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29 दिन के भीतर छह लूट, 11 चोरियां, खुलासा एक भी नहीं
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अफसरों के संजीदा न होने से थाना स्तर पर भी बढ़ रही लापरवाही
पीड़ित बोले, पुलिस मनमानी तहरीर लेकर हल्की धाराओं में दर्ज कर रही गंभीर मामले
पीलीभीत। शहर से देहात तक सिलसिलेवार तरीके से घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस न तो खुलासे कर पाने में सक्षम है और न ही घटनाओं को रोक पाने में या यूं कहें कि सहालग के इन दिनों में फिलहाल पुलिस का सूचना तंत्र एक दम फेल साबित हो रहा है। वहीं अफसरों के घटनाओं के प्रति संजीदगी न दिखाए जाने से भी थाना स्तर पर और लापरवाही बरती जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस मनमानी तहरीर लेकर मामले को हल्की धाराओं में दर्ज कर अपनी वाहवाही लूटना चाह रही है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि इन दिनों पुलिस का सीधा फंडा है कि घटना खुली तो गुडवर्क वरना फर्जी है।
वैसे तो अब भी कई पुरानी चोरी की घटनाएं लंबित हैं। मगर बात अगर नवंबर की करें तो 29 दिन के भीतर 11 चोरी हो चुकी हैं, जबकि बंधक बनाकर लूटपाट की छह घटनाएं हैं। पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र में नकाबपोश सशस्त्र बदमाशों ने सिलसिलेवार तरीक़े से लूटपाट की। पीड़ितों के मुताबिक मामले डकैती की धाराओं के थे। मगर अधिकांश में चोरी की रिपोर्ट दर्ज की गई, जबकि अन्य को संदिग्ध बताकर टाल दिया गया। अफसर भी धाराओं के खेल में अपनी मौन स्वीकृति देकर खामोश ही रहे।
गजरौला के बिठौरा कलां गांव में 25 लाख की चोरी के मामले में भी सवाल उठा दिए। शहर में भी आए दिन घटनाएं हो रही हैं। कई मामलों की तो रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई, जिनके मुकदमे लिखे गए उनमें प्रगति नहीं हुई। खास बात रही कि पुलिस भी चंद दिन के बाद घटनाएं भूल गई। अब तो कोई भी खुलासे तक पहुंचने को गंभीर नहीं। घटनाएं रोकने के लिए भी सख्ती नहीं हो सकी। पांच साल पहले तत्कालीन एसपी सोनिया सिंह के कार्यकाल के दौरान भी चोरी की घटनाएं बढ़ी थीं। मगर उस वक्त चोरी को गंभीरता से लिया जाता था। घटना के बाद संबंधित क्षेत्र के पुलिस पर कार्रवाई होती थी।
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आलम यह था कि एसपी को घटना बताने में भी पुलिसकर्मी घबराते थे। मगर अब तो एक ही रणनीति अपनाई जा रही कि घटना खुली तो गुडवर्क वरना फर्जी है।
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पीड़ित बोले, पुलिस मनमानी तहरीर लेकर हल्की धाराओं में दर्ज कर रही गंभीर मामले
पीलीभीत। शहर से देहात तक सिलसिलेवार तरीके से घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस न तो खुलासे कर पाने में सक्षम है और न ही घटनाओं को रोक पाने में या यूं कहें कि सहालग के इन दिनों में फिलहाल पुलिस का सूचना तंत्र एक दम फेल साबित हो रहा है। वहीं अफसरों के घटनाओं के प्रति संजीदगी न दिखाए जाने से भी थाना स्तर पर और लापरवाही बरती जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस मनमानी तहरीर लेकर मामले को हल्की धाराओं में दर्ज कर अपनी वाहवाही लूटना चाह रही है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि इन दिनों पुलिस का सीधा फंडा है कि घटना खुली तो गुडवर्क वरना फर्जी है।
वैसे तो अब भी कई पुरानी चोरी की घटनाएं लंबित हैं। मगर बात अगर नवंबर की करें तो 29 दिन के भीतर 11 चोरी हो चुकी हैं, जबकि बंधक बनाकर लूटपाट की छह घटनाएं हैं। पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र में नकाबपोश सशस्त्र बदमाशों ने सिलसिलेवार तरीक़े से लूटपाट की। पीड़ितों के मुताबिक मामले डकैती की धाराओं के थे। मगर अधिकांश में चोरी की रिपोर्ट दर्ज की गई, जबकि अन्य को संदिग्ध बताकर टाल दिया गया। अफसर भी धाराओं के खेल में अपनी मौन स्वीकृति देकर खामोश ही रहे।
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गजरौला के बिठौरा कलां गांव में 25 लाख की चोरी के मामले में भी सवाल उठा दिए। शहर में भी आए दिन घटनाएं हो रही हैं। कई मामलों की तो रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई, जिनके मुकदमे लिखे गए उनमें प्रगति नहीं हुई। खास बात रही कि पुलिस भी चंद दिन के बाद घटनाएं भूल गई। अब तो कोई भी खुलासे तक पहुंचने को गंभीर नहीं। घटनाएं रोकने के लिए भी सख्ती नहीं हो सकी। पांच साल पहले तत्कालीन एसपी सोनिया सिंह के कार्यकाल के दौरान भी चोरी की घटनाएं बढ़ी थीं। मगर उस वक्त चोरी को गंभीरता से लिया जाता था। घटना के बाद संबंधित क्षेत्र के पुलिस पर कार्रवाई होती थी।
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आलम यह था कि एसपी को घटना बताने में भी पुलिसकर्मी घबराते थे। मगर अब तो एक ही रणनीति अपनाई जा रही कि घटना खुली तो गुडवर्क वरना फर्जी है।