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Pilibhit News: हाईवे निर्माण के लिए अब तक 186.2 हेक्टेयर भूमि का ही हो पाया अधिग्रहण
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पीलीभीत। घपलेबाजी सामने आने के बाद बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भूअधिग्रहण की कवायद अधर में लटकी हुई है। इसकी वजह से किसानों का मुआवजा भी अटका हुआ है। हाईवे निर्माण के लिए जिले से कुल 260 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत की जानी थी लेकिन अब तक सिर्फ 72 प्रतिशत यानी 186.2 हेक्टेयर भूमि का ही अधिग्रहण ही हो पाया है।
वर्ष 2022 में हाईवे निर्माण के लिए मंजूरी मिली थी, जबकि घपलेबाजों ने एलाइनमेंट के दायरे में आने वाली जमीन को मंत्रालय में प्रस्ताव तैयार होने की भनक लगते ही खरीद लिया था। घपलेबाजों ने अधिकारियों से साठगांठ कर मुआवजा अधिक लेने के लिए ढांचे भी खड़े कर दिए और सर्वे में ढांचों को पुराना बताकर कई गुना अधिक मुआवजा ले लिया।
मामले में जांच की गई तो घपलेबाजी का खुलासा हुआ। घपलेबाजों के साथ साठगांठ करने वाले राजस्व और एनएचएआई के अधिकारियों का भी नाम सामने आया। जांच चलने की वजह से अब तक सिर्फ 72 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण हो पाया है, जबकि निर्माण कार्य शुरू करने के लिए न्यूनतम 80 प्रतिशत अधिग्रहण का कार्य पूरा होना जरूरी है।
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एनएचएआई की ओर से अधिग्रहण कार्य पूरा करने के लिए 15 अक्तूबर तक का समय निर्धारित किया गया है। जिले के 27 गांवों की जमीन हाईवे के एलाइनमेंट के दायरे में आई है। इनमें दो तहसीलों सदर के सात और अमरिया के 21 गांव शामिल हैं। जिनमें 260 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जानी है लेकिन अब तक सिर्फ 187.2 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ है।
शेष 72.8 हेक्टेयर जमीन छोटे किसानों की है। इसके अधिग्रहण की प्रक्रिया जांच चलने की वजह से अधर में लटकी हुई है, जिसकी वजह से किसानों को मिलने वाले मुआवजे पर ग्रहण लगा हुआ है। साथ ही दो वर्ष में हाईवे के निर्माण को पूरा करने के दावे भी फेल होते नजर आ रहे हैं।
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जिले के 404 किसानों की भूमि की जानी है अधिगृहीत
जिले की दो तहसीलों सदर और अमरिया के कुल 404 किसानों की भूमि एलाइनमेंट के दायरे में आई है। जिसमें छोटे और बड़े सभी किसान शामिल हैं। हाईवे निर्माण के लिए कुल 260 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है।
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पीलीभीत और अमरिया क्षेत्र में कुछ जमीन अधिगृहीत होना शेष रह गई है। जमीनों को लेकर अभिलेखों को चेक किया जा रहा है। जल्द ही शेष जमीन भी ले ली जाएगी।
- विजय वर्धन तोमर, सिटी मजिस्ट्रेट
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वर्ष 2022 में हाईवे निर्माण के लिए मंजूरी मिली थी, जबकि घपलेबाजों ने एलाइनमेंट के दायरे में आने वाली जमीन को मंत्रालय में प्रस्ताव तैयार होने की भनक लगते ही खरीद लिया था। घपलेबाजों ने अधिकारियों से साठगांठ कर मुआवजा अधिक लेने के लिए ढांचे भी खड़े कर दिए और सर्वे में ढांचों को पुराना बताकर कई गुना अधिक मुआवजा ले लिया।
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मामले में जांच की गई तो घपलेबाजी का खुलासा हुआ। घपलेबाजों के साथ साठगांठ करने वाले राजस्व और एनएचएआई के अधिकारियों का भी नाम सामने आया। जांच चलने की वजह से अब तक सिर्फ 72 प्रतिशत भूमि का ही अधिग्रहण हो पाया है, जबकि निर्माण कार्य शुरू करने के लिए न्यूनतम 80 प्रतिशत अधिग्रहण का कार्य पूरा होना जरूरी है।
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एनएचएआई की ओर से अधिग्रहण कार्य पूरा करने के लिए 15 अक्तूबर तक का समय निर्धारित किया गया है। जिले के 27 गांवों की जमीन हाईवे के एलाइनमेंट के दायरे में आई है। इनमें दो तहसीलों सदर के सात और अमरिया के 21 गांव शामिल हैं। जिनमें 260 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जानी है लेकिन अब तक सिर्फ 187.2 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ है।
शेष 72.8 हेक्टेयर जमीन छोटे किसानों की है। इसके अधिग्रहण की प्रक्रिया जांच चलने की वजह से अधर में लटकी हुई है, जिसकी वजह से किसानों को मिलने वाले मुआवजे पर ग्रहण लगा हुआ है। साथ ही दो वर्ष में हाईवे के निर्माण को पूरा करने के दावे भी फेल होते नजर आ रहे हैं।
जिले के 404 किसानों की भूमि की जानी है अधिगृहीत
जिले की दो तहसीलों सदर और अमरिया के कुल 404 किसानों की भूमि एलाइनमेंट के दायरे में आई है। जिसमें छोटे और बड़े सभी किसान शामिल हैं। हाईवे निर्माण के लिए कुल 260 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है।
पीलीभीत और अमरिया क्षेत्र में कुछ जमीन अधिगृहीत होना शेष रह गई है। जमीनों को लेकर अभिलेखों को चेक किया जा रहा है। जल्द ही शेष जमीन भी ले ली जाएगी।
- विजय वर्धन तोमर, सिटी मजिस्ट्रेट