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Pilibhit News: निजाम हैदराबाद के अत्याचारों पर आंदोलन में कूद पड़े थे श्रीराम शर्मा

Sat, 15 Aug 2026 01:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2026 01:04 AM IST
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Shriram Sharma had plunged into the movement against the atrocities of the Nizam of Hyderabad.
श्रीराम शर्मा का फाइल फोटो
महाराष्ट्र के शोलापुर जाकर सत्याग्रहियों के जत्थे में शामिल होकर गए थे जेल
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बीसलपुर। अंग्रेजी हुकूमत में जब ज्यादती और जुल्म का दौर जारी था, तब गांव चंदपुरा निवासी श्रीराम शर्मा निजाम हैदराबाद के अत्याचारों की खबरें अखबारों में पढ़ने के बाद आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे। उन्हें जेल जाना पड़ा, लेकिन वह अपने संकल्प से नहीं डिगे।
गांव चंदपुरा के मूल निवासी मोहल्ला दुर्गा प्रसाद में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य राम गोपाल शर्मा ने बताया कि उनके पिता श्रीराम शर्मा का जन्म चार सितंबर 1912 को हुआ था। वह वर्ष 1938 में निजाम हैदराबाद द्वारा भारतीयों पर जुल्म ढाने की खबरें अखबारों में पढ़ने के बाद अपना गुस्सा रोक नहीं पाए। वह अकेले ही महाराष्ट्र के शोलापुर पहुंच गए। वहां सत्याग्रहियों के उस जत्थे में शामिल हो गए, जो क्रांतिकारी संजीव रेड्डी के नेतृत्व में गुलबर्गा जा रहा था।
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गुलबर्गा शहर में वह गिरफ्तार हो गए थे। उन्हें छह माह की सजा हुई थी। कुछ समय बाद उनका स्थानांतरण गुलबर्गा जेल से हैदराबाद जेल हो गया था। जिस दिन वह हैदराबाद जेल पहुंचे थे, उससे अगले दिन जेल अधीक्षक का निरीक्षण होना था। निरीक्षण के दौरान जेल कर्मचारियों ने सभी कैदियों को कमर में कपड़ा लपेटने का आदेश दिया था। श्रीराम शर्मा ने ऐसा करने से मना कर दिया था। जेल अधीक्षक ने इसे अपना अपमान समझा।
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जेल अधीक्षक ने उनकी काफी पिटाई कराकर पैरों में बेड़ियां डलवाकर उन्हें तन्हाई में बंद करवा दिया था। नौ फुट की उस कोठरी का दरवाजा केवल भोजन देने और शौचालय साफ करने के लिए ही खुलता था। बताते हैं कि आंदोलन के दौरान वह कई बार जेल गए। नौ अप्रैल 1941 को उन्हें तीन माह की जेल और 60 रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। जुर्माना अदा न करने पर उन्हें तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा दी गई। अंग्रेजों ने उन्हें काफी यातनाएं दीं, लेकिन उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए। वर्ष 2002 में उनका निधन हो गया।
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आपातकाल के दौरान भी गए जेल

रामगोपाल शर्मा ने बताया कि वर्ष 1975 में आपातकाल लागू होने के दौरान जब पूरा देश कठिन दौर से गुजर रहा था, तब भी उनके पिता चुप नहीं बैठे। उन्होंने आपातकाल का विरोध करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कहा था कि वह 14 अगस्त को कटरा बाजार बीसलपुर में आपातकाल का विरोध करेंंगे। 14 अगस्त को सुबह आठ बजे ही उन्हें उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उन्हें छह माह माह जेल में रहना पड़ा।


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विधानसभा का टिकट ठुकराया

वर्ष 1976 में जब श्रीराम शर्मा जेल से छूटकर आए। वर्ष 1977 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें जनता पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाना चाहा था, लेकिन उन्होंने टिकट लेने से इन्कार कर दिया। संवाद
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