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शारदा, सनेड़ी की तबाही से जूझेंगे सीमावर्ती गांवों के बाशिंदे
माधोटांडा/पीलीभीत।
Updated Mon, 08 Jun 2015 12:02 AM IST
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इंडो नेपाल सीमा पर सनेड़ी एवं शारदा नदी का दंश झेल रहे भारतीय व नेपाली
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परिवार दो पाटों के बीच पिस रहे हैं। तीन वर्ष पूर्व नौ लोगों की बाढ़ के
दौरान डूबने से मौत हो चुकी है। गत वर्ष सनेड़ी नदी ने बाढ़ के दौरान तीन
नई धाराएं बना ली हैं, जिससे नोमेंस लैंड समेत अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बने
दो पिलर भी खतरे की जद में आ चुके हैं।
जिले की पूरनपुर तहसील के नौजल्हा नंबर-दो के एक ओर शारदा नदी और दूसरी ओर नेपाल की सनेड़ी नदी है। नदियों का संगम भी नोमेंस लैंड क्षेत्र में है। जिससे बाढ़ के दौरान यहां तबाही होती है। नोमेंस लैंड व उससे सटे इलाके में नेपाल के चांदनी दोधारा नगरपालिका क्षेत्र में करीब तीन दर्जन नेपाली परिवारों की बस्ती है। हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलना बस्ती के लोगों की मजबूरी है। सनेड़ी नदी का नौजल्हा से सटे बूंदीभूड़ गांव तक दांया किनारा भारतीय क्षेत्र में व बांया किनारा नेपाल में पड़ता है।
ठोकरों ने ही पैदा कर दी मुश्किलें
बूंदीभूड़ इलाके में शारदा सागर खंड ने गत वर्ष दस ठोकरें बनाई थी। वहीं नेपाल ने भी उसके सामने पत्थर की दो ठोकरें नेपाली क्षेत्र में बना डाली। जिसका नतीजा यह निकला कि बूंदीभूड़ का इलाका तो सुरक्षित हुआ, लेकिन सनेड़ी में गत वर्ष जब बाढ़ आई तो बाढ़ के पानी से नौजल्हा नंबर दो क्षेत्र में तीन स्थानों से नई दिशा बनाने का प्रयास किया।
नोमेंस लैंड के दो पिलर खतरे की जद में
यहां पिछले वर्षों में पिलर संख्या 22 व 23 शारदा के गर्भ में समा गए थे, जबकि पिलर संख्या 19 सनेड़ी नदी के गर्भ में समा गया था। अब बीच मेें मात्र पिलर संख्या 20 व 21 ही बने दिखाई दे रहे हैं। इन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
बचाव की तैयारियां भी रहीं आधी अधूरी
शारदा सागर खंड ने पिछले वर्षों में जो दस ठोकरें बनाई थी, गत वर्ष उनके डाउन स्ट्रीम में और ठोकरें भारतीय क्षेत्र में बनाई जानी थी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया। इनके बनने से नौजल्हा, सनेड़ी तटबंध, स्तम्भ संख्या 20 व 21 तो सुरक्षित हो जाते और नेपाली बस्ती भी बचाई जा सकती थी।
नौ नेपालियों की हो चुकी मौत
नोमेंस लैंड से सटे इलाके में बसे नेपाली बताते हैं कि बूंदीभूड़ के सामने बसे उनके नौ नागरिकों की तीन वर्ष पूर्व सनेड़ी की बाढ़ में बहने से मौत हो गई थी। नेपाल सरकार ने मात्र 15 से 20 हजार रुपये की सहायता ही दी थी।
...तो नोमेंस लैंड का वजूद ही मिट जाएगा
गत वर्ष आई बाढ़ से पिलर संख्या 20 व 21 भी खतरे में पड़ गए थे। यदि यहां पर ठोकरें नहीं बनीं तो नोमेंस लैंड का वजूद ही समाप्त हो जाएगा। भारतीय क्षेत्र की नौजल्हा नंबर दो की आबादी व कृषि भूमि भी तबाह हो जाएगी।
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नो मेंस लैंड पर नौजलहा नं. दो क्षेत्र में शारदा किनारे के दाये किनारे संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए बजट अभाव के बावजूद जो बचाव कार्य संभव हो सकता है उसे कराया जा रहा है।
मिन्हाज अहमद, ईई बाढ़ खंड
जिले की पूरनपुर तहसील के नौजल्हा नंबर-दो के एक ओर शारदा नदी और दूसरी ओर नेपाल की सनेड़ी नदी है। नदियों का संगम भी नोमेंस लैंड क्षेत्र में है। जिससे बाढ़ के दौरान यहां तबाही होती है। नोमेंस लैंड व उससे सटे इलाके में नेपाल के चांदनी दोधारा नगरपालिका क्षेत्र में करीब तीन दर्जन नेपाली परिवारों की बस्ती है। हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलना बस्ती के लोगों की मजबूरी है। सनेड़ी नदी का नौजल्हा से सटे बूंदीभूड़ गांव तक दांया किनारा भारतीय क्षेत्र में व बांया किनारा नेपाल में पड़ता है।
ठोकरों ने ही पैदा कर दी मुश्किलें
बूंदीभूड़ इलाके में शारदा सागर खंड ने गत वर्ष दस ठोकरें बनाई थी। वहीं नेपाल ने भी उसके सामने पत्थर की दो ठोकरें नेपाली क्षेत्र में बना डाली। जिसका नतीजा यह निकला कि बूंदीभूड़ का इलाका तो सुरक्षित हुआ, लेकिन सनेड़ी में गत वर्ष जब बाढ़ आई तो बाढ़ के पानी से नौजल्हा नंबर दो क्षेत्र में तीन स्थानों से नई दिशा बनाने का प्रयास किया।
नोमेंस लैंड के दो पिलर खतरे की जद में
यहां पिछले वर्षों में पिलर संख्या 22 व 23 शारदा के गर्भ में समा गए थे, जबकि पिलर संख्या 19 सनेड़ी नदी के गर्भ में समा गया था। अब बीच मेें मात्र पिलर संख्या 20 व 21 ही बने दिखाई दे रहे हैं। इन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
बचाव की तैयारियां भी रहीं आधी अधूरी
शारदा सागर खंड ने पिछले वर्षों में जो दस ठोकरें बनाई थी, गत वर्ष उनके डाउन स्ट्रीम में और ठोकरें भारतीय क्षेत्र में बनाई जानी थी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं किया गया। इनके बनने से नौजल्हा, सनेड़ी तटबंध, स्तम्भ संख्या 20 व 21 तो सुरक्षित हो जाते और नेपाली बस्ती भी बचाई जा सकती थी।
नौ नेपालियों की हो चुकी मौत
नोमेंस लैंड से सटे इलाके में बसे नेपाली बताते हैं कि बूंदीभूड़ के सामने बसे उनके नौ नागरिकों की तीन वर्ष पूर्व सनेड़ी की बाढ़ में बहने से मौत हो गई थी। नेपाल सरकार ने मात्र 15 से 20 हजार रुपये की सहायता ही दी थी।
...तो नोमेंस लैंड का वजूद ही मिट जाएगा
गत वर्ष आई बाढ़ से पिलर संख्या 20 व 21 भी खतरे में पड़ गए थे। यदि यहां पर ठोकरें नहीं बनीं तो नोमेंस लैंड का वजूद ही समाप्त हो जाएगा। भारतीय क्षेत्र की नौजल्हा नंबर दो की आबादी व कृषि भूमि भी तबाह हो जाएगी।
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नो मेंस लैंड पर नौजलहा नं. दो क्षेत्र में शारदा किनारे के दाये किनारे संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए बजट अभाव के बावजूद जो बचाव कार्य संभव हो सकता है उसे कराया जा रहा है।
मिन्हाज अहमद, ईई बाढ़ खंड