे से अधिकांश किसानों के खाता संचालन की तैयारी में मिल व गन्ना समिति प्रबंधन लगा है, लेकिन अभी भी दो दर्जन से अधिक किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं। 
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यह सही है कि तहसीलदार पूरनपुर ने अपनी आख्या में सूची में शामिल किसानों को अवैध कब्जेदार बताया था। जानकारी मिली है कि उन किसानों की सूची मिल में फीड होने गई है। अगर किसी का नाम रह गया है तो वह सूची उपलब्ध करा दे। सर्वे करा उसकी भी सूची सट्टा संचालन के लिए भेज दी जाएगी।
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-नंदलाल, सचिव गन्ना समिति संपूर्णानगर
मामला मेरी जानकारी में है। जिन किसानों के पास भूमि से संबंधित अभिलेख नहीं होते उन्हें कब्जे के आधार पर आपूर्तिकर्ता सदस्य के रूप में मानते हुए उनका आपूर्ति सट्टा बना दिया जाता है। ऐसे किसानों को समिति के अन्य कोई लाभ नहीं दिए जाते। अगर कब्जे के आधार पर सट्टा बनेगा तो सबका। अगर कहीं पक्षपात होता मिलेगा तो कार्रवाई की जाएगी। -जगदीशचंद्र यादव, डीसीओ, लखीमपुर
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