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बिना तटबंध बने नहीं रुकेगी शारदा के बाढ़ की तबाही
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा (पीलीभीत)।
Updated Tue, 29 Aug 2017 11:11 PM IST
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sharda
- फोटो : amar ujala
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सिर्फ हवाई सर्वे और कोरी घोषणाएं तक थमी रहीं सरकारें
शारदा नदी के दोनों किनारों पर बसे गांवों में शारदा नदी का कटान व बाढ़ से तबाही नदी पर तटबंध बनाए बगैर नहीं रुक सकेगी। इसको लेकर सरकारें भी पिछले कई वर्षों से नदी पर तटबंध बनाने की घोषणाएं करती आ रही है, लेकिन आज भी मामला जस का तस है। वहीं यहां के बाशिंदे भी तब अपनी आवाज बुलंद करते हैं, जब बाढ़ तबाही मचाने लगती है।
वर्ष 1989 में हुई भी भारी तबाही
वर्ष 1989 में शारदा नदी में आई भीषण बाढ़ और भू-कटान से कई गांवों की आबादी का क्षेत्र व कृषि भूमि तबाह हो गई थी। रमनगरा, गुन्हान, बिजौरीखुर्द, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर के सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवार शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में अस्थाई झोपड़ियां डालकर रहने लगे। जो आज भी डैम के वर्जित क्षेत्र में बसे हुए हैं। राजस्व प्रशासन ने 628 बाढ़ पीड़ितों के मढिया लालपुर में आवासीय पट्टे तो किए, लेकिन वह भूमि भी शारदा नदी के मुहाने पर थी, इसके चलते बाढ़ पीड़ितों ने सुरक्षित स्थान पर जमीन देने की मांग की थी।
मुलायम, माया कर चुके हैं हवाई सर्वे
दरअसल वर्ष 1989 से लेकर अब तक चाहे भाजपा के राजनाथ सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हो या फिर मुलायम सिंह यादव व बसपा की मायावती, सभी ने बाढ़ की तबाही के समय हवाई सर्वे करने के बाद शारदा पदी पर स्थाई हल को तटबंध बनाने की घोषणा की, लेकिन वह सिर्फ बाढ़ पीड़ितों के आंसू पोंछने के अलावा आगे नहीं बढ़ सकी। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निर्देश पर केंद्र से भी बाढ़ सर्वेक्षण दल ने दौरा किया था, लेकिन नतीजा अब तक ढाक के तीन पात ही निकला। प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार के सिंचाई मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने तो तटबंध बनाने को शारदा सागर के एक अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में अभियंताओं की टीम गठित कर शारदा पर तटबंध बनाने को सर्वे के निर्देश तक दे डाले। यही नहीं सर्वे की समय सीमा भी निर्धारित की थी, लेकिन सर्वे समय से न हो पाने के चलते शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को ही निलंबित कर दिया। उसके बाद उनकी सरकार का कार्यकाल ही समाप्त हो गया।
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नेपाल में तटबंध बनने के बाद से शुरू हुई भारी तबाही
शारदा नदी का कटान रोकने को सरकारों की नियत कभी साफ नहीं रही। जो अस्थाई या स्थाई कार्य कराए गए, वह सभी कमीशनखोरी की भेंट चढ़ते गए और क्षेत्र की बर्बादी होती रही। जानकारों के मुताबिक जब तक शारदा पर तटबंध नहीं बनता, यह बर्बादी जारी रहेगी। पड़ोसी देश नेपाल ने अपने इलाके में तटबंध बना रखा है। नेपाल में तटबंध बनने से शारदा का पानी भी भारतीय क्षेत्र में तेज गति से घुसते ही भारी तबाही करता आ रहा है।
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शारदा नदी के दोनों किनारों पर बसे गांवों में शारदा नदी का कटान व बाढ़ से तबाही नदी पर तटबंध बनाए बगैर नहीं रुक सकेगी। इसको लेकर सरकारें भी पिछले कई वर्षों से नदी पर तटबंध बनाने की घोषणाएं करती आ रही है, लेकिन आज भी मामला जस का तस है। वहीं यहां के बाशिंदे भी तब अपनी आवाज बुलंद करते हैं, जब बाढ़ तबाही मचाने लगती है।
वर्ष 1989 में हुई भी भारी तबाही
वर्ष 1989 में शारदा नदी में आई भीषण बाढ़ और भू-कटान से कई गांवों की आबादी का क्षेत्र व कृषि भूमि तबाह हो गई थी। रमनगरा, गुन्हान, बिजौरीखुर्द, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर के सैकड़ों बाढ़ पीड़ित परिवार शारदा डैम के वर्जित क्षेत्र में अस्थाई झोपड़ियां डालकर रहने लगे। जो आज भी डैम के वर्जित क्षेत्र में बसे हुए हैं। राजस्व प्रशासन ने 628 बाढ़ पीड़ितों के मढिया लालपुर में आवासीय पट्टे तो किए, लेकिन वह भूमि भी शारदा नदी के मुहाने पर थी, इसके चलते बाढ़ पीड़ितों ने सुरक्षित स्थान पर जमीन देने की मांग की थी।
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मुलायम, माया कर चुके हैं हवाई सर्वे
दरअसल वर्ष 1989 से लेकर अब तक चाहे भाजपा के राजनाथ सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हो या फिर मुलायम सिंह यादव व बसपा की मायावती, सभी ने बाढ़ की तबाही के समय हवाई सर्वे करने के बाद शारदा पदी पर स्थाई हल को तटबंध बनाने की घोषणा की, लेकिन वह सिर्फ बाढ़ पीड़ितों के आंसू पोंछने के अलावा आगे नहीं बढ़ सकी। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निर्देश पर केंद्र से भी बाढ़ सर्वेक्षण दल ने दौरा किया था, लेकिन नतीजा अब तक ढाक के तीन पात ही निकला। प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार के सिंचाई मंत्री ओम प्रकाश सिंह ने तो तटबंध बनाने को शारदा सागर के एक अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में अभियंताओं की टीम गठित कर शारदा पर तटबंध बनाने को सर्वे के निर्देश तक दे डाले। यही नहीं सर्वे की समय सीमा भी निर्धारित की थी, लेकिन सर्वे समय से न हो पाने के चलते शारदा सागर के अधिशासी अभियंता को ही निलंबित कर दिया। उसके बाद उनकी सरकार का कार्यकाल ही समाप्त हो गया।
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नेपाल में तटबंध बनने के बाद से शुरू हुई भारी तबाही
शारदा नदी का कटान रोकने को सरकारों की नियत कभी साफ नहीं रही। जो अस्थाई या स्थाई कार्य कराए गए, वह सभी कमीशनखोरी की भेंट चढ़ते गए और क्षेत्र की बर्बादी होती रही। जानकारों के मुताबिक जब तक शारदा पर तटबंध नहीं बनता, यह बर्बादी जारी रहेगी। पड़ोसी देश नेपाल ने अपने इलाके में तटबंध बना रखा है। नेपाल में तटबंध बनने से शारदा का पानी भी भारतीय क्षेत्र में तेज गति से घुसते ही भारी तबाही करता आ रहा है।