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शारदा सागर डैम का  अस्तित्व खतरे में

Wed, 06 Jul 2016 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Wed, 06 Jul 2016 11:39 PM IST
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Sharda Sagar Dam Vulnerable
शारदा डैम - फोटो : pilibhit, beureu
प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों की कृषि फसलों के लिए जीवन दायिनी बने शारदा डैम का अस्तित्व खतरे में है। डैम की लगातार होती जा रही जर्जर हालत और उससे उत्पन्न खतरे पर गौर किया जाए तो इसमें मात्र सरकार की उदासीनता ही नहीं, बल्कि अभियंताओं की लापरवाही भी साफ दिखाई देती है। प्रदेश सरकार ने डैम की एनुअल रिपयेर को दी जाने वाली धनराशि देना भी बंद कर दी है।
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करीब 3,99,723 एकड़ में फैले शारदा डैम में पानी का भंडार पूर्व में 623 फिट तक किया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे डैम में पानी भरने की क्षमता घटती गई। उसका मुख्य कारण एक तो डैम में पानी के साथ आने वाली सिल्ट है, दूसरा मुख्य बाडी की अधिकांश पिचिंग का उखड़ना है। डैम में पानी निकास को बनाई गई लांग और क्रास ड्रेनें भी सफाई न होने से चोक हो चुकी हैं। डैम में उगी जंगल झाड़ी तक की साफ सफाई नहीं कराई गई है। ऐसे में बरसात के दौरान यदि कहीं से पानी का रिसाव होता है, तो उसका पता भी नहीं चल सकेगा।
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सिल्ट पटान से घटी पानी की क्षमता
डैम की ऊंचाई वैसे तो 633 फिट है, लेकिन पहले इसमें 623 फिट तक पानी भरा जाता था। अब पानी डेड लेबल डैम पटने के चलते 608 फिट हो गया है। बताते हैं कि जीरो से छह किमी तक सिल्ट अधिक हो गई है। हालांकि अब भी कुछ समय तक के लिए डैम को 622 फिट तक ही भरा जाता है, लेकिन इसे जल्द ही खाली कर दिया जाता है। 
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कई कारणों से उत्पन्न खतरों से जूझ रहा है डैम
तत्कालीन बसपा सरकार में 19 करोड़ रुपये की लागत से डैम की बॉडी को मजबूत किया गया था, लेकिन दो वर्ष के भीतर ही बॉडी पुन: जर्जर होने लगी। प्रदेश सरकार ने एनुअल रिपेयर को दी जाने वाली रकम भी कई सालों से देना बंद कर दी। पिचिंग मरम्मत को छह करोड़ का प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद भी आज तक पैसा रिलीज नहीं किया गया। डैम के वर्जित क्षेत्र में घनी आबादी बसती जा रही है। जो एक बड़े खतरे का संकेत हैं।  

...तो बड़ा भूभाग घिर जाएगा पानी से 
अभियंताओं के मुताबिक बरसात के दौरान डैम को 615 फिट के ऊपर नहीं भरा जाना चाहिए। यदि डैम में रिसाव या किसी अन्य कारण से क्षति होती है तो 127 किमी एरिया (कैचमेंट एरिया) पानी से घिर जाएगा। इससे जनपद के अलावा लखीमपुर, सीतापुर आदि भी प्रभावित होंगे।


डैम की बॉडी पर उगी जंगल झाड़ी और ड्रेनों की सफाई का कार्य शुरू कराया है। ताकि बरसात में कर्मचारियों को वाचिंग करते समय दिक्कत न हो। बजट रिलीज होते ही बॉडी की पिचिंग मजबूत की जाएगी।
- धर्म घोष, सहायक अभियंता, शारदा सागर खंड
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