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Pilibhit News: विदेश से एमबीए कर लौटे शिवम कर रहे गोसेवा
Wed, 13 Sep 2023 12:10 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Wed, 13 Sep 2023 12:10 AM IST
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पूरनपुर। युवा पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश करते हैं लेकिन पूरनपुर के शिवम भदौरिया विदेश से एमबीए करने के बाद गोसेवा में जुटे हैं। उनके साथ दो हजार नौजवान भी जुड़े हैं, जो हादसों में घायल गोवंश का इलाज करते हैं। जिले के अलावा अन्य जिलों में भी उनकी टीमें हैं। मोबाइल फोन पर सूचना मिलते ही टीमें पशुओं का इलाज करने के लिए पहुंच जाती हैं।
कोतवाली रोड पर रहने वाले कपड़ा व्यापारी बृजेश भदौरिया के बेटे शिवम गोसेवा के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2017 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। एक साल वहां जॉब भी की। कोरोना काल में घरवालों के दबाव में वह जॉब छोड़कर घर लौट आए।
यहां आकर बालाजी दरबार से जुड़ गए और महंत के साथ दरबार में सेवा करने लगे। यहीं से शिवम को गोसेवा की प्रेरणा मिली। वैसे वह अपने पिता के साथ कस्बे में कपड़े की दुकान पर भी बैठते हैं, लेकिन गोसेवा के लिए सारे काम छोड़ देते हैं। सड़क दुर्घटना में घायल गोवंश और पक्षियों का इलाज करने के लिए तुरंत पहुंच जाते हैं।
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पीलीभीत जनपद के अलावा लखीमपुर, शाहजहांपुर, बरेली आदि जिलों की 11 तहसीलों में उनकी टीमें हैं। इन टीमों से 2000 से अधिक युवक जुड़े हैं। शिवम ने बताया कि गोसेवा करने से उन्हें शांति मिलती है। पशु चिकित्सा विभाग भी निशुल्क दवाएं देकर उनका सहयोग कर रहा है। इलाज में काम आने वाली दवाएं वह सरकारी अस्पताल से लेते हैं या फिर खुद बाजार से खरीद लेते हैं।
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सोशल मीडिया से भी मिलती है सूचना
छुट्टा पशु अक्सर सड़क पर वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। सूचना पर शिवम अपनी टीम के साथ उनका इलाज करने पहुंचते हैं। जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पताल से पशु चिकित्सक को बुलाकर लाते हैं। पूर्व में अस्पताल में काम कर चुके संविदाकर्मियों के सहयोग से शिवम व उनकी टीम पशुओं का इलाज करती है। सड़क पर कहीं भी मवेशी के घायल होने पर राहगीर उन्हें फोन पर सूचना देते हैं। इसके अलावा फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप पर भी शिवम के साथ हजारों लोग जुड़े हैं, जो सूचना देते हैं।
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2272 का इलाज, 895 मृत गोवंश को कर चुके हैं दफन
शिवम ने बताया वह अब तक 2272 पशुओं का इलाज कर चुके हैं। इसके अलावा सड़क हादसों में मरे 895 मवेशियों को दफना चुके हैं। पूरनपुर क्षेत्र में मृत गोवंश को दफनाने में नगर पालिका प्रशासन भी उनका सहयोग करता है।
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कोतवाली रोड पर रहने वाले कपड़ा व्यापारी बृजेश भदौरिया के बेटे शिवम गोसेवा के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2017 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। एक साल वहां जॉब भी की। कोरोना काल में घरवालों के दबाव में वह जॉब छोड़कर घर लौट आए।
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यहां आकर बालाजी दरबार से जुड़ गए और महंत के साथ दरबार में सेवा करने लगे। यहीं से शिवम को गोसेवा की प्रेरणा मिली। वैसे वह अपने पिता के साथ कस्बे में कपड़े की दुकान पर भी बैठते हैं, लेकिन गोसेवा के लिए सारे काम छोड़ देते हैं। सड़क दुर्घटना में घायल गोवंश और पक्षियों का इलाज करने के लिए तुरंत पहुंच जाते हैं।
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पीलीभीत जनपद के अलावा लखीमपुर, शाहजहांपुर, बरेली आदि जिलों की 11 तहसीलों में उनकी टीमें हैं। इन टीमों से 2000 से अधिक युवक जुड़े हैं। शिवम ने बताया कि गोसेवा करने से उन्हें शांति मिलती है। पशु चिकित्सा विभाग भी निशुल्क दवाएं देकर उनका सहयोग कर रहा है। इलाज में काम आने वाली दवाएं वह सरकारी अस्पताल से लेते हैं या फिर खुद बाजार से खरीद लेते हैं।
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सोशल मीडिया से भी मिलती है सूचना
छुट्टा पशु अक्सर सड़क पर वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। सूचना पर शिवम अपनी टीम के साथ उनका इलाज करने पहुंचते हैं। जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पताल से पशु चिकित्सक को बुलाकर लाते हैं। पूर्व में अस्पताल में काम कर चुके संविदाकर्मियों के सहयोग से शिवम व उनकी टीम पशुओं का इलाज करती है। सड़क पर कहीं भी मवेशी के घायल होने पर राहगीर उन्हें फोन पर सूचना देते हैं। इसके अलावा फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप पर भी शिवम के साथ हजारों लोग जुड़े हैं, जो सूचना देते हैं।
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2272 का इलाज, 895 मृत गोवंश को कर चुके हैं दफन
शिवम ने बताया वह अब तक 2272 पशुओं का इलाज कर चुके हैं। इसके अलावा सड़क हादसों में मरे 895 मवेशियों को दफना चुके हैं। पूरनपुर क्षेत्र में मृत गोवंश को दफनाने में नगर पालिका प्रशासन भी उनका सहयोग करता है।